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नगर पंचायत में आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत
Tue, 02 Apr 2019 11:46 PM IST
राकेश पांडेय
Santkabirnagar
Santkabirnagar
Published by: राकेश पांडेय
Updated Tue, 02 Apr 2019 11:46 PM IST
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मगहर। श्रमिकों की आपूर्ति के लिए नगर पंचायत प्रशासन पर अपने चहेतों को ठेका देकर लाभ पहुंचाने की नीयत से आचार संहिता का ध्यान न देते हुए बार-बार टेंडर की तारीखों को बदला जा रहा है। इस आशय का एक शिकायती पत्र मंगलवार को नगर के सभासदों ने डीएम को दिया और जांच की मांग की।
सभासद भोलू पासवान, शिबतैन मुस्तफा, सायमा खातून, लीलावती देवी, कलावती देवी, मोहम्मद असअद, संतोष साहनी, महेंद्र निषाद आदि का आरोप है कि नगर पंचायत मगहर के श्रमिकों की आपूर्ति के लिए वर्ष 2019-20 के लिए टेंडर होना है। इसके लिए आचार संहिता लगने के पूर्व टेंडर निकाले गए थे। इस दौरान दो बार टेंडर निरस्त कर पुन: 16 मार्च को टेंडर निकाला गया। सभासदों का आरोप है कि अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने की नीयत से पूर्व के दो टेंडर निरस्त किए गए। सभासदों ने शिकायती पत्र में अधिषासी अधिकारी व चेयरमैन पर आरोप लगाते हुए लिखा है कि यह टेंडर दोनों लोगों की मिली भगत से अपने चहेते ठेकेदारों को देकर आचार संहिता का उल्लंघन किया जा रहा है। पत्र में लिखा गया है कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी ठेका निरस्त होने के कारण श्रमिकों का 38 दिन का वेतन आज भी अधर में लटका हुआ है। इस संबंध में पूछे जाने पर अधिषाशी अधिकारी ज्योतिमा वर्मा ने बताया कि सारे आरोप बेबुनियाद है। यह टेंडर आचार संहिता से पूर्व आठ मार्च को किया गया था। इस बारे में डीएम से दिशा निर्देश लेने के बाद ही टेंडर खोला जाएगा।
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सभासद भोलू पासवान, शिबतैन मुस्तफा, सायमा खातून, लीलावती देवी, कलावती देवी, मोहम्मद असअद, संतोष साहनी, महेंद्र निषाद आदि का आरोप है कि नगर पंचायत मगहर के श्रमिकों की आपूर्ति के लिए वर्ष 2019-20 के लिए टेंडर होना है। इसके लिए आचार संहिता लगने के पूर्व टेंडर निकाले गए थे। इस दौरान दो बार टेंडर निरस्त कर पुन: 16 मार्च को टेंडर निकाला गया। सभासदों का आरोप है कि अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने की नीयत से पूर्व के दो टेंडर निरस्त किए गए। सभासदों ने शिकायती पत्र में अधिषासी अधिकारी व चेयरमैन पर आरोप लगाते हुए लिखा है कि यह टेंडर दोनों लोगों की मिली भगत से अपने चहेते ठेकेदारों को देकर आचार संहिता का उल्लंघन किया जा रहा है। पत्र में लिखा गया है कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी ठेका निरस्त होने के कारण श्रमिकों का 38 दिन का वेतन आज भी अधर में लटका हुआ है। इस संबंध में पूछे जाने पर अधिषाशी अधिकारी ज्योतिमा वर्मा ने बताया कि सारे आरोप बेबुनियाद है। यह टेंडर आचार संहिता से पूर्व आठ मार्च को किया गया था। इस बारे में डीएम से दिशा निर्देश लेने के बाद ही टेंडर खोला जाएगा।
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