{"_id":"67c5ea0fa7cd7d45be01b7c9","slug":"as-holi-approaches-adulterators-are-active-khalilabad-news-c-209-1-sgkp1040-129391-2025-03-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: होली नजदीक आते ही मिलावटखोर सक्रिय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: होली नजदीक आते ही मिलावटखोर सक्रिय
Mon, 03 Mar 2025 11:12 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 03 Mar 2025 11:12 PM IST
विज्ञापन
दुकान में तैयार हो रहा छेना।
संतकबीरनगर। होली का पर्व नजदीक है, इस पर्व पर मीठे की ज्यादा मांग रहती है। त्योहार आते ही मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। जिले में बिहार के कारीगर आकर मिठाई बना रहे हैं। बेसन, पनीर, दूध, खोवा आदि में मिलावट हो रही है। यह हम नहीं खाद्य विभाग की रिपोर्ट बता रही है। दो दिन पहले खाद्य टीम ने दूध के दो सैंपल और छेना का नमूना लिया है।
होली पर्व 14 मार्च को मनाया जाना है। इस पर्व पर मिठाई की डिमांड ज्यादा होती है। इसके साथ ही गुझिया सबसे ज्यादा बनाई जाती है। कुछ जगहों पर तो डिब्बा बंद गुझिया बेची जाती हंै। ऐसे में उन्हें लेने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।
यहां पर केमिकल युक्त पाउडर से खोवा तैयार किया जाता है। यह खोवा गुझिया में इस्तेमाल होता है। इसके साथ इसमें सस्ता वनस्पति घी और रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल हो रहा है। यह शहर के तमाम जगहों पर बिक रहे हैं। जो सेहत के लिए खतरनाक हैं। ऐसे में मिठाई खरीदते समय गुणवत्ता की जांच अवश्य कर लें।
विज्ञापन
यही नहीं नवाबगंज गोंडा, गोरखपुर और आजमगढ़ से आ रहे मिलावटी खोवे से भी मिठाई बनाई जा रही है। इस समय बाजार में मिलावटी मिठाई को खपाया जा रहा है, जो आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। मिलावटखोर मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत की परवाह तक नहीं करते। दूध एवं उससे बनने वाले मावा, पनीर आदि में मिलावट की सबसे ज्यादा संभावना रहती है।
जिले में मिलावटखोरी का धंधा नया नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा भी समय-समय पर इसके विरुद्ध अभियान चलाया जाता है, लेकिन इसके बाद भी मिलावटखोरी का यह धंधा जोरों से चल रहा है।
बाहर से आती हैं तैयार मिठाइयां : जिले में बाहर से डिब्बा बंद मिठाई आती हंै। जिसकी खपत जिले में ज्यादा है। इसमें बर्फी, पेड़ा, पपड़ी, गुझिया, रसगुल्ला, लाल मोहन शामिल हंै। यह मिठाई 160 रुपये से 180 रुपये किलो तक मिलते हैं। यहां पर आने के बाद इसका भाव 260 से 320 रुपये हो जाता है। जिससे व्यापारियों का काफी फायदा होता है। इसमें उन्हें कारीगर नहीं रखने पड़ते हैं और खर्च बचता है।
सस्ते के चक्कर में डालते हैं सिंथेटिक कलर : मिठाई की दुकान चलाने वाले एक दुकानदार ने बताया कि कुछ लोग मिठाई में सस्ता कलर डालते हैं। जो खाद्य कलर आता है वह आठ सौ रुपये किलो होती है। लेकिन पैसा बचाने के चक्कर में 200 रुपये किलो वाला कलर डालते हैं। जो सेहत के लिए हानिकारक होता है।
विज्ञापन
होली पर्व 14 मार्च को मनाया जाना है। इस पर्व पर मिठाई की डिमांड ज्यादा होती है। इसके साथ ही गुझिया सबसे ज्यादा बनाई जाती है। कुछ जगहों पर तो डिब्बा बंद गुझिया बेची जाती हंै। ऐसे में उन्हें लेने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।
विज्ञापन
यहां पर केमिकल युक्त पाउडर से खोवा तैयार किया जाता है। यह खोवा गुझिया में इस्तेमाल होता है। इसके साथ इसमें सस्ता वनस्पति घी और रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल हो रहा है। यह शहर के तमाम जगहों पर बिक रहे हैं। जो सेहत के लिए खतरनाक हैं। ऐसे में मिठाई खरीदते समय गुणवत्ता की जांच अवश्य कर लें।
विज्ञापन
यही नहीं नवाबगंज गोंडा, गोरखपुर और आजमगढ़ से आ रहे मिलावटी खोवे से भी मिठाई बनाई जा रही है। इस समय बाजार में मिलावटी मिठाई को खपाया जा रहा है, जो आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। मिलावटखोर मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत की परवाह तक नहीं करते। दूध एवं उससे बनने वाले मावा, पनीर आदि में मिलावट की सबसे ज्यादा संभावना रहती है।
जिले में मिलावटखोरी का धंधा नया नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा भी समय-समय पर इसके विरुद्ध अभियान चलाया जाता है, लेकिन इसके बाद भी मिलावटखोरी का यह धंधा जोरों से चल रहा है।
बाहर से आती हैं तैयार मिठाइयां : जिले में बाहर से डिब्बा बंद मिठाई आती हंै। जिसकी खपत जिले में ज्यादा है। इसमें बर्फी, पेड़ा, पपड़ी, गुझिया, रसगुल्ला, लाल मोहन शामिल हंै। यह मिठाई 160 रुपये से 180 रुपये किलो तक मिलते हैं। यहां पर आने के बाद इसका भाव 260 से 320 रुपये हो जाता है। जिससे व्यापारियों का काफी फायदा होता है। इसमें उन्हें कारीगर नहीं रखने पड़ते हैं और खर्च बचता है।
सस्ते के चक्कर में डालते हैं सिंथेटिक कलर : मिठाई की दुकान चलाने वाले एक दुकानदार ने बताया कि कुछ लोग मिठाई में सस्ता कलर डालते हैं। जो खाद्य कलर आता है वह आठ सौ रुपये किलो होती है। लेकिन पैसा बचाने के चक्कर में 200 रुपये किलो वाला कलर डालते हैं। जो सेहत के लिए हानिकारक होता है।