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Sant Kabir Nagar News: मौसम दे रहा दगा, घट सकता है धान का रकबा
Sat, 24 Jun 2023 11:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 24 Jun 2023 11:57 PM IST
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धान की नर्सरी।
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। 15 जून से बारिश का मौसम शुरू हो जाता है। किसान धान की खेती की तैयारी में तेजी से जुट जाते हैं, लेकिन मौसम दगा दे रहा है। इसकी वजह से किसान धान की नर्सरी बचाने को लेकर जद्दोजहद कर रहे हैं। यदि समय से बारिश नहीं हुई तो धान का रकबा घट सकता है।
जिले में करीब तीन लाख किसान हैं। पिछले वर्ष 90,500 हेक्टेयर में धान की फसल की रोपाई का लक्ष्य था, जबकि 90,800 हेक्टेयर में धान की फसल उगाई गई थी, जबकि इस वर्ष 91885 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया गया है। इसके लिए 5000 से 6000 हेक्टेयर में धान की नर्सरी उगाने की जरूरत है। करीब 95 प्रतिशत किसानों ने धान की नर्सरी लगाई है। बारिश नहीं होने की वजह से किसान धान की नर्सरी को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष मई और जून में 65 से 70 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, जबकि इस वर्ष अभी तक बारिश नहीं हुई है। इससे किसान धान की रोपाई को लेकर असमंजस में हैं। वैसे धान की रोपाई का उचित समय जुलाई के प्रथम सप्ताह से शुरू हो जाता है, और 15 जुलाई तक किसान धान की रोपाई करते हैं।
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प्रगतिशील किसान सुरेंद्र राय ने बताया कि बारिश नहीं होने से धान की नर्सरी को बचाना मुश्किल हो गया। किसान निजी पंपिंग सेट से नर्सरी बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद तापमान अधिक होने से नर्सरी झुलसी जा रही है। यदि यही हाल रहा तो धान का रकबा घटेगा। बारिश न होना किसानों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है।
प्रगतिशील किसान आयुष रतन ने बताया कि बारिश नहीं होने से परेशान हैं। जो नर्सरी पड़ रही है, उसे किसान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। नर्सरी सूखी जा रही है। यदि यही स्थिति रही तो धान का रकबा तो घटेगा ही साथ में उत्पादन भी घट जाएंगा। संवाद
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अधिकांश नहरों में अभी तक नहीं पहुंचा है पानी
सरयू नहर खंड संतकबीरनगर के एक्सईएन विजय कुमार ने बताया कि जिले में 67 नहरें हैं, जो करीब 440 किलोमीटर दूरी तक हैं। अभी तक 43 नहरों में पानी छोड़ा जा चुका है। इसमें 18 नहरों में टेल तक पानी पहुंच गया है। किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। धान की रोपाई तक नहरों में पानी पहुंच जाएगा। वहीं नलकूप खंड के एक्सईएन लालचंद ने बताया कि जिले में 514 राजकीय नलकूप है। अधिकांश नलकूप ठीक हालत में हैं। 12 से 15 नलकूपों में यांत्रिक दोष और बिजली की समस्या है। लो वोल्टेज की समस्या बनी हुई है। इसके लिए बिजली निगम के एक्सईएन से पत्राचार किया गया है। किसानों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। सिंचाई के लिए राजकीय नलकूप सहायक होंगे।
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बारिश नहीं हुई तो बदलेगा खेती का पैटर्न
जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा बताते हैं कि मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 25 जून के बाद बारिश होने का अनुमान है, लेकिन यदि बारिश नहीं हुई तो धान का रकबा घटेगा और खेती का पैटर्न बदलेगा। ऐसे में किसानों को खेत खाली छोड़ने की जरूरत नहीं है। किसानों को सुझाव है कि बाजरा, अरहर, उरद और मोटे अनाज की बुवाई करें। वैसे 25 प्रतिशत किसान सीधी बुवाई करते है। सीड ड्रील, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर के अलावा छिड़काव विधि से बुवाई करते हैं। किसान किसी दशा में खेत खाली न छोड़ें।
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संतकबीरनगर। 15 जून से बारिश का मौसम शुरू हो जाता है। किसान धान की खेती की तैयारी में तेजी से जुट जाते हैं, लेकिन मौसम दगा दे रहा है। इसकी वजह से किसान धान की नर्सरी बचाने को लेकर जद्दोजहद कर रहे हैं। यदि समय से बारिश नहीं हुई तो धान का रकबा घट सकता है।
जिले में करीब तीन लाख किसान हैं। पिछले वर्ष 90,500 हेक्टेयर में धान की फसल की रोपाई का लक्ष्य था, जबकि 90,800 हेक्टेयर में धान की फसल उगाई गई थी, जबकि इस वर्ष 91885 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया गया है। इसके लिए 5000 से 6000 हेक्टेयर में धान की नर्सरी उगाने की जरूरत है। करीब 95 प्रतिशत किसानों ने धान की नर्सरी लगाई है। बारिश नहीं होने की वजह से किसान धान की नर्सरी को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
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कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष मई और जून में 65 से 70 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, जबकि इस वर्ष अभी तक बारिश नहीं हुई है। इससे किसान धान की रोपाई को लेकर असमंजस में हैं। वैसे धान की रोपाई का उचित समय जुलाई के प्रथम सप्ताह से शुरू हो जाता है, और 15 जुलाई तक किसान धान की रोपाई करते हैं।
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प्रगतिशील किसान सुरेंद्र राय ने बताया कि बारिश नहीं होने से धान की नर्सरी को बचाना मुश्किल हो गया। किसान निजी पंपिंग सेट से नर्सरी बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद तापमान अधिक होने से नर्सरी झुलसी जा रही है। यदि यही हाल रहा तो धान का रकबा घटेगा। बारिश न होना किसानों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है।
प्रगतिशील किसान आयुष रतन ने बताया कि बारिश नहीं होने से परेशान हैं। जो नर्सरी पड़ रही है, उसे किसान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। नर्सरी सूखी जा रही है। यदि यही स्थिति रही तो धान का रकबा तो घटेगा ही साथ में उत्पादन भी घट जाएंगा। संवाद
अधिकांश नहरों में अभी तक नहीं पहुंचा है पानी
सरयू नहर खंड संतकबीरनगर के एक्सईएन विजय कुमार ने बताया कि जिले में 67 नहरें हैं, जो करीब 440 किलोमीटर दूरी तक हैं। अभी तक 43 नहरों में पानी छोड़ा जा चुका है। इसमें 18 नहरों में टेल तक पानी पहुंच गया है। किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। धान की रोपाई तक नहरों में पानी पहुंच जाएगा। वहीं नलकूप खंड के एक्सईएन लालचंद ने बताया कि जिले में 514 राजकीय नलकूप है। अधिकांश नलकूप ठीक हालत में हैं। 12 से 15 नलकूपों में यांत्रिक दोष और बिजली की समस्या है। लो वोल्टेज की समस्या बनी हुई है। इसके लिए बिजली निगम के एक्सईएन से पत्राचार किया गया है। किसानों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। सिंचाई के लिए राजकीय नलकूप सहायक होंगे।
बारिश नहीं हुई तो बदलेगा खेती का पैटर्न
जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा बताते हैं कि मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 25 जून के बाद बारिश होने का अनुमान है, लेकिन यदि बारिश नहीं हुई तो धान का रकबा घटेगा और खेती का पैटर्न बदलेगा। ऐसे में किसानों को खेत खाली छोड़ने की जरूरत नहीं है। किसानों को सुझाव है कि बाजरा, अरहर, उरद और मोटे अनाज की बुवाई करें। वैसे 25 प्रतिशत किसान सीधी बुवाई करते है। सीड ड्रील, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर के अलावा छिड़काव विधि से बुवाई करते हैं। किसान किसी दशा में खेत खाली न छोड़ें।