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Sambhal News: पृथ्वीराज चौहान के शासन में बना था देवालय, मुगलकाल में बनी मस्जिद
Thu, 21 Nov 2024 02:47 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Thu, 21 Nov 2024 02:47 AM IST
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संभल। संभल की जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर का दावा करने वाले हिंदू पक्ष ने कई ऐतिहासिक तर्क देने शुरू कर दिए हैं। कहा कि देवालय पृथ्वीराज चौहान के शासन से पहले बना था, जबकि मस्जिद मुगलकाल में मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।
मेरठ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉ. विघ्नेश त्यागी जो इतिहासकार और लेखक हैं उन्होंने अपनी किताब युग युगीन पुस्तक में हरिहर मंदिर होने का हवाला दिया है। जिसमें लिखा है कि हरिहर मंदिर पृथ्वीराज चौहान के शासन 1178 से 1193 तक रहा। इस दरमियान ही पृथ्वीराज चौहान ने संभल को दूसरी राजधानी का दर्जा दिया था। उस समय भी संभल में यह देवालय बना था। पृथ्वीराज चौहान का ठिकाना सेना के कैंप में हुआ करता था। मोहल्ला कोट आबाद था। प्रोफेसर ने लिखा है कि बाबर के शासन में इसको मस्जिद बनाया गया। उस समय की लिखावट की जानकारी या उससे पहले की लिखावट की जानकारी लिपी शास्त्र से सामने आ सकती है। यदि खोदाई की जाए तो देवालय होने के कई प्रमाण मिलेंगे।
संभल महात्म्य में जामा मस्जिद को तीर्थों का केंद्र बिंदु दर्शाया है
संभल नगर धार्मिक नजरिये से भी ऐतिहासिक है। संभल महात्म्य पुस्तक नगर के साहित्यकार वाणी सरण शर्मा ने लिखी है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि संभल में 68 तीर्थ और 19 कूप हैं। इन सभी तीर्थ और कूपों का केंद्र बिंदु हरिहर मंदिर है। किताब में यह भी लिखा है कि 24 कोसीय परिक्रमा का दायरा के अनुसार हरिहर ही केंद्र बिंदु है। जिसमें सभी तीर्थ और कूप की दूरी लिखी है। जिसमें सभी तीर्थ और कूप की मान्यता भी लिखी है।
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बाबरनामा और आइन ए अकबरी में मस्जिद का जिक्र
बाबरनामा और आइन ए अकबर में संभल जामा मस्जिद का जिक्र मिलता है। इससे यह तो तय है कि इस मस्जिद का निर्माण मुगलकाल में ही किया गया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि किस स्थिति के बाद किया गया। वादीगण ने तर्क दिया है कि मंदिर खंडित किए जाने के बाद मस्जिद का निर्माण किया गया। वादी महंत ऋषिराज गिरि ने बताया कि कई तथ्य सामने आए हैं। सर्वे के दौरान ऐसे मिले हैं। जो न्यायालय में पेश किए जाएंगे। उसके आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
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मेरठ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉ. विघ्नेश त्यागी जो इतिहासकार और लेखक हैं उन्होंने अपनी किताब युग युगीन पुस्तक में हरिहर मंदिर होने का हवाला दिया है। जिसमें लिखा है कि हरिहर मंदिर पृथ्वीराज चौहान के शासन 1178 से 1193 तक रहा। इस दरमियान ही पृथ्वीराज चौहान ने संभल को दूसरी राजधानी का दर्जा दिया था। उस समय भी संभल में यह देवालय बना था। पृथ्वीराज चौहान का ठिकाना सेना के कैंप में हुआ करता था। मोहल्ला कोट आबाद था। प्रोफेसर ने लिखा है कि बाबर के शासन में इसको मस्जिद बनाया गया। उस समय की लिखावट की जानकारी या उससे पहले की लिखावट की जानकारी लिपी शास्त्र से सामने आ सकती है। यदि खोदाई की जाए तो देवालय होने के कई प्रमाण मिलेंगे।
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संभल महात्म्य में जामा मस्जिद को तीर्थों का केंद्र बिंदु दर्शाया है
संभल नगर धार्मिक नजरिये से भी ऐतिहासिक है। संभल महात्म्य पुस्तक नगर के साहित्यकार वाणी सरण शर्मा ने लिखी है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि संभल में 68 तीर्थ और 19 कूप हैं। इन सभी तीर्थ और कूपों का केंद्र बिंदु हरिहर मंदिर है। किताब में यह भी लिखा है कि 24 कोसीय परिक्रमा का दायरा के अनुसार हरिहर ही केंद्र बिंदु है। जिसमें सभी तीर्थ और कूप की दूरी लिखी है। जिसमें सभी तीर्थ और कूप की मान्यता भी लिखी है।
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बाबरनामा और आइन ए अकबरी में मस्जिद का जिक्र
बाबरनामा और आइन ए अकबर में संभल जामा मस्जिद का जिक्र मिलता है। इससे यह तो तय है कि इस मस्जिद का निर्माण मुगलकाल में ही किया गया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि किस स्थिति के बाद किया गया। वादीगण ने तर्क दिया है कि मंदिर खंडित किए जाने के बाद मस्जिद का निर्माण किया गया। वादी महंत ऋषिराज गिरि ने बताया कि कई तथ्य सामने आए हैं। सर्वे के दौरान ऐसे मिले हैं। जो न्यायालय में पेश किए जाएंगे। उसके आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी।