फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sant Kabir Nagar News ›   बहुरेंगे मिट्टी के बर्तन और पत्तल बनाने वालों के दिन

बहुरेंगे मिट्टी के बर्तन और पत्तल बनाने वालों के दिन

Sun, 29 Jul 2018 10:49 PM IST
शोभित कुमार पांडेय संतकबीरनगर
शोभित कुमार पांडेय संतकबीरनगर Updated Sun, 29 Jul 2018 10:49 PM IST
विज्ञापन
बहुरेंगे मिट्टी के बर्तन और पत्तल बनाने वालों के दिन
मेंहदावल में मिट्टी के बर्तन बनाता कुंभकार। - फोटो : अमर उजाला
संतकबीरनगर। पॉलिथीन पर रोक लगाने के लिए जागरूकता, कार्रवाई और प्रोत्साहन तीनों हथकंडा अपनाने की प्रशासन ने ठान ली है। मिट्टी के बर्तन बनाने वाले हूनरमंद हाथों को काम मिले और मिट्टी की किल्लत दूर हो, इसके लिए उन्हें पट्टे पर जमीन का आवंटन भी किया जाएगा। मॉडल के रूप में मिट्टी की थॉली बना कर पेश करने वालों को डीएम की ओर से पुरस्कार भी दिया जाएगा।
विज्ञापन

मेंहदावल नगर के रहने वाले बारी समाज के कुछ लोग कभी पत्तल बनाकर अपनी आजीविका चलाते थे, लेकिन प्लास्टिक का चलन जैसे ही शुरू हुआ, वैसे ही उनका रोगजार बंद होता चला गया। कैम्पियरगंज, फरेंदा के जंगलों से पलाश तथा बरगद के पत्तों को लाकर सादा पत्तल बनाने का काम यहां के लोग करते थे। शादी विवाह के अवसरों पर इन पत्तलों की खपत हो जाती थी। इस व्यवसाय से जुड़े परिवारों के सदस्य देवेंद्र बारी, विक्की रावत और बृजेश बारी ने बताया कि कभी सादे पत्तलों की मांग बड़े पैमाने पर थी। पूजा-पाठ से लेकर वैवाहिक कार्यक्रम में इन पत्तलों की खपत होती थी। इसी धंधे के सहारे परिवार का खर्च भी चलता था, लेकिन प्लास्टिक के चलन के बाद धंधा बंद हो गया और लोग दूसरे रोजगार की तलाश में जुट गए। सरकारी सहयोग भी इस देशी व्यवसाय के विकास के लिए कभी नहीं मिला। अब पॉलिथीन पर रोक लगी है। ऐसे में सरकारी मदद मिले तो फिर से देसी पत्तल का कारोबार लोग शुरू करें। मिट्टी के बर्तन बनाने के धंधे से जुडे़ क्षेत्र के रामकुमार, राजदेव, गंगाराम, दिनेश चंद्र और झीनक, राम बेलास प्रजापति ने बताया कि शादी विवाह, पूजा-पाठ और दीपावली के अवसर पर ही सीमित मात्रा में मिट्टी के बर्तन की डिमांड रहती है।
विज्ञापन

शेष दिनों में धंधा मंदा पड़ गया है। मिट्टी और बर्तन को पकाने के लिए जलौनी कमी भी आड़े आ गई। जिसकी वजह से यह कारोबार काफी सुस्त पड़ गया। यदि सरकारी मदद मिले तो इस धंधे को आगे बढ़ाने में लोग आएं। ईओ मेंहदावल प्रदीप शुक्ला ने बताया कि पर्यावरण की सुरक्षा और पॉलिथीन पर रोक शासन की शीर्ष प्राथमिकता में शामिल है। यह काम बिना जन सहयोग के संभव नहीं है। ऐसे में जागरूकता के लिए कुछ डाक्युमेंट्री फिल्में ढूंढी गई है। जैसे कार्बन फिल्म 24 मिनट की बनी है और उसमें तमाम ऐसी जानकारियां दी गई हैं, जो जागरूकता के लिहाज से काफी बेहतर है। ऐसी फिल्मों को प्रोजक्टर के माध्यम से लोगों को दिखाया जाएगा और जागरूकता लाई जाएगी। डीएम भूपेंद्र एस चौधरी ने बताया कि पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रशासन ने जागरूकता, कार्रवाई का तरीका अख्तियार कर रहा है। वैसे मिट्टी के बर्तन बनाने वालों को प्रोत्साहित और सरकारी मदद दिए जाने की तैयारी की जा रही है। यदि हुनरमंद मिट्टी की थॉली बना कर मॉडल के रूप में प्रस्तुत करें तो उन्हें पुरस्कार तो दिया ही जाएगा, इसके साथ मिट्टी की किल्लत दूर करने के लिए ग्राम पंचायतों में स्थित सरकारी जमीनों का पट्टा भी दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed