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Sant Kabir Nagar News: सात वर्ष से भटक रही महिला को मिला पति व बच्चों का साथ

Sun, 10 Dec 2023 01:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Sun, 10 Dec 2023 01:04 AM IST
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A woman who had been wandering for seven years got the support of her husband and children.
सिद्धार्थनगर। सात वर्ष से भटक रही विवाहिता मां देवी को शनिवार राष्ट्रीय लोक अदालत में उसके पति व बच्चों के साथ रहने पर बात बनी और वह ससुराल गयी। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय में विचाराधीन उसका वैवाहिक वाद सुलह समझौते के आधार पर निर्णीत हो गया।
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प्रधान न्यायाधीश रमेश चंद्र ने पति पत्नी को एक साथ रहने के लिए घर भेज दिया। मां देवी को पति रक्षाराम व पुत्र अविनाश कुमार खुशी खुशी घर ले गए। शनिवार को न्यायालय में आयोजित लोक अदालत में कराए गए सुलह समझौते से पांच परिवार एक साथ रहने को राजी हुए। जिससे माहौल खुशनुमा रहा और लोगों ने उन्हें फूल माला पहनाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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त्रिलोकपुर थानाक्षेत्र के ग्राम चरथरी निवासी तीरथ की पुत्री मां देवी की शादी सिकटा गांव निवासी रक्षाराम पुत्र गुप्तार के साथ हुई थी। उन दोनों से पुत्र अविनाश कुमार भी पैदा हुआ। विवाह के बाद से ही दोनों के संबंधों में खटास आ गयी और ससुरालियों ने दहेज की वजह से प्रताड़ित करके उसे घर से निकाल दिया। कई बार मान मनौव्वल व पंचायत से भी बात नहीं बनी। मजबूरन मां देवी को न्याय के लिए कानून का सहारा लेना पड़ा। उसने वर्ष 2017 में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय में भरण पोषण के लिए याचिका दायर किया जिसका निस्तारण मार्च 2023 में हुआ। न्यायालय ने पति रामरक्षा को आदेशित किया कि वह अपनी पत्नी मां देवी को सात हजार रुपये प्रतिमाह याचिका दाखिल करने की तिथि 17 जुलाई 2017 से भरण पोषण की अदायगी नियमित तौर पर करें। किंतु अदालत के आदेश की अवहेलना करते हुए पति ने भरण पोषण की धनराशि अदा नहीं किया।
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लाचार होकर उसने भरण पोषण के धनराशि की वसूली के लिए न्यायालय से गुहार लगाते हुए याचिका दाखिल किया। दिसंबर माह तक पति पर करीब पांच लाख 39 हजार रुपये के भरण पोषण धनराशि का दायित्व था। न्यायालय की आदेश पर उपस्थित पति ने मामले में अपना जवाब लगाया और साथ ले जाने की बात करने लगा और भरण पोषण करने की बात कही। न्यायालय ने पक्षकारों के उज्ज्वल भविष्य को देखते हुए पति पत्नी के बीच सुलह समझौता केंद्र के माध्यम से सुलह समझौते का प्रयास किया। न्यायालय का प्रयास सफल रहा और पक्षकार एक साथ रहने को राजी हुए। साथ रहने के लिए उनके बीच कुछ शर्तें तय हुईं और इसी के आधार पर दोनों ने न्यायालय में सुलहनामा दाखिल किया। न्यायालय ने सुलहनामे के आधार पर मामले को निर्णीत किया।


61 वैवाहिक मामलों का हुआ निस्तारण
जनपद एवं सत्र न्यायालय में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान परिवार न्यायालय में 61 मामलों का निस्तारण किया। यहां वैवाहिक विवाद के 165 मामले निस्तारण के लिए नियत थे, जिनकी सुनवाई प्रधान न्यायाधीश रमेश चंद्र ने किया। इन मामलों में उन्होंने पीड़ितों को 63 लाख 10 हजार भरण पोषण एवं सेटलमेंट के रूप में दिलवाया। कुछ मामलों में पक्षकारों की आपसी सहमति न बन पाने एवं कुछ में पक्षकारों की अनुपस्थिति की वजह से शेष मामलों का निस्तारण नहीं हो सका।

मुकदमे की पैरवी से मिली राहत
मोहाना थाना में आबकारी एक्ट में चालान हुए रामअधीन तीन वर्ष से मुकदमे की पैरवी में दौड़ रहे थे। उसे 2020 में चालान किया गया था। तब से हर तारीख पर वह दौड़ लगा रहा था। शनिवार को लोक अदालत में उस पर छह सौ रुपये जुर्माना लगाकर मामले का निस्तारण किया गया, तो उसने राहत की सांस ली। डुमरियागंज थाना क्षेत्र के मनोहरपुर निवासी अली मोहम्मद को मुर्गा मीट बिक्री करने के दौरान गंदगी फैलाने के मामले में चालान किया गया था। लोक अदालत में उस पर अर्थदंड लगाकर मामले का निस्तारण किया गया।


लोक अदालत में 73689 मुकदमों का निस्तारण
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तत्वाधान में राष्ट्रीय लोक अदालत कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश संजय कुमार मलिक ने किया। इस दौरान विभिन्न न्यायालयों में 73689 मुकदमों का निस्तारण किया गया एवं समस्त मामलों में अर्थदंड एवं सेटलमेंट धनराशि के रूप में 13,20,99,326 रुपये वसूले एवं दिलाये गये। इसमें समस्त राजस्व व समस्त चकबंदी न्यायालयों 62498 वादों का निस्तारण किया गया। सभी थानों में 5807 वाद, बीएसएनएल द्वारा 10 एवं समस्त बैंको द्वारा प्री-लिटिगेशन स्तर के 698 वादों का निस्तारण किया गया।
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