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Sant Kabir Nagar News: लोहरौली ठकुराई में संरक्षित किया गया प्राचीन कुआं
Mon, 30 Jun 2025 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 30 Jun 2025 11:33 PM IST
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ग्राम पंचायत लोहरौली ठकुराई में संरक्षित किया गया कुआं
लोहरौली। विकास खंड बेलहर कला के ग्राम पंचायत लोहरौली में पुरानी धरोहरों को संरक्षित करने की योजना के तहत गांव के कुएं को संरक्षित कराने का काम किया है। इसके तहत कुएं के चारों तरफ पिलर और जाली लगाकर उसे सुरक्षित किया गया है। वहीं रग बिरंगे बल्ब लगाकर सजाया गया है। ताकि धार्मिक संस्कारों में उसका उपयोग किया जा सके।
लोहरौली ठकुराई गांव में एक कुआं था। वह कुआं उपेक्षित पड़ा था। गांव की महिलाएं विवाह संस्कार के दौरान कुएं के पास जाकर अपनी परंपराओं को पूरा करती थीं। गांव की महिला प्रधान मिंदल देवी की नजर इसके बाद उस कुएं पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से संपर्क करके उसके जीर्णोद्धार की बात कही। प्राचीन जल स्रोतों को संरक्षित करने की सरकार की योजना के तहत कुएं को साफ कराया गया। उसका प्लास्टर कराकर उसको सुंदर बनाया गया।
वहीं उसकी जगत को ऊंचा करके उसके चारों तरफ पिलर बनाकर उसकी छतरी का निर्माण कराया गया। चूंकि विवाह संस्कार में कुओं का उपयोग रात्रि में होता है। इसलिए उसमें वायरिंग कराकर चारों तरफ रंगीन लाइटें लगवाई गई हैं। अब गांव की महिलाओं ने कुएं का उपयोग विविध संस्कारों के लिए करना शुरू कर दिया है।
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ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गुड्डू शर्मा ने बताया की सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक पुरानी धरोहरों को संरक्षित करने के अभियान की यह छोटी कड़ी है, गांव में मौजूद अन्य कुओं को भी इसी तर्ज पर संरक्षित कराया जाएगा। गांव की ममता, आशा, सरस्वती, फूलमती आदि महिलाओं का कहना है कि कुएं का संरक्षण होने से हमें विवाह संस्कार के दौरान यहां पर आकर अपना कार्य करने में सहूलियत होगी।
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राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं कुएं
जितने भी प्राचीन कुएं हैं उनको राजस्व अभिलेखों में भी दर्ज किया जाता है। यह कुएं जमीन की नापजोख के दौरान पत्थर का भी काम करते हैं। इन्हीं कुओं के पास से ही जमीन की नाम जोख हो जाती है।
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लोहरौली ठकुराई गांव में एक कुआं था। वह कुआं उपेक्षित पड़ा था। गांव की महिलाएं विवाह संस्कार के दौरान कुएं के पास जाकर अपनी परंपराओं को पूरा करती थीं। गांव की महिला प्रधान मिंदल देवी की नजर इसके बाद उस कुएं पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से संपर्क करके उसके जीर्णोद्धार की बात कही। प्राचीन जल स्रोतों को संरक्षित करने की सरकार की योजना के तहत कुएं को साफ कराया गया। उसका प्लास्टर कराकर उसको सुंदर बनाया गया।
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वहीं उसकी जगत को ऊंचा करके उसके चारों तरफ पिलर बनाकर उसकी छतरी का निर्माण कराया गया। चूंकि विवाह संस्कार में कुओं का उपयोग रात्रि में होता है। इसलिए उसमें वायरिंग कराकर चारों तरफ रंगीन लाइटें लगवाई गई हैं। अब गांव की महिलाओं ने कुएं का उपयोग विविध संस्कारों के लिए करना शुरू कर दिया है।
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ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गुड्डू शर्मा ने बताया की सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक पुरानी धरोहरों को संरक्षित करने के अभियान की यह छोटी कड़ी है, गांव में मौजूद अन्य कुओं को भी इसी तर्ज पर संरक्षित कराया जाएगा। गांव की ममता, आशा, सरस्वती, फूलमती आदि महिलाओं का कहना है कि कुएं का संरक्षण होने से हमें विवाह संस्कार के दौरान यहां पर आकर अपना कार्य करने में सहूलियत होगी।
राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं कुएं
जितने भी प्राचीन कुएं हैं उनको राजस्व अभिलेखों में भी दर्ज किया जाता है। यह कुएं जमीन की नापजोख के दौरान पत्थर का भी काम करते हैं। इन्हीं कुओं के पास से ही जमीन की नाम जोख हो जाती है।