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छुट्टा पशुओं से समस्या

Mon, 17 Dec 2018 12:47 AM IST
Updated Mon, 17 Dec 2018 12:47 AM IST
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छुट्टा पशुओं से समस्या
बजट के अभाव में नहीं हो पा रही पशुओं की देखभाल
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मगहर कस्बे की मुख्य सड़क पर पशुओं के चलते राहगीर हो रहे परेशान
किसानों को भी पूरी रात करनी पड़ रही खेतों की रखवाली
कान्हा पशु आश्रय चलाने के लिए हर महीने चाहिए पौने दो लाख रुपये
तीन महीने पहले हो गया उद्घाटन, अब तक नहीं मिला बजट
आफताब आलम
मगहर। छुट्टा पशुओं की देखभाल के लिए कस्बे में बना कान्हा पशु आश्रम बजट के अभाव में संचालित नहीं हो पा रहा है। इसके चलते छुट्टा पशु कस्बे समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भटक कर लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। खेत में फसल चौपट होने से किसान परेशान हैं तो राहगीर मुख्य सड़क पर पशुओं के चलते हादसे की आशंका से सहमे रहते हैं।

मगहर कस्बा तथा ग्रामीण क्षेत्र के तमाम पशु पालक दुधारू पशुओं को दिन में खुला छोड़ देते हैं। इसके अलावा गाय के बछड़ों को भी लोग उपयोगी नहीं होने के चलते छोड़ देते हैं। ये पशु दिन भर कस्बे की सड़कों पर भटकते रहते हैं। चारा-पानी की तलाश में दुकानों के आगे खड़े रहते हैं। दोपहर में पशुओं का झुंड मुख्य सड़क पर ही बैठ जाता है। इससे राहगीरों का दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र में भी लोग छुट्टा पशुओं से परेशान हैं। किसानों का कहना है कि पशुओं का झुंड खेत में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। गेहूं की खेतों की रखवाली करना पड़ रहा है। झुंड में आने वाले पशुओं को खदेड़ने के लिए लोग पूरी रात लाठी-डंडा लेकर खेतों की रखवाली करते हैं। प्रदेश की योगी सरकार ने छुट्टा पशुओं की देखरेख के लिए कस्बे में कान्हा पशु आश्रय का निर्माण कराया था। अक्तूबर में इसका लोकार्पण भी कर दिया गया, लेकिन इस संस्थान को संचालित करने के लिए बजट ही नहीं मिला। नगर पंचायत के जिम्मेदारों की मानें तो कान्हा पशु आश्रय में पशुओं के लिए चारा-पानी पर प्रति माह करीब एक लाख रुपये व कर्मचारियों के वेतन आदि पर करीब 75 हजार रुपये का खर्च आएगा। बजट के अभाव में न तो भूसा आदि का इंतजाम हो पाया है और न ही देखरेख के लिए कर्मचारी ही तैनात हो पाए हैं। इसके चलते वहां पशुओं को रखना संभव नहीं है। नगर पंचायत की चेयरमैन संगीता वर्मा का कहना है कि कान्हा पशु आश्रय के संचालन के लिए बजट नहीं मिला है। प्रतिमाह पौने दो लाख रुपये का खर्च आएगा जिसकी व्यवस्था के लिए स्थानीय निकाय निदेशालय को पत्र भेजा गया है। बजट उपलब्ध होते ही कस्बे में घूम रहे छुट्टा पशुओं को पकड़वाकर कान्हा पशु आश्रय भेज दिया जाएगा।
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