{"_id":"5b5221ca4f1c1b47748b6066","slug":"81532109258-sant-kabir-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जलस्तर नीचे जाने से पीने के पानी का संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जलस्तर नीचे जाने से पीने के पानी का संकट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Jul 2018 11:27 PM IST
विज्ञापन
नल से पानी पीता बच्चा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मगहर। तापमान तेज और बरसात के नहीं होने से पेयजल की समस्या खड़ी हो गई। पानी के संकट से नगर तथा उसके आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश नल या तो सूख गए हैं या फिर पानी ही कम दे रहे हैं। इसके कारण पेयजल का संकट पैदा हो गया है।
गौरतलब हो कि बरसात के नहीं होने से जहां एक तरफ किसान परेशान हैं। कैसे धान की रोपाई, बोआई की जाए, क्योंकि जुलाई माह में बरसात के न होने से धान की फसल प्र भावित हो गई है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
वहीं दूसरी तरफ जल का स्तर नीचा हो जाने से ट्यूबेल, हैंडपंप तथा बोरिंग से पानी कम मिल रहा है। मगहर कस्बे के अधिकांश हैंडपंप पानी देना बंद कर दिए हैं। इसके अलावा सेमरा, मंझरिया, भैसहिंया, मोहम्मपुर कठार, रसूलपुर, रसूलाबाद आदि ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप के सूखने से ग्रामीण परेशान और चिंतित हैं।
विज्ञापन
रामसूरत, अनिरुद्ध, रमेश कुमार, सरफुद्दीन अहमद, बुझारत, दूधनाथ आदि ग्रामीणों ने बताया कि आषाढ़ महीने में पानी की ऐसी कभी दुर्गति नहीं देखने को मिली थी। पेयलज के संकट से मनुष्य और जानवर दोनों प्रभावित हो गए हैं। सरकार अब जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर देना चाहिए।
विज्ञापन
गौरतलब हो कि बरसात के नहीं होने से जहां एक तरफ किसान परेशान हैं। कैसे धान की रोपाई, बोआई की जाए, क्योंकि जुलाई माह में बरसात के न होने से धान की फसल प्र भावित हो गई है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
विज्ञापन
वहीं दूसरी तरफ जल का स्तर नीचा हो जाने से ट्यूबेल, हैंडपंप तथा बोरिंग से पानी कम मिल रहा है। मगहर कस्बे के अधिकांश हैंडपंप पानी देना बंद कर दिए हैं। इसके अलावा सेमरा, मंझरिया, भैसहिंया, मोहम्मपुर कठार, रसूलपुर, रसूलाबाद आदि ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप के सूखने से ग्रामीण परेशान और चिंतित हैं।
विज्ञापन
रामसूरत, अनिरुद्ध, रमेश कुमार, सरफुद्दीन अहमद, बुझारत, दूधनाथ आदि ग्रामीणों ने बताया कि आषाढ़ महीने में पानी की ऐसी कभी दुर्गति नहीं देखने को मिली थी। पेयलज के संकट से मनुष्य और जानवर दोनों प्रभावित हो गए हैं। सरकार अब जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर देना चाहिए।