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मगहर महोत्सव--पांच
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‘कबीर के विचारों केे आत्मसात करने से बदलेगा समाज’
वर्तमान परिवेश में कबीर के विचारों की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी
फोटो है
अमर उजाला ब्यूरो
मगहर। महोत्सव के चौथे दिन ‘वर्तमान परिवेश में कबीर के विचारों की प्रासंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने वर्तमान परिवेश में संत कबीर के विचारों को जरूरी बताया।
बतौर मुख्य अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. रामदेव शुक्ल ने कहा कि कबीर के समय में कभी भी सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए। लोगों ने एकजुट होकर अपनी ताकत का एहसास कराया। 1857 के बाद देश में प्रभावी ईस्ट इंडिया कंपनी ने दोनों धर्मों के लोगों को लड़ाने का कार्य किया था। उन्होंने कहा कि कबीर के विचारों को आत्मसात कर लेने मात्र से व्यक्ति का जीवन सफल हो जाएगा। व्यक्ति को धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए, जिसने धैर्य से कार्य किया उसे निश्चित ही सफलता मिलती है। वर्तमान परिवेश में लोगों में धैर्य की कमी दिख रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महंत विचार दास ने कहा कि कबीर साहेब ने हमेशा ही समाज को सही दिशा में लाने का कार्य किया। उनके विचारों को समझने और अंगीकृत करने की जरूरत है। कबीर साहेब समाज में फैली विकृतियों, बाहरी आडंबरों के प्रबल विरोधी थे। डॉ. हरिशरण शास्त्री ने कहा कि कबीर साहेब ने मानवता, प्रेम और अहिंसा की बात की है। उनके कहे गए दोहे आज भी हमें जीवन जीने की कला सिखाते नजर आते हैं।
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कार्यक्रम में डॉ. सुभाष चंद्र यादव, नासिर अली खान, उदय नारायण राय, सैय्यद शमीम अहमद, शिव कुमार गुप्ता, वेद प्रकाश चौबे, जिया अंसारी, डॉ. अजय पांडेय, संतोष यादव, मेराज खां आदि लोग मौजूद रहे। संचालन डॉ. अजय कुमार पांडेय ने किया।
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वर्तमान परिवेश में कबीर के विचारों की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी
फोटो है
अमर उजाला ब्यूरो
मगहर। महोत्सव के चौथे दिन ‘वर्तमान परिवेश में कबीर के विचारों की प्रासंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने वर्तमान परिवेश में संत कबीर के विचारों को जरूरी बताया।
बतौर मुख्य अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. रामदेव शुक्ल ने कहा कि कबीर के समय में कभी भी सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए। लोगों ने एकजुट होकर अपनी ताकत का एहसास कराया। 1857 के बाद देश में प्रभावी ईस्ट इंडिया कंपनी ने दोनों धर्मों के लोगों को लड़ाने का कार्य किया था। उन्होंने कहा कि कबीर के विचारों को आत्मसात कर लेने मात्र से व्यक्ति का जीवन सफल हो जाएगा। व्यक्ति को धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए, जिसने धैर्य से कार्य किया उसे निश्चित ही सफलता मिलती है। वर्तमान परिवेश में लोगों में धैर्य की कमी दिख रही है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महंत विचार दास ने कहा कि कबीर साहेब ने हमेशा ही समाज को सही दिशा में लाने का कार्य किया। उनके विचारों को समझने और अंगीकृत करने की जरूरत है। कबीर साहेब समाज में फैली विकृतियों, बाहरी आडंबरों के प्रबल विरोधी थे। डॉ. हरिशरण शास्त्री ने कहा कि कबीर साहेब ने मानवता, प्रेम और अहिंसा की बात की है। उनके कहे गए दोहे आज भी हमें जीवन जीने की कला सिखाते नजर आते हैं।
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कार्यक्रम में डॉ. सुभाष चंद्र यादव, नासिर अली खान, उदय नारायण राय, सैय्यद शमीम अहमद, शिव कुमार गुप्ता, वेद प्रकाश चौबे, जिया अंसारी, डॉ. अजय पांडेय, संतोष यादव, मेराज खां आदि लोग मौजूद रहे। संचालन डॉ. अजय कुमार पांडेय ने किया।