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लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में अरणि मंथन
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Wed, 27 Apr 2016 12:44 AM IST
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चंदौसी में श्री लक्ष्मीनारायण एवं गोयज्ञ से पूर्व चंदन घिसते पुजारी व अन्य।
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मंत्रोच्चार से भक्तिमय माहौल में मंगलवार को श्री लक्ष्मी नरायण महायज्ञ में विधि विधान से अरणि मंथन हुआ। कैथल गेट स्थित श्री वेणुगोपाल मंदिर में पंचांग पूजन, मंडल प्रवेश, अरणि मंथन के बाद विधि विधान से यज्ञ का शुभारंभ किया गया। संवत्सर से संवत्सर तक आयोजित होने वाले महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
संसार के सभी जीव जंतुओं के कल्यार्थ संवत्सर यज्ञ का मंत्रोचारण के साथ विधि विधान से शुभारंभ हुुआ। सबसे पहले पंचांग पूजन हुआ। यज्ञाचार्य विष्णुचित्त ने पूजा अर्चना के बाद मंडल प्रवेश कराया। अरणि मंथन हुआ। अग्नि प्रकट होते ही जयकारों से पंडाल गूंज उठा।
यज्ञाचार्य विष्णुचित्त और श्यामाचार्य महाराज ने यज्ञ प्रारंभ कराया। उन्होंने कहा यज्ञ अनुष्ठान से देवों, ऋषियों, दैत्यों, नागों, किन्नरों, मनुष्यों तथा सभी प्रकार के अन्य जीव जंतुओं को अभीष्ट कामनाओं की प्राप्ति होती है। वाराणसी, वृंदावन, काशी, नैमिषारण्य, बिहार, मध्यप्रदेश से यज्ञाचार्य श्री वेणुगोपाल मंदिर में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने जयकारों से माहौल भक्तिमय कर दिया। महायज्ञ में आस्था और विश्वास का सैलाब उमड़ा।
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संसार के सभी जीव जंतुओं के कल्यार्थ संवत्सर यज्ञ का मंत्रोचारण के साथ विधि विधान से शुभारंभ हुुआ। सबसे पहले पंचांग पूजन हुआ। यज्ञाचार्य विष्णुचित्त ने पूजा अर्चना के बाद मंडल प्रवेश कराया। अरणि मंथन हुआ। अग्नि प्रकट होते ही जयकारों से पंडाल गूंज उठा।
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यज्ञाचार्य विष्णुचित्त और श्यामाचार्य महाराज ने यज्ञ प्रारंभ कराया। उन्होंने कहा यज्ञ अनुष्ठान से देवों, ऋषियों, दैत्यों, नागों, किन्नरों, मनुष्यों तथा सभी प्रकार के अन्य जीव जंतुओं को अभीष्ट कामनाओं की प्राप्ति होती है। वाराणसी, वृंदावन, काशी, नैमिषारण्य, बिहार, मध्यप्रदेश से यज्ञाचार्य श्री वेणुगोपाल मंदिर में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने जयकारों से माहौल भक्तिमय कर दिया। महायज्ञ में आस्था और विश्वास का सैलाब उमड़ा।
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