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न्यायिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित करती हैं आकांक्षा और नगमा
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संभल। अपने शहर की दो बेटियां ऐसी हैं जो तमाम बेटियों को अफसर बनने और न्यायिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। दोनों की कहानी तकरीबन एक जैसी है। दोनों आपस में सहलियां हैं। दोनों ने बड़ा अफसर बनने का लक्ष्य खुद तय किया था। परिवार का सपोर्ट मिलने पर कामयाबी पाई।
मोहल्ला ठेर निवासी आकांक्षा गर्ग को अपने घर से न्यायिक अधिकारी बनने की प्रेरणा मिली। अब दिल्ली में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट हैं। उनकी मां सविता गर्ग जज बनना चाहती थीं लेकिन तब के माहौल में उनके माता-पिता को वकालत पढ़ाना मंजूर नहीं हुआ। उन्होंने अपना सपना बेटी को बताया और बेटी आकांक्षा ने जज बनकर मां का सपना पूरा करने की ठान ली। आकांक्षा की इंटरमीडिएट तक की स्कूलिंग संभल में हुई। दिल्ली में उन्होंने विधि स्नातक किया और इसके बाद इस विधि में ही स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई की। आकांक्षा 2019 में दिल्ली न्यायिक सेवा के लिए चयनित हो गई। आकांक्षा के पिता अधिवक्ता कृष्ण कुमार गर्ग बेहद उत्साहित हैं। बेटी की कामयाबी से उनका भी सम्मान बढ़ा है।
बदायूं में सिविल जज जूनियर डिवीजन के पद पर सेवारत नगमा खान ने कहा कि पब्लिक सर्विस में जाने का लक्ष्य खुद उन्होंने तय किया था। लक्ष्य के अनुरूप सिर्फ पढ़ाई की। फैमिली ने साथ दिया। इसलिए कोई बाधा नहीं आई। फैमिली के सपोर्ट से आगे बढ़ती गई। 10वीं तक संभल में पढ़ी। इसके बाद दिल्ली में इंटरमीडिएट, एलएलबी, एलएलएम किया। एलएलएम करते ही यूपी पीसीएस-जे की परीक्षा पास कर।
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मोहल्ला ठेर निवासी आकांक्षा गर्ग को अपने घर से न्यायिक अधिकारी बनने की प्रेरणा मिली। अब दिल्ली में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट हैं। उनकी मां सविता गर्ग जज बनना चाहती थीं लेकिन तब के माहौल में उनके माता-पिता को वकालत पढ़ाना मंजूर नहीं हुआ। उन्होंने अपना सपना बेटी को बताया और बेटी आकांक्षा ने जज बनकर मां का सपना पूरा करने की ठान ली। आकांक्षा की इंटरमीडिएट तक की स्कूलिंग संभल में हुई। दिल्ली में उन्होंने विधि स्नातक किया और इसके बाद इस विधि में ही स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई की। आकांक्षा 2019 में दिल्ली न्यायिक सेवा के लिए चयनित हो गई। आकांक्षा के पिता अधिवक्ता कृष्ण कुमार गर्ग बेहद उत्साहित हैं। बेटी की कामयाबी से उनका भी सम्मान बढ़ा है।
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बदायूं में सिविल जज जूनियर डिवीजन के पद पर सेवारत नगमा खान ने कहा कि पब्लिक सर्विस में जाने का लक्ष्य खुद उन्होंने तय किया था। लक्ष्य के अनुरूप सिर्फ पढ़ाई की। फैमिली ने साथ दिया। इसलिए कोई बाधा नहीं आई। फैमिली के सपोर्ट से आगे बढ़ती गई। 10वीं तक संभल में पढ़ी। इसके बाद दिल्ली में इंटरमीडिएट, एलएलबी, एलएलएम किया। एलएलएम करते ही यूपी पीसीएस-जे की परीक्षा पास कर।
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