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शहीद इंसपेक्टर गोविंद सिंह के परिवार को मिला राष्ट्रपति पदक

Mon, 28 Oct 2013 05:39 AM IST
Sant kabir nagar
Sant kabir nagar Updated Mon, 28 Oct 2013 05:39 AM IST
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बघौली। कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के बघौली निवासी जांबाज शहीद इंसपेक्टर गोविंद सिंह को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने सराहनीय सेवा मेडल दिया था। रविवार को सीओ सदर शहीद इंसपेक्टर के घर पहुंचे। सीओ ने शहीद इंसपेक्टर की पत्नी कमला देवी को पूर्व राष्ट्रपति की तरफ से मिला सराहनीय सेवा मेडल और प्रशस्ति पत्र दिया। मेडल पाते ही पत्नी कमला देवी की यादें ताजा हो गईं और वह फफक पड़ीं।
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मऊ जनपद के चिरैयाकोट इलाके में तैनाती के दौरान 18 अप्रैल 2012 को मठिया गांव में बदमाशों से हुए मुठभेड़ के दौरान इंसपेक्टर गोविंद सिंह शहीद हो गए थे। घटना के बाद शहीद इंसपेक्टर का परिवार दुखों के गम में डूब गया था। रविवार को अचानक सीओ आरके शर्मा और कोतवाल बब्बन यादव शहीद इंसपेक्टर के घर पहुंचे। सूचना पाकर गांव के सैकड़ों लोग जुट गए। सीओ आरके शर्मा ने बताया कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने शहीद इंसपेक्टर गोविंद सिंह को उनकी सराहनीय सेवा को मान्यता देते हुए सराहनीय सेवा मेडल दिया था। सीओ ने शहीद इंसपेक्टर की पत्नी कमला देवी को प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान किया। मेडल पाते ही कमला देवी पति की यादों को ताजा कर भावुक हो गई और फफक कर रो पड़ी। शहीद इंसपेक्टर के भाई ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 में आजमगढ़ शहर कोतवाली के प्रभारी पद पर तैनाती के दौरान उनके भाई इंसपेक्टर गोविंद सिंह ने 50 हजार के एक ईनामी बदमाश को मुठभेड़ मेें मार गिराए थे। मुठभेड़ में बहादुरी पर आजमगढ़ के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक भगवान स्वरुप श्रीवास्तव ने उनके भाई इंसपेक्टर गोविंद सिंह के नाम को राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए प्रस्तावित करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा था। प्रदेश सरकार के अनुरोध पर राष्ट्रपति पुरस्कार देने की घोषणा हुई थी। वर्ष 2005 में गोविंद सिंह का आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला था। आजमगढ़ में तैनाती के दौरान ही उनके शहीद भाई इंसपेक्टर गोविंद सिंह को राज्यपाल पदक मिलना था।
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राष्ट्रपति की तरफ से सराहनीय सेवा का मेडल 26 जनवरी 2012 को ही मिलना था, लेकिन मार्ग दुर्घटना में गंभीर रुप से घायल होने के कारण मेडल नहीं मिल पाया था। 18 अप्रैल 2012 को बदमाशों से हुए मुठभेड में उनके भाई इंसपेक्टर गोविंद सिंह शहीद हो गए। राष्ट्रपति का पदक यदि भाई के जीवित रहते मिला होता तो बात कुछ और ही होती। राष्ट्रपति के जरिए शहीद भाई को सम्मान मिलने पर जहां खुशी है, वहीं भाई की कमी खल रही है।
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शहीद स्मारक न बन पाने का है मलाल
शहीद इंसपेक्टर गोविंद सिंह के परिजनों ने काफी लंबे समय से बघौली चौराहे पर शहीद स्मारक बनाए जाने की मांग की थी, लेकिन स्मारक न बन पाने का मलाल है। गांव निवासी शशि सिंह, मुकेश सिंह, रवींद्र सिंह ने कहा कि शासन स्तर से शहीद स्मारक बनवाने की पहल नहीं हुई। जबकि सीओ आर के शर्मा ने कहा कि यदि जमीन मिलती है और शासन से इस पर पहल हुई तो स्मारक बनाने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। राष्ट्रपति पुरस्कार पाने वाले शहीद इंसपेक्टर गोविंद सिंह की पत्नी को रेलवे में दो एसी टिकट के साथ एक सहयोगी का टिकट, एक टेलीफोन कनेक्शन मुफ्त तथा रोडवेज में दो टिकट के साथ एक सहयोगी का टिकट मुफ्त में मिलेगा। इस दौरान गांव वेद प्रकाश सिंह, इंद्रदेव राय, सुरेश सिंह, अखिलेश सिंह, यशोदा नंद राय, विनोद राय, पवन यादव, गिरजेश सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
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