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कबीर चौरा में पुरानी ईंटों से चल रहा निर्माण कार्य
Sat, 08 Jun 2019 11:18 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
Santkabirnagar
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jun 2019 11:18 PM IST
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संत कबीर की निर्वाण स्थली पर निर्माण में हो रहा पुरानी ईंटों का प्रयोग।
- फोटो : अमर उजाला
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मगहर। संत कबीर की निर्वाण स्थली मगहर के कबीर चौरा परिसर में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कराए जा रहे सुंदरीकरण कार्य में पुरानी ईंटों का ही प्रयोग हो रहा है। संतकबीर की समाधि और मजार के सामने बनी दीवार एवं ग्रील को हटाकर दुबारा पुरानी ईंटों से ही चिनाई का कार्य चल रहा है। जिस पर लोगों ने आपत्ति जताते हुए पर्यटन विभाग के अफसरों से शिकायत की है।
सूफी संत एवं सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक संत कबीर की निर्वाण स्थली को पर्यटन विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा है। कार्यदाई संस्था यूपीसीएल की तरफ से संत कबीर की मजार और समाधि की दीवार तथा गुफा के फर्श पर पत्थर लगाने का कार्य किया जा रहा है।
इसके साथ ही मजार के सामने और समाधि स्थल पर लोहे का नया ग्रिल लगाया जाना है। इस समय दीवार का निर्माण कार्य चल रहा है। आरोप है कि इस दीवार में नई ईंटों की जगह पुरानी ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है। इससे कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। इस संबंध में यूपीसीएल के अवर अभियंता चंद्रजीत यादव ने बताया कि आगणन में नई ईंट के मूल्य में 40 प्रतिशत कटौती हो जाने की वजह से पुरानी ईंटों को साफ कर फिर से लगाया जा रहा है।
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जरूरत पड़ने पर नई ईंटों का भी प्रयोग हो रहा है। वहीं क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अरविंद राय का कहना है कि कबीर चौरा के विकास कार्य में कहीं भी पुरानी ईंट अथवा कोई अन्य पुरानी सामग्री के प्रयोग करने का उल्लेख आगणन में नहीं है। उसके बाद भी अगर ऐसा हो रहा है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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सूफी संत एवं सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक संत कबीर की निर्वाण स्थली को पर्यटन विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा है। कार्यदाई संस्था यूपीसीएल की तरफ से संत कबीर की मजार और समाधि की दीवार तथा गुफा के फर्श पर पत्थर लगाने का कार्य किया जा रहा है।
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इसके साथ ही मजार के सामने और समाधि स्थल पर लोहे का नया ग्रिल लगाया जाना है। इस समय दीवार का निर्माण कार्य चल रहा है। आरोप है कि इस दीवार में नई ईंटों की जगह पुरानी ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है। इससे कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। इस संबंध में यूपीसीएल के अवर अभियंता चंद्रजीत यादव ने बताया कि आगणन में नई ईंट के मूल्य में 40 प्रतिशत कटौती हो जाने की वजह से पुरानी ईंटों को साफ कर फिर से लगाया जा रहा है।
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जरूरत पड़ने पर नई ईंटों का भी प्रयोग हो रहा है। वहीं क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अरविंद राय का कहना है कि कबीर चौरा के विकास कार्य में कहीं भी पुरानी ईंट अथवा कोई अन्य पुरानी सामग्री के प्रयोग करने का उल्लेख आगणन में नहीं है। उसके बाद भी अगर ऐसा हो रहा है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।