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Sambhal News: इमाम हुसैन के चाहने वाले शहादत देने से पीछे नहीं हटते
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सिरसी। इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के इसाले सवाब के लिए हुई मजलिस में मर्सिया खावर रजा व उनके साथियों ने पढ़ा। मजलिस में मौलाना सफी असगर नजमी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन के चाहने वाले शहादत देने से पीछे नहीं हटते हैं।
उन्होंने कहा कि आज भी अमेरिका और इस्राइल की जालिम हुकूमत के आगे हजरत इमाम हुसैन के चाहने वाले नहीं झुक रहे हैं। रमजान महीने में अल्लाह अपने बंदों पर विशेष रहमतें, बरकतें, मगफिरत व नेमतें अता करता है। इस महीने अल्लाह अपने बंदों की तौबा कबूल करता है। दूसरी मजलिस में मर्सिया अली कबीर उर्फ अजमल और उनके साथियों ने पढ़ा। मौलाना मीसम अब्बास ने कहा कि माहे रमजान अल्लाह का महीना है।
इस महीने में रोजेदार अल्लाह के मेहमान हैं। अंत में हजरत अली के मसाइब बयान किए गए। कहा कि 19 रमजान की सुबह फज्र की नमाज पढ़ते हुए हजरत अली के सिर के ऊपर इब्ने मुलजिम नाम के जालिम ने जहर में भीगी हुई तलवार मार दी थी। जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। 21 रमजान को उनकी शहादत हो गई थी। यह सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गईं।
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उन्होंने कहा कि आज भी अमेरिका और इस्राइल की जालिम हुकूमत के आगे हजरत इमाम हुसैन के चाहने वाले नहीं झुक रहे हैं। रमजान महीने में अल्लाह अपने बंदों पर विशेष रहमतें, बरकतें, मगफिरत व नेमतें अता करता है। इस महीने अल्लाह अपने बंदों की तौबा कबूल करता है। दूसरी मजलिस में मर्सिया अली कबीर उर्फ अजमल और उनके साथियों ने पढ़ा। मौलाना मीसम अब्बास ने कहा कि माहे रमजान अल्लाह का महीना है।
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इस महीने में रोजेदार अल्लाह के मेहमान हैं। अंत में हजरत अली के मसाइब बयान किए गए। कहा कि 19 रमजान की सुबह फज्र की नमाज पढ़ते हुए हजरत अली के सिर के ऊपर इब्ने मुलजिम नाम के जालिम ने जहर में भीगी हुई तलवार मार दी थी। जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। 21 रमजान को उनकी शहादत हो गई थी। यह सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गईं।
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