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नेताजी के कहने पर दिया इस्तीफा ः लक्ष्मीकांत
शोभित कुमार पांडेय/sant kabir nagar
Updated Mon, 26 Sep 2016 11:33 PM IST
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मेंहदावल विधायक लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद।
- फोटो : अमर उजाला
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मेंहदावल विधानसभा सीट से विधायक और खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री रहे लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद को मंत्री पद से हटाए जाने पर जिले का सियासी पारा चढ़ गया है। राजनीति के जानकार इसे पर्यवेक्षकों और लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं स्वयं विधायक लक्ष्मीकांत का कहना है कि ‘नेताजी’ (मुलायम सिंह) के कहने पर उन्होंने रविवार रात इस्तीफा दिया है।
उन्हें संगठन में बड़ा पद दिए जाने का आश्वासन दिया गया है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के वरिष्ठ नेता जयराम पांडेय का टिकट काटकर लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद को सपा ने मेंहदावल से टिकट दिया था। वह पार्टी के भरोसे पर खरे भी उतरे और चुनाव जीते। पार्टी ने उनके चेहरे के सहारे निषाद समाज को सपा से जोड़ने की पुरजोर कोशिश भी की। इसी के क्रम में उन्हें करीब दस महीने पहले मंत्रिमंडल में शामिल करते हुए खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री बनाया गया था। एक ओर जहां 26 सितंबर यानी सोमवार को मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, वहीं रविवार रात लक्ष्मीकांत से इस्तीफा ले लिए जाने की चर्चा है।
इस पूरे घटनाक्रम से एक ओर विरोधी खेमा खुश है, दूसरी ओर समर्थक मायूस हैं। जब फोन पर विधायक लक्ष्मीकांत निषाद से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में 60 ही मंत्री हो सकते हैं। विस्तार के बाद संख्या 61 हो रही थी। वे पार्टी अध्यक्ष और सीएम के विश्वासपात्र कार्यकर्ताओं में हैं। दोनों ने उन्हें रविवार शाम को बुलाया था और खुद का विश्वासपात्र बताते हुए इस्तीफा देने को कहा था। अनुशासित कार्यकर्ता होने के नाते उन्होंने तत्काल त्यागपत्र दे दिया। सपा सुप्रीमो ने उन्हें आश्वासन दिया है कि संगठन में इससे भी बड़ी जिम्मेदारी देंगे। टिकट कटने जैसी चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अधिसूचना जारी होने के बाद टिकट दिया था।
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हाईकमान का हर निर्णय उन्हें मान्य होगा। वहीं जिले में तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कहा जा रहा है कि कुछ समय पूर्व एमएलसी राजेश यादव और हीरालाल यादव जिले में आए थे। इस टीम की तरफ से निगेटिव रिपोर्टिंग किए जाने की चर्चा है। वहीं दूसरी चर्चा यह भी है कि एक महिला से विवाद के चलते कोर्ट द्वारा वारंट जारी होना और फिर हाजिर होने पर जेल भेजने का निर्णय होने पर उनका बीमारी के हवाले से जमानत होने तक अस्पताल में भर्ती रहना भी कुछ नेताओं को अखरा था।
इसके अतिरिक्त अगस्त में पर्यवेक्षक के तौर पर आए सपा के प्रदेश सचिव नवाब अली अकबर द्वारा भी जिले में कई दिन रहकर लोगों से पूछताछ की गई थी। उनके द्वारा भी नकारात्मक रिपोर्टिंग की बात सामने आ रही है। इन घटनाओं को मंत्री के हटाए जाने से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं सपा के जिलाध्यक्ष रामनारायन यादव ने पूछने पर बताया कि पप्पू निषाद को मंत्रिमंडल से क्यों हटाया गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। नेताजी और सीएम लखनऊ से ही पार्टी के सभी बडे़ नेता और छोटे कार्यकर्ताओं की गतिविधि पर नजर रखते हैं। कहीं से कोई बात रही होगी, उसी वजह से ऐसा हुआ होगा।
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उन्हें संगठन में बड़ा पद दिए जाने का आश्वासन दिया गया है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के वरिष्ठ नेता जयराम पांडेय का टिकट काटकर लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद को सपा ने मेंहदावल से टिकट दिया था। वह पार्टी के भरोसे पर खरे भी उतरे और चुनाव जीते। पार्टी ने उनके चेहरे के सहारे निषाद समाज को सपा से जोड़ने की पुरजोर कोशिश भी की। इसी के क्रम में उन्हें करीब दस महीने पहले मंत्रिमंडल में शामिल करते हुए खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री बनाया गया था। एक ओर जहां 26 सितंबर यानी सोमवार को मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, वहीं रविवार रात लक्ष्मीकांत से इस्तीफा ले लिए जाने की चर्चा है।
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इस पूरे घटनाक्रम से एक ओर विरोधी खेमा खुश है, दूसरी ओर समर्थक मायूस हैं। जब फोन पर विधायक लक्ष्मीकांत निषाद से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में 60 ही मंत्री हो सकते हैं। विस्तार के बाद संख्या 61 हो रही थी। वे पार्टी अध्यक्ष और सीएम के विश्वासपात्र कार्यकर्ताओं में हैं। दोनों ने उन्हें रविवार शाम को बुलाया था और खुद का विश्वासपात्र बताते हुए इस्तीफा देने को कहा था। अनुशासित कार्यकर्ता होने के नाते उन्होंने तत्काल त्यागपत्र दे दिया। सपा सुप्रीमो ने उन्हें आश्वासन दिया है कि संगठन में इससे भी बड़ी जिम्मेदारी देंगे। टिकट कटने जैसी चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अधिसूचना जारी होने के बाद टिकट दिया था।
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हाईकमान का हर निर्णय उन्हें मान्य होगा। वहीं जिले में तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कहा जा रहा है कि कुछ समय पूर्व एमएलसी राजेश यादव और हीरालाल यादव जिले में आए थे। इस टीम की तरफ से निगेटिव रिपोर्टिंग किए जाने की चर्चा है। वहीं दूसरी चर्चा यह भी है कि एक महिला से विवाद के चलते कोर्ट द्वारा वारंट जारी होना और फिर हाजिर होने पर जेल भेजने का निर्णय होने पर उनका बीमारी के हवाले से जमानत होने तक अस्पताल में भर्ती रहना भी कुछ नेताओं को अखरा था।
इसके अतिरिक्त अगस्त में पर्यवेक्षक के तौर पर आए सपा के प्रदेश सचिव नवाब अली अकबर द्वारा भी जिले में कई दिन रहकर लोगों से पूछताछ की गई थी। उनके द्वारा भी नकारात्मक रिपोर्टिंग की बात सामने आ रही है। इन घटनाओं को मंत्री के हटाए जाने से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं सपा के जिलाध्यक्ष रामनारायन यादव ने पूछने पर बताया कि पप्पू निषाद को मंत्रिमंडल से क्यों हटाया गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। नेताजी और सीएम लखनऊ से ही पार्टी के सभी बडे़ नेता और छोटे कार्यकर्ताओं की गतिविधि पर नजर रखते हैं। कहीं से कोई बात रही होगी, उसी वजह से ऐसा हुआ होगा।