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बाढ़ से जलमग्न हुए 14 गांव, बढ़ी मुसीबत
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मेंहदावल तहसील क्षेत्र के करमैनी के पास बढ़ रहा राप्ती नदी का जलस्तर।
- फोटो : KHALILABAD
बाढ़ से जलमग्न हुए 14 गांव, बढ़ी मुसीबत
तेजी से बढ़ रहा घाघरा का जलस्तर, खतरे के निशान के करीब पहुंची
- ग्रामीणों के आवागमन के लिए प्रशासन ने लगाया 28 नाव
- बाढ़ प्रभावित गांवों में विद्युत आपूर्ति बंद, लोगों की अंधेरे में गुजर रही रात
धनघटा। घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। इससे धनघटा तहसील क्षेत्र के 14 गांव में जलमग्न हो गए हैं। इन गांवों के लोगों के आवागमन के लिए प्रशासन ने 28 नाव लगाए जाने का दावा किया है, लेकिन बाढ़ से प्रभावित गांव के लोग प्रशासनिक मदद को नाकाफी बता रहे हैं।
घाघरा का जलस्तर सोमवार शाम 79.300 मीटर पर पहुंच गया है। वैसे नदी अभी भी खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन नदी की बाढ़ ने एमबीडी बांध के दक्षिण स्थित गांव में तबाही मचाना शुरू कर दी है। गायघाट दक्षिणी, कटहा, ढोल बजा, चकदहा, भौवापार, गुनवतिया, सरैया, खड़कपुर, सिया राम अधीन सिंह, करनपुर, कंचनपुर, सियर कला समेत 14 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। ग्रामीण रामप्रकाश, तीरथ, सुभद्रा, अर्जुन, मुंद्रिका, चंद्रिका आदि का कहना है कि गांव के चारों तरफ पानी भर जाने के कारण घर से निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। कई लोगों के घरों में पानी घुस गया है, लोग गांव में दूसरों के घर रहकर गुजारा कर रहे हैं। पानी भरने के कारण पशुओं के चारा, लकड़ी, बिजली का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ के कारण विद्युत निगम ने विद्युत सप्लाई बंद कर दी है। इस कारण जलमग्न हुए 14 गांव में अंधेरा छा गया है। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन ने नाव की व्यवस्था करने के बाद अन्य समस्याओं का समाधान करने में हाथ खड़ा कर दिया है। बड़ी समस्या घर में रोशनी की है। मोमबत्ती और टॉर्च के सहारे लोग रह रहे हैं। गांववालों ने बताया कि प्रति वर्ष इस तरह की समस्या का सामना लोगों को बाढ़ के दौरान करना पड़ता है, लेकिन शासन-प्रशासन इसका कोई स्थायी समाधान नहीं कर पा रहा है। तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने बताया कि जलमग्न हुए 14 गांव के लोगों को आने-जाने के लिए 28 नाव लगा दी गई है। तिघरा में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर में रहने और खाने के लिए व्यवस्था कर दी गई है। राजस्व विभाग की टीम बाढ़ प्रभावित गांवों में लगी हुई है। बाढ़ पीड़ितों का हर संभव मदद की जा रही है।
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तेजी से बढ़ रहा घाघरा का जलस्तर, खतरे के निशान के करीब पहुंची
- ग्रामीणों के आवागमन के लिए प्रशासन ने लगाया 28 नाव
- बाढ़ प्रभावित गांवों में विद्युत आपूर्ति बंद, लोगों की अंधेरे में गुजर रही रात
धनघटा। घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। इससे धनघटा तहसील क्षेत्र के 14 गांव में जलमग्न हो गए हैं। इन गांवों के लोगों के आवागमन के लिए प्रशासन ने 28 नाव लगाए जाने का दावा किया है, लेकिन बाढ़ से प्रभावित गांव के लोग प्रशासनिक मदद को नाकाफी बता रहे हैं।
घाघरा का जलस्तर सोमवार शाम 79.300 मीटर पर पहुंच गया है। वैसे नदी अभी भी खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन नदी की बाढ़ ने एमबीडी बांध के दक्षिण स्थित गांव में तबाही मचाना शुरू कर दी है। गायघाट दक्षिणी, कटहा, ढोल बजा, चकदहा, भौवापार, गुनवतिया, सरैया, खड़कपुर, सिया राम अधीन सिंह, करनपुर, कंचनपुर, सियर कला समेत 14 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। ग्रामीण रामप्रकाश, तीरथ, सुभद्रा, अर्जुन, मुंद्रिका, चंद्रिका आदि का कहना है कि गांव के चारों तरफ पानी भर जाने के कारण घर से निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। कई लोगों के घरों में पानी घुस गया है, लोग गांव में दूसरों के घर रहकर गुजारा कर रहे हैं। पानी भरने के कारण पशुओं के चारा, लकड़ी, बिजली का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ के कारण विद्युत निगम ने विद्युत सप्लाई बंद कर दी है। इस कारण जलमग्न हुए 14 गांव में अंधेरा छा गया है। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन ने नाव की व्यवस्था करने के बाद अन्य समस्याओं का समाधान करने में हाथ खड़ा कर दिया है। बड़ी समस्या घर में रोशनी की है। मोमबत्ती और टॉर्च के सहारे लोग रह रहे हैं। गांववालों ने बताया कि प्रति वर्ष इस तरह की समस्या का सामना लोगों को बाढ़ के दौरान करना पड़ता है, लेकिन शासन-प्रशासन इसका कोई स्थायी समाधान नहीं कर पा रहा है। तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने बताया कि जलमग्न हुए 14 गांव के लोगों को आने-जाने के लिए 28 नाव लगा दी गई है। तिघरा में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर में रहने और खाने के लिए व्यवस्था कर दी गई है। राजस्व विभाग की टीम बाढ़ प्रभावित गांवों में लगी हुई है। बाढ़ पीड़ितों का हर संभव मदद की जा रही है।
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