आठ गांवों में घुसा पानी, पलायन में जुटे ग्रामीण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गायघाट गांव के पास ग्राम पंचायत से बने रिंग बांध की मरम्मत और दियारा में कई दिनों से ठप पड़ी विद्युत सप्लाई बहाली के लिए लोगों ने प्रदर्शन किया। गांव वालों का आरोप है कि नदी की कटान और बाढ़ से उनकी जिंदगी खतरे में पड़ गई है, लेकिन प्रशासन के लोग अभी तक सुध लेने नहीं पहुंचे हैं।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, घाघरा नदी तुकर्वलिया में खतरे के निशान से मात्र दस सेंटीमीटर नीचे 79.25 पर बह रही है। नदी के जल स्तर में बढ़ोत्तरी होने से चकदहा, ढोलबजा, गुनवतिया, भौंवापार, सुअरहा, सरैया, दौलतपुर, कटहा खैरगाड़ गांव में पानी घुसने लगा है।
गांव में आने जाने वाले रास्तों पर भी शाम को पानी पहुंच गया। लोग पानी में घुसकर आ जा रहे हैं। राजकुमार, टिकोरी, किशोरी, अमरजीत, राजबली आदि का कहना है कि नदी के जल स्तर में बढ़ोत्तरी और कटान तेजी के साथ हो रहा है। इससे गांव तो बाढ़ की चपेट आ गए हैं।
कटान से उनके अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन के लोग अभी तक यहां नहीं आए। गांव खाली कर यदि सुरक्षित जगह पर नहीं गए तो खतरा हो सकता है। गांव वालों का कहना है कि जलस्तर ऐसे ही बढ़ा तो शुक्रवार को गांव छोड़ना पड़ेगा।
गायघाट निवासी लालमन, राजमन, हरीशचंद्र, चंद्रजीत, रामप्रताप, श्यामदेव, मिथलेश, जगदीश आदि का कहना है कि उनको गांव को बाढ़ की तबाही से रिंग बांध बचाए हुए है, लेकिन अब पानी रिंग बांध को भी पार करने वाला है।
गांव में कई दिनों से बिजली नहीं आ रही है। इससे रात में अंधेरा छा जाता है। गांव को बचाने के लिए लोग रिंग बांध पर मिट्टी डाल रहे हैं। गांव वालों ने कहा कि रिंग बांध को ही प्रशासन ऊंचा करवा देता तो शायद गायघाट गांव बाढ़ की चपेट में आने से बच जाता।
माझा में चारों तरफ पानी हो जाने से पशुओं के सामने चारा का संकट खड़ा हो गया। एसडीएम बाबूराम का कहना है कि नदी का जल स्तर बढने और मौके की हालात जानने के लिए तहसीलदार गई हुई है। जहां जैसा जरुरत होगा वैसा वैसा प्रबंध किया जा रहा है।