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फार्मासिस्टों के सहारे चल रहे बहजोई के तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
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बहजोई। फार्मासिस्टों के सहारे बहजोई के तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रहे हैं। इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बीते काफी समय से चिकित्साधिकारी की तैनाती नहीं है। अफसरों की उदासीनता के चलते आए दिन मरीजों को दवा के लिए भटकना पड़ता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहजोई के अधीन चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहापुर पट्टी, मिर्जापुर व फरीदपुर खुशहाल में बीते काफी समय से चिकित्साधिकारी की तैनाती नहीं है।
यहां फार्मासिस्टों के सहारे ही मरीजों को दवा नसीब हो पाती है। यह बात दीगर है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में एक आयुष चिकित्सक की तैनाती है। दूसरी ओर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिर्जापुर की बात की जाए, तो यहां एक फार्मासिस्ट पर ही रोजाना के हिसाब से ओपीडी के करीब 50 मरीजों को दवा देने की जिम्मेदारी है। यदि किसी दिन टीकाकरण या फिर दूसरी योजना में फार्मासिस्ट की ड्यूटी लग जाती है, तो मरीजों को दवा नहीं मिल पाती। इस पर मरीजों को बहजोई के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर दवा लेने की मजबूरी बनती है। इसके अलावा सीएचसी बहजोई पर भी यही हाल है। रोजाना के करीब साढ़े तीन सौ मरीजों की ओपीडी के लिए भी तीन चिकित्साधिकारियों की तैनाती है। इनमें से आपातकाल, मेडिकल परीक्षण या फिर कोई विभागीय बैठक हो, तो मरीजों को अपनी बीमारी दिखाने व दवा लेने में मशक्कत उठानी पड़ती है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहजोई के अधीन चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहापुर पट्टी, मिर्जापुर व फरीदपुर खुशहाल में बीते काफी समय से चिकित्साधिकारी की तैनाती नहीं है।
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यहां फार्मासिस्टों के सहारे ही मरीजों को दवा नसीब हो पाती है। यह बात दीगर है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में एक आयुष चिकित्सक की तैनाती है। दूसरी ओर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिर्जापुर की बात की जाए, तो यहां एक फार्मासिस्ट पर ही रोजाना के हिसाब से ओपीडी के करीब 50 मरीजों को दवा देने की जिम्मेदारी है। यदि किसी दिन टीकाकरण या फिर दूसरी योजना में फार्मासिस्ट की ड्यूटी लग जाती है, तो मरीजों को दवा नहीं मिल पाती। इस पर मरीजों को बहजोई के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर दवा लेने की मजबूरी बनती है। इसके अलावा सीएचसी बहजोई पर भी यही हाल है। रोजाना के करीब साढ़े तीन सौ मरीजों की ओपीडी के लिए भी तीन चिकित्साधिकारियों की तैनाती है। इनमें से आपातकाल, मेडिकल परीक्षण या फिर कोई विभागीय बैठक हो, तो मरीजों को अपनी बीमारी दिखाने व दवा लेने में मशक्कत उठानी पड़ती है।
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