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Sambhal News: क्रांतिकारी पेड़ पर चढ़ कर दे रहे थे भाषण, तभी दरोगा ने मार दी थी गोली

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 10 Aug 2023 02:07 AM IST
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The revolutionaries were giving speeches by climbing the tree, then the inspector shot them
चंदौसी। भारत माता को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने में असंख्य बलिदानियों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। इनमें अधिकांश ऐसे हैं, जो इतिहास का हिस्सा नहीं बन पाए। आज भी गांव देहात में उनकी शौर्य गाथा के कुछ प्रमाण बचे हैं। कुछ भूली बिसरी यादें बची हैं। परिजन व आसपास के लोग उन्हें याद कर आज भी रोमांचित हो उठते हैं। उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। क्रांतिकारियों के परिवार के सदस्य बड़े ही सम्मान के साथ आज भी उनके शौर्य की गाथा सुनाते हैं। ऐसा ही एक किस्सा गांव जगन्नाथपुर के साप्ताहिक बाजार का है।
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जुनावई क्षेत्र के गांव नंदरौली निवासी डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि उनके दादा किशनलाल क्रांतिकारी थे। स्थानीय क्रांतिकारियों के साथ मिलकर देश की आजादी के आंदोलन में हिस्सा लिया था। जगन्नाथपुर में बड़ा साप्ताहिक बाजार लगता था। आसपास के जिलाें से भी व्यापारी सामान बेचने आते थे। दादा किशनपाल व अन्य क्रांतिकारी बाजार में आते थे और लोगों को आजादी के आंदोलन से जोड़ने की बात करते थे। बाजार में खड़े पीपल के पेड़ से ही संबोधित करते थे।
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1930 की बात है। उस समय स्वदेशी वस्तु अपनाने पर जोर दिया जा रहा था। बाजार में दादा किशन लाल शास्त्री, उनके साथी क्रांतिकारी उल्फत सिंह, रतनलाल शर्मा, डोरीलाल आदि सभा कर लोगों को स्वदेशी वस्तु अपनाने की अपील कर रहे थे। दादा किशनलाल पास में ही खड़े शीशम में पेड़ पर चढ़कर भाषण दे रहे थे। किसी की सूचना पर अंग्रेजी पुलिस का दरोगा व एक सिपाही सभा में आ गए थे और भाषण देने से मना करने लगे। इस पर बात पर क्रांतिकारियों की दरोगा व सिपाही से कहासुनी हो गई थी। दादा किशनलाल शास्त्री ने आगे आकर विरोध किया तो दरोगा ने गोली मार दी थी। उनका निधन हो गया था।
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साथी की मौत से क्रांतिकारी आक्रोशित हो गए थे और उन्होंने बाजार में खूब लूटपाट की थी। बाजार में दूर दूर से व्यापारी व्यापार करने आते थे। तब से गांव जगन्नाथपुर में साप्ताहिक बाजार लगना बंद हो गया था और अगले शनिवार से साप्ताहिक बाजार जुनावई में लगना शुरू हो गया था। तब से अब तक जुनावई में साप्ताहिक बाजार लगता चला आ रहा है।
पीपल का पेड़ आज भी है गवाह
गांव जगन्नाथपुर निवासी धर्मपाल सिंह ने बताया कि पिता व अन्य परिजन बताते थे। गांव में प्राथमिक विद्यालय के पास पीपल का पेड़ है। यहां कभी बड़ा साप्ताहिक बाजार लगता था। आसपास के क्रांतिकारी इस पेड़ के नीचे एकत्र होते थे।


बैरपुर मैराजी में उल्फत की दलान थी क्रांतिकारियों का ठिकाना
क्षेत्र के गांव बैरपुर मैराजी निवासी प्रकाशवीर सिंह ने बताया कि उनके दादा उल्फत सिंह क्रांतिकारी थे और किशन लाल शास्त्री के सहयोगी थे। गांव में हमारी पुरानी दलान (बैठक) थी। आसपास के क्षेत्र के क्रांतिकारी दादा के साथ वहां आते थे। आंदोलन की रणनीति बनती थी। शाम को सभी एकत्र होते थे और सुबह होते ही चले जाते थे। बाद में किसी ने अंग्रेजों को गांव में क्रांतिकारियों के आने की खबर दी थी। इसके बाद क्रांतिकारियों ने अपना स्थान बदल लिया था। 1995 तक यह दलान था। बाद में पारिवारिक हिस्से होने पर दलान का स्वरूप बदल गया। अब उस स्थान पर मकान बना है।

ब्लॉक के शिलापट पर लिखे हैं क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम
जुनावई ब्लॉक में लगे शिलापट पर गांव नंदरौली निवासी किशनलाल शास्त्री, रघुनाथ शास्त्री, बैरपुर मैराजी निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उल्फत सिंह यादव, रतनलाल शर्मा, घोंसली निवासी रामफल, भगीरथ, गांव चबूतरा निवासी डोरीलाल, गिरवर महाशय, रोशनलाल, गांव कांशीपुर निवासी रामफल जख्मी, नंगला अजमेरी निवासी बाबूराम पटवा, गांव अहरोला नवाजी निवासी बाल किशन महाशय आदि के नाम हैं।
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