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Sant Kabir Nagar News: किस्त चुकाने के लिए एजेंटों ने दिला दिया पांच कंपनियों से लोन
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कोतवाली खलीलाबाद पहुंचे दिनेश के परिजन
संतकबीरनगर। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का मकड़जाल जानलेवा साबित हो रहा है। जरूरत में मददगार बनकर कर्जदार बनाने वाले इन कंपनियों के एजेंट किस्त वसूली के लिए हैवान बन जाते हैं और किस्त चुकाने के लिए अपने तिकड़म की बदौलत एक-एक कर कई लोन दिला देते हैं। लोन के जाल में फंसे गंगा देवरिया के दिनेश सरीखे लोग आखिरकार आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो जाते हैं। एजेंटों ने दिनेश को पांच कंपनियों से लोन दिला रखा था।
कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के गंगा देवरिया गांव निवासी कोदई का कहना है कि उसके छोटे भाई दिनेश (27) ने चार साल पहले एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी से लोन लिया था। इसी बीच कुछ मजबूरियों की वजह वह लोन की किस्त नहीं भर पाया तो उन्हीं एजेंटों ने उसको किस्त भरने के लिए अन्य माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से लोन दिला दिया। इस तरह उस पर पांच माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का लोन आ गया। लोन भरते-भरते वह बेहद दबाव में आ गया था। कंपनियों के एजेंट आकर उसके घर पर बैठ जाते थे और परिवार के साथ बदसलूकी करते थे। दिनेश को प्रताड़ित करते थे। दिनेश बेहद तनाव में रहने लगा था। कोदई का कहना है कि दिनेश ने बुधवार की दोपहर में जहरीला पदार्थ खा लिया।
जानकारी होने पर उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां से डॉक्टरों ने उसे मेडिकल काॅलेज गोरखपुर के लिए रेफर कर दिया। मेडिकल काॅलेज में 30 जुलाई की रात 9 बजे उसकी मौत हो गई। गोरखपुर पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर बृहस्पतिवार को शव दिया जिसके बाद दाह संस्कार किया गया। कोदई ने बताया कि शुक्रवार को कोतवाली खलीलाबाद पुलिस को उसने माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों खिलाफ तहरीर दी। वहीं, कोतवाली खलीलाबाद के प्रभारी निरीक्षक पंकज कुमार पांडेय का कहना है कि इस मामले में कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के गंगा देवरिया गांव निवासी कोदई का कहना है कि उसके छोटे भाई दिनेश (27) ने चार साल पहले एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी से लोन लिया था। इसी बीच कुछ मजबूरियों की वजह वह लोन की किस्त नहीं भर पाया तो उन्हीं एजेंटों ने उसको किस्त भरने के लिए अन्य माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से लोन दिला दिया। इस तरह उस पर पांच माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का लोन आ गया। लोन भरते-भरते वह बेहद दबाव में आ गया था। कंपनियों के एजेंट आकर उसके घर पर बैठ जाते थे और परिवार के साथ बदसलूकी करते थे। दिनेश को प्रताड़ित करते थे। दिनेश बेहद तनाव में रहने लगा था। कोदई का कहना है कि दिनेश ने बुधवार की दोपहर में जहरीला पदार्थ खा लिया।
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जानकारी होने पर उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां से डॉक्टरों ने उसे मेडिकल काॅलेज गोरखपुर के लिए रेफर कर दिया। मेडिकल काॅलेज में 30 जुलाई की रात 9 बजे उसकी मौत हो गई। गोरखपुर पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर बृहस्पतिवार को शव दिया जिसके बाद दाह संस्कार किया गया। कोदई ने बताया कि शुक्रवार को कोतवाली खलीलाबाद पुलिस को उसने माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों खिलाफ तहरीर दी। वहीं, कोतवाली खलीलाबाद के प्रभारी निरीक्षक पंकज कुमार पांडेय का कहना है कि इस मामले में कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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