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आमी महोत्सव का हुआ समापन
Updated Wed, 14 Nov 2018 12:37 AM IST
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आमी नदी को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कराने का संकल्प
फोटो
दो दिवसीय आमी महोत्सव का हुआ समापन
बुद्ध व कबीर के विचार ही समरसता का मार्ग दिखाते है : कोमल
अमर उजाला ब्यूरो
बेलहर। आमी नदी के तट पर पडरिया-देवपुर में दो दिवसीय आमी महोत्सव के समापन पर आमी नदी को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कराने का संकल्प लिया गया। सपा के पूर्व प्रदेश सचिव कोमल यादव ने कार्यक्रम का समापन करते हुए अगले वर्ष भव्य आमी महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
वक्ताओं ने बौद्ध व कबीर के विचारों कोसमरसता का माध्यम बताया। सपा नेता कोमल यादव ने कहा कि आमी नदी के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने व इसके संरक्षण के लिए दो साल पहले आमी महोत्सव की शुरुआत हुई थी। यह नदी भगवान बुद्ध के निकट रही है। महान संत कबीर दास के अंतिम काल की गवाह भी आमी ही है, लेकिन विगत एक दशक से आमी में उद्योगों से निकले अपशिष्ट रासायनिक पदार्थों की वजह से अंतिम सांस ले रही थी। सरकारों की अनदेखी की वजह से ही आमी को बचाने के संकल्प लिया गया। इस दौरान गायक धनराज गौड़ ने बुद्ध व कबीर दास के विचारों पर आधारित गीतों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम आयोजक रामनारायन यादव ने आभार जताया। इस दौरान निसार अहमद खान, फूलचंद यादव, सुनील कुमार यादव, सत्यभान यादव, अनिल चौधरी, सुभाष विश्वकर्मा, कमाल अहमद, जनार्दन आदि मौजूद रहे।
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दो दिवसीय आमी महोत्सव का हुआ समापन
बुद्ध व कबीर के विचार ही समरसता का मार्ग दिखाते है : कोमल
अमर उजाला ब्यूरो
बेलहर। आमी नदी के तट पर पडरिया-देवपुर में दो दिवसीय आमी महोत्सव के समापन पर आमी नदी को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कराने का संकल्प लिया गया। सपा के पूर्व प्रदेश सचिव कोमल यादव ने कार्यक्रम का समापन करते हुए अगले वर्ष भव्य आमी महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
वक्ताओं ने बौद्ध व कबीर के विचारों कोसमरसता का माध्यम बताया। सपा नेता कोमल यादव ने कहा कि आमी नदी के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने व इसके संरक्षण के लिए दो साल पहले आमी महोत्सव की शुरुआत हुई थी। यह नदी भगवान बुद्ध के निकट रही है। महान संत कबीर दास के अंतिम काल की गवाह भी आमी ही है, लेकिन विगत एक दशक से आमी में उद्योगों से निकले अपशिष्ट रासायनिक पदार्थों की वजह से अंतिम सांस ले रही थी। सरकारों की अनदेखी की वजह से ही आमी को बचाने के संकल्प लिया गया। इस दौरान गायक धनराज गौड़ ने बुद्ध व कबीर दास के विचारों पर आधारित गीतों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम आयोजक रामनारायन यादव ने आभार जताया। इस दौरान निसार अहमद खान, फूलचंद यादव, सुनील कुमार यादव, सत्यभान यादव, अनिल चौधरी, सुभाष विश्वकर्मा, कमाल अहमद, जनार्दन आदि मौजूद रहे।
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