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Sant Kabir Nagar News: जन्माष्टमी पर रोहिणी और अष्टमी का बन रहा दुर्लभ संयोग

Sat, 24 Aug 2024 01:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Sat, 24 Aug 2024 01:17 AM IST
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A rare combination of Rohini and Ashtami is happening on Janmashtami.
- 26 अगस्त को मनाया जाएगा जन्माष्टमी का पर्व
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संवाद न्यूज एजेंसी

संतकबीरनगर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रोहिणी और अष्टमी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह संयोग शुभ फलदायी है। इस बार जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी। वहीं बाजार में रौनक बढ़ने लगी है। दिखने लगी है।
समय माता मंदिर के वरिष्ठ पुजारी ब्रजेश मिश्र ने बताया कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 25 अगस्त यानि रविवार को अर्द्धरात्रि के बाद 3:40 बजे से 26 अगस्त सोमवार अर्द्धरात्रि बाद 2:20 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। रोहिणी नक्षत्र 26 अगस्त यानि सोमवार को दोपहर 3:57 बजे से 27 अगस्त मंगलवार को दोपहर 3:38 बजे तक रहेगा। इस दिन का संयोग अत्यंत शुभ फलदाई होगा।
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बताया कि भगवान कृष्ण की जन्म कुंडली अपने आप में विशेष अद्भुत है। श्रीकृष्ण के अवतरण के समय जन्मकुंडली में नवग्रहों में से चार प्रमुख ग्रह चंद्रमा, मंगल, बृहस्पति व शनि उच्च राशि में थे। सूर्य, बुध और शुक्र स्वराशि में राहु, वृश्चिक और केतु ग्रह वृषभ राशि में विराजमान थे। कृष्ण के अवतार को पूर्ण अवतार माना गया है।
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कृष्ण जन्माष्टमी व्रत ऐसे करें पूर्ण

ज्योतिषाचार्य सुजीत कुमार ने बताया कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत से एक दिन पहले सप्तमी को हल्का और सात्विक भोजन करें। रात्रि को स्त्री संग से वंचित रहें। व्रत वाले दिन सुबह स्नान कर देवताओं को नमस्कार करते हुए पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके बैठें। मध्याह्न में काले तिलों के जल से स्नान कर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती देवकी और लक्ष्मी उनके चरण स्पर्श कर रहे हों या ऐसे भाव हों। उसके बाद विधि-विधान से पूजन करें।

कृष्ण जन्म का मुहूर्त

पंडित बाल गोविंद मिश्रा के मुताबिक इस बार कृष्ण जन्म का मुहूर्त रात 11:47 से 12:30 के मध्य है। जन्म कराने के शुभ समय में रात 12 बजे खीरे के अंदर लड्डूगोपाल की मूर्ति रखकर श्रीकृष्ण का जन्म कराएं। जन्म के बाद बाल गोपाल को स्नान-वस्त्र आदि कराकर आरती और पूजन करें। पूजन में देवकी, वसुदेव, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा, और लक्ष्मी का नाम जरूर लें। शंख में जल, फल, कुश, कुसुम और गंध डालकर दोनों घुटने जमीन में लगाएं और चन्द्रमा को अर्घ्य दें। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पिसे धनिये की पंजीरी का प्रसाद देकर भजन-कीर्तन आदि करें। दूसरे दिन पूर्वाह्न में स्नानादि करके व्रत का पारण करें। इस व्रत में अनाज का उपयोग नहीं किया जाता।

वस्त्र, झूला और पगड़ी की डिमांड
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बाजार में तरह-तरह के सामान आ गए हैं। कृष्ण वस्त्र, झूला, पगड़ी, बासुरी आदि बिक्री हो रही है। गोला बाजार में दुकान लगाए शिव कसौधन ने बताया कि जन्माष्टमी को लेकर सामान मंगाया गया है। जिसकी बिक्री शुरू हो गई है। इनमें सबसे ज्यादा कृष्ण की छोटी मूर्ति पसंद की जा रही है। साथ ही पगड़ी, झूला, बांसुरी आदि की डिमांड है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बाजार में तरह-तरह के सामान आ गए हैं। कृष्ण वस्त्र, झूला, पगड़ी, बासुरी आदि बिक्री हो रही है। गोला बाजार में दुकान लगाए शिव कसौधन ने बताया कि जन्माष्टमी को लेकर सामान मंगाया गया है। जिसकी बिक्री शुरू हो गई है। इनमें सबसे ज्यादा कृष्ण की छोटी मूर्ति पसंद की जा रही है। साथ ही पगड़ी, झूला, बांसुरी आदि की डिमांड है।
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