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Sant Kabir Nagar News: एससीएसटी और दुष्कर्म का आरोपी दोषमुक्त, सीओ पर होगी कार्रवाई

Thu, 02 Nov 2023 01:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Thu, 02 Nov 2023 01:31 AM IST
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Accused of SCST and misdeeds acquitted, action will be taken against CO
संतकबीरनगर। अपर सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट जैनुद्दीन अंसारी ने बुधवार को दलित नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी देने के मामले में आरोपी बनाए गए 49 वर्षीय व्यक्ति को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। इसके साथ ही आरोप लगाने वाली पीड़िता की मां से तीन लाख पच्चीस हजार रुपये प्रतिकर की वसूली के लिए डीएम तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया है। मामले की विवेचक पुलिस उपाधीक्षक अशोक कुमार मिश्र (सेवानिवृत्त) पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय दिया है। साथ ही कार्रवाई की रिपोर्ट दो माह के अंदर तलब की है।
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आरोपी की तरफ से बचाव पक्ष के अधिवक्ता अमित कुमार उपाध्याय ने बताया कि थाना धनघटा के एक गांव की महिला ने 16 मई 2018 को मुकदमा दर्ज कराया था। महिला ने कहा था कि 13 मई 2018 को उसकी नाबालिग बेटी उसके साथ सोई थी। रात करीब नौ बजे उसकी बेटी अपने बिस्तर पर नहीं थी। तलाश करते हुए खेत की तरफ गई तो आवाज सुनाई दी। वह पास पहुंची तो बेटी का मुंह और हाथ बंधा हुआ था। एक गांव निवासी आरोपी उसकी बेटी से दुष्कर्म कर रहा था। वह चिल्लाई तो बीच बचाव के लिए गांव के अन्य लोग आ गए। आरोपी यह कहते हुए भाग गया कि इसकी जानकारी कहीं दी तो तुम्हें और तुम्हारी लड़की को जान से मार देंगे।
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तहरीर के आधार पर आरोपी के विरुद्ध दुष्कर्म जान से मारने की धमकी एससीएसटी तथा पॉक्सो एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ। आरोपी को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भिजवाज दिया। विवेचक ने साक्ष्य के आधार पर आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया। दौरान विचारण अभियोजन पक्ष की ओर से वादिनी मुकदमा डॉक्टर और सेवानिवृत पुलिस उपाधीक्षक समेत छह लोगों का सशपथ बयान कराया गया। आरोपी के बयान अंतर्गत धारा 313 को अंकित किया गया। आरोपी ने आरोप को गलत बताया। कहा कि घटना के समय पीड़िता बालिग थी। झूठा बयान दिए जाने गलत प्रपत्र तैयार किए जाने, चिकित्सकीय परीक्षण में पीड़िता की उम्र 19 वर्ष बताए जाने एवं लैंगिक हमले का कोई चिह्न नहीं मिलने तथा झूठा मुकदमा चलाए जाने तथा अपने को निर्दोष कहते हुए कथन किया। अभियोजन की तरफ से विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी देते हुए लैंगिक हमला किया है।
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आरोपी की ओर से उपस्थित अधिवक्ता अमित कुमार उपाध्याय ने तर्क प्रस्तुत किया कि आरोपी ने कोई घटना नहीं की। आरोपी को झूठे मुकदमे में फंसा दिया गया है। पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट जैनुद्दीन अंसारी ने निर्णय में कहा कि इस मामले में विवेचक ने कर्तव्य निर्वहन में घोर लापरवाही बरती है। जानबूझकर अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया है। आरोपी का मानसिक उत्पीड़न हुआ है। उसकी भरपाई प्रतिकर से की जानी न्यायहित में आवश्यक है। विवेचक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई भी आवश्यक है, जिससे भविष्य में कोई विवेचक मनमाने एवं विद्वेष पूर्ण ढंग से विवेचना न करे। विवेचक अशोक कुमार मिश्रा सेवानिवृत पुलिस उपाधीक्षक के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही केस दर्ज कराने वाली महिला से प्रतिकर की नियमानुसार वसूली का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि जनता अपना कर देश के विकास हेतु देती है किंतु कुछ स्वार्थी लोग कानून का गलत फायदा उठाकर अपने स्वयं के लाभ के लिए उक्त कर को प्राप्त कर लेते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि वादिनी ने जनता के जरिए दिए गए कर का दुरुपयोग अपने फायदे के लिए किया है। कोर्ट आरोपी को दोष मुक्त कर दिया तथा जिला कारागार में लगातार लगभग छह वर्ष से निरुद्ध आरोपी के रिहाई का आदेश भी दिया।
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