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Sant Kabir Nagar News: सात माह में दुष्कर्म के 27 केस, 90% मामलों में भरोसे का कत्ल
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- जिले में इस साल दुष्कर्म के 27 और छेड़खानी के दर्ज हुए 45 केस
- जान पहचान के लोगों ने ही किया इज्जत के साथ खिलवाड़
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिले में इस साल दुष्कर्म के 27 और छेड़खानी के 45 मामले दर्ज हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 90 फीसदी मामलों के आरोपी पीड़िता के परिवार के करीबी हैं। आठ साल की एक पीड़िता को पड़ोसी ने ही हवस का शिकार बनाया।
ये आंकड़े जहां समाज का विद्रूप चेहरा उजागर करते हैं वहीं सजग और सचेत भी करते हैं। दुष्कर्म के अधिकतर मामले ऐसे आए हैं जिनमें पीड़िता के परिजनों के करीबी ने ही आरोपी हैं। धनघटा, कोतवाली खलीलाबाद और दुधारा थानाक्षेत्र में इस वर्ष तीन मासूमों को पड़ोसियों ने ही हवस का शिकार बना डाला। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक एक जनवरी से अब तक इस साल दुष्कर्म के 27 और छेड़खानी के 45 मामले दर्ज किए गए हैं। छेड़खानी के तमाम मामलों में लोकलाज के भय से पीड़ित परिजन थानों पर शिकायत ही नहीं करते हैं। दुष्कर्म के दर्ज 90 फीसदी मामलों में आरोपी बेहद करीबी रहे हैं, जिन्होंने अपनी हवस के लिए मासूमों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हुए भरोसे का कत्ल किया।
बच्चों को गुड टच व बैड टच की जानकारी बेहद जरूरी है। जो लोग ऐसे घृणित कार्य करते हैं, उनके पालन-पोषण में दोष होता है। लैंगिक इच्छाओं का असंतोष कई बार वजह बनता है। कुछ अनुवांशिक लक्षण जो माता-पिता से संतान में आते हैं, वे भी कारण बनते हैं। इसके लक्षण बचपन में ही दिख जाते हैं। मनोचिकित्सक से इलाज करा लिया जाए तो भविष्य सुधारा जा सकता है।
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- डॉ. तन्वांगी मणि शुक्ला, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
दुष्कर्म के मामलों में सख्ती से जांच और विवेचना कर दोषियों को सजा दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अभिभावक अपने बच्चों को गुड टच और बैड टच की जानकारी दें। साथ ही किसी पर भरोसा करने से पहले उसके क्रियाकलापों की जांच जरूर करें।
- सत्यजीत गुप्ता, एसपी
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- जान पहचान के लोगों ने ही किया इज्जत के साथ खिलवाड़
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिले में इस साल दुष्कर्म के 27 और छेड़खानी के 45 मामले दर्ज हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 90 फीसदी मामलों के आरोपी पीड़िता के परिवार के करीबी हैं। आठ साल की एक पीड़िता को पड़ोसी ने ही हवस का शिकार बनाया।
ये आंकड़े जहां समाज का विद्रूप चेहरा उजागर करते हैं वहीं सजग और सचेत भी करते हैं। दुष्कर्म के अधिकतर मामले ऐसे आए हैं जिनमें पीड़िता के परिजनों के करीबी ने ही आरोपी हैं। धनघटा, कोतवाली खलीलाबाद और दुधारा थानाक्षेत्र में इस वर्ष तीन मासूमों को पड़ोसियों ने ही हवस का शिकार बना डाला। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक एक जनवरी से अब तक इस साल दुष्कर्म के 27 और छेड़खानी के 45 मामले दर्ज किए गए हैं। छेड़खानी के तमाम मामलों में लोकलाज के भय से पीड़ित परिजन थानों पर शिकायत ही नहीं करते हैं। दुष्कर्म के दर्ज 90 फीसदी मामलों में आरोपी बेहद करीबी रहे हैं, जिन्होंने अपनी हवस के लिए मासूमों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हुए भरोसे का कत्ल किया।
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बच्चों को गुड टच व बैड टच की जानकारी बेहद जरूरी है। जो लोग ऐसे घृणित कार्य करते हैं, उनके पालन-पोषण में दोष होता है। लैंगिक इच्छाओं का असंतोष कई बार वजह बनता है। कुछ अनुवांशिक लक्षण जो माता-पिता से संतान में आते हैं, वे भी कारण बनते हैं। इसके लक्षण बचपन में ही दिख जाते हैं। मनोचिकित्सक से इलाज करा लिया जाए तो भविष्य सुधारा जा सकता है।
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- डॉ. तन्वांगी मणि शुक्ला, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
दुष्कर्म के मामलों में सख्ती से जांच और विवेचना कर दोषियों को सजा दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अभिभावक अपने बच्चों को गुड टच और बैड टच की जानकारी दें। साथ ही किसी पर भरोसा करने से पहले उसके क्रियाकलापों की जांच जरूर करें।
- सत्यजीत गुप्ता, एसपी