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बाढ़ का कहर
Updated Sun, 26 Aug 2018 12:17 AM IST
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घाघरा का जलस्तर बढ़ने से बाढ़पीड़ित दहशत में
फोटो सहित
बाढ़ पीड़ितों की कम नहीं हो रहीं दुश्वारियां
डेढ़ सेमी प्रति घंटे की दर बढ़ रही घाघरा
अमर उजाला ब्यूरो
हैंसर। घाघरा के जलस्तर में शनिवार सुबह से फिर वृद्धि होने लगी। सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक नदी के पानी में 12 सेमी का इजाफा हुआ है। इससे बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग दहशतजदा हो गए हैं। लोगों का कहना है कि नदी के बढ़ने और लगातार बारिश के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शुक्रवार को जलस्तर घटकर 79.18 मीटर पर पहुंच जाने से बाढ़प्रभावित गांव के लोगों ने राहत की सांस ली थी। बांध पर शरण लिए लोग घरों को लौटने की तैयारी करने लगे थे लेकिन शनिवार की सुबह से जलस्तर में बढ़ोत्तरी और बारिश से वे लोग सहम गए। बांध पर शरण लिए लोगों के लिए बारिश किसी अभिशाप से कम नहीं है। फटी-पुरानी पन्नी तानकर लोग समय काट रहे हैं। प्रभुनाथ, बुद्धिराम, रामसुमेर, जगदीश, अवधेश, कलावती, मालती आदि का कहना है कि घर से लेकर शरण स्थल तक पानी पीछा नहीं छोड़ रहा है। बारिश से लकड़ी भीग गई है। चूल्हा नहीं जल पा रहा है। पन्नी के नीचे रखा गया आटा-चावल गिला हो गया है। किस तरह बच्चों को खिलाएं और अपना पेंट भरें, समझ में नहीं आ रहा है। बाढ़पीड़ितों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी पशुओं के चारे की है। शासन-प्रशासन की तरफ से न तो कोई राहत सामग्री मिल रही है और न ही मिलने की उम्मीद है। तुर्कवलिया में घाघरा का जल स्तर मापने वालों का कहना है कि नदी का जलस्तर आठ घंटे में 12 सेमी बढ़ा है। नदी खतरे के महज पांच सेमी नीचे बह रही है। यदि ऐसे ही बढ़ोत्तरी हुई तो आधी रात के पहले नदी खतरे के निशान को पार कर जाएगी। एसडीएम बाबूराम ने कहा कि बंधे पर लगातार नजर रखी जा रही है। अभी नदी खतरे के नीचे बह रही है। जहां तक लोगों को राहत पहुंचाने की बात है तो कर्मचारियों को लगा दिया गया है।
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बाढ़ पीड़ितों की कम नहीं हो रहीं दुश्वारियां
डेढ़ सेमी प्रति घंटे की दर बढ़ रही घाघरा
अमर उजाला ब्यूरो
हैंसर। घाघरा के जलस्तर में शनिवार सुबह से फिर वृद्धि होने लगी। सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक नदी के पानी में 12 सेमी का इजाफा हुआ है। इससे बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग दहशतजदा हो गए हैं। लोगों का कहना है कि नदी के बढ़ने और लगातार बारिश के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शुक्रवार को जलस्तर घटकर 79.18 मीटर पर पहुंच जाने से बाढ़प्रभावित गांव के लोगों ने राहत की सांस ली थी। बांध पर शरण लिए लोग घरों को लौटने की तैयारी करने लगे थे लेकिन शनिवार की सुबह से जलस्तर में बढ़ोत्तरी और बारिश से वे लोग सहम गए। बांध पर शरण लिए लोगों के लिए बारिश किसी अभिशाप से कम नहीं है। फटी-पुरानी पन्नी तानकर लोग समय काट रहे हैं। प्रभुनाथ, बुद्धिराम, रामसुमेर, जगदीश, अवधेश, कलावती, मालती आदि का कहना है कि घर से लेकर शरण स्थल तक पानी पीछा नहीं छोड़ रहा है। बारिश से लकड़ी भीग गई है। चूल्हा नहीं जल पा रहा है। पन्नी के नीचे रखा गया आटा-चावल गिला हो गया है। किस तरह बच्चों को खिलाएं और अपना पेंट भरें, समझ में नहीं आ रहा है। बाढ़पीड़ितों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी पशुओं के चारे की है। शासन-प्रशासन की तरफ से न तो कोई राहत सामग्री मिल रही है और न ही मिलने की उम्मीद है। तुर्कवलिया में घाघरा का जल स्तर मापने वालों का कहना है कि नदी का जलस्तर आठ घंटे में 12 सेमी बढ़ा है। नदी खतरे के महज पांच सेमी नीचे बह रही है। यदि ऐसे ही बढ़ोत्तरी हुई तो आधी रात के पहले नदी खतरे के निशान को पार कर जाएगी। एसडीएम बाबूराम ने कहा कि बंधे पर लगातार नजर रखी जा रही है। अभी नदी खतरे के नीचे बह रही है। जहां तक लोगों को राहत पहुंचाने की बात है तो कर्मचारियों को लगा दिया गया है।
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