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Sambhal News: आंखों की खुद करें हिफाजत, गुन्नौर सीएचसी में नहीं हैं नेत्र चिकित्सक

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 14 Sep 2025 02:15 AM IST
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Take care of your eyes yourself, there is no eye doctor in Gunnaur CHC
गुन्नौर सीएचसी में बंद पड़ा नेत्र परीक्षण केंद्र - संवाद
गुन्नौर(संभल)। सीएचसी में न नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं और न ही ऑप्टोमेट्रिस्ट। ऐसे क्षेत्र के लोगों को खुद ही अपनी आंखों की हिफाजत करनी होगी। सीएचसी पहुंच रहे आंखों के मरीजों को निराश होकर निजी नेत्र चिकित्सक के जाना पड़ रहा है या फिर उन्हें दूरी तय कर जिला अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बता दें कि सीएचसी के ऑप्टोमेट्रिस्ट जितेंद्र राघव 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गए। उनके रिटायर होने के बाद अब तक आंखों के डॉक्टर या ऑप्टोमेट्रिस्ट की नई तैनाती नहीं हुई।
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सीएचसी में ऑप्टोमेट्रिस्ट जितेंद्र राघव की तैनाती थी। वह लगभग आंखों की सभी जांच कर लते थे। लेकिन वह 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गए। वहीं, कुछ वर्ष पहले नेत्र चिकित्सक भी सेवानिवृत्त हो गए। उनके बाद से सीएचसी में न तो नेत्र चिकित्सक की तैनाती हुई है और न ही अब ऑप्टोमेट्रिस्ट की। ऐसे में आंखों के मरीजों को सीएचसी में चिकित्सा सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा। आंखों की जांच संबंधी सभी उपकरण सीएचसी में मौजूद हैं, पर चिकित्सक और ऑप्टोमेट्रिस्ट के न होने से नेत्र की जांच संबंधी उपकरण कक्ष में बंद पड़े धूल फांक रहे हैं। जबकि रोजाना 40 से 50 के बीच मरीज आंखों की संख्या लेकर आते हैं।
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सामान्य समस्या होने पर अन्य चिकित्सक उन्हें आई ड्रॉप लिखकर दे देते हैं। लेकिन आंखों की गंभीर समस्या होने पर मरीजों को चिकित्सक बाहर उपचार कराने की सलाह देकर लौटा देते हैं। ऐसे में आंखों के मरीजों को अतिरिक्त धन व्यय करना पड़ रहा है।
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सीएचसी में कार्यरत ट्रस्ट ऑप्टोमेट्रिस्ट जितेंद्र राघव 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गए थे। उनके रिटायर होने के बाद अब तक आंखों के डॉक्टर या ऑप्टोमेट्रिस्ट की नई तैनाती नहीं हुई है।


डॉ. राजकिशोर, चिकित्सा अधीक्षक, सीएचसी

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आंखों की जांच कराने सीएचसी पहुंचे थे, लेकिन यहां कोई भी आंखों से संबंधित डॉक्टर या ऑप्टोमेट्रिस्ट उपलब्ध न होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।

सत्यवीर, निवासी गांव अकबरपुर

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आंखों में संक्रमण की समस्या होने पर सीएचसी गया था। लेकिन नेत्र चिकित्सक का रूम बंद था। जानकारी मिली कि आंखों के डाक्टर नहीं बैठते। मायूस होकर निजी चिकित्सक के जाना पड़ा।

दिनेश यादव, निवासी गांव दौलतपुर
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