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Sambhal News: जन औषधि केंद्रों पर जीवन रक्षक दवाओं का टोटा

Sun, 29 Sep 2024 03:17 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Sun, 29 Sep 2024 03:17 AM IST
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Shortage of life saving medicines at Jan Aushadhi centers
संभल। जिले में मरीजों को कम दामों पर अच्छी दवाइयां उपलब्ध कराने की शासन की व्यवस्था दम तोड़ रही है। जिले में खोले गए 29 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों में से पांच बंद हो चुके हैं और जो संचालित हैं, उन पर जीवनरक्षक दवाओं का टोटा है। ऐसे में मरीज निजी मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर हैं।
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संभल जिले में मरीजों को सस्ती दवाइयां मुहैया कराने के लिए 2018 में 29 जन औषधि केंद्र खोले गए थे। जिनमें से अब तक पांच बंद हो चुके है। फिलहाल 24 जन औषधि केंद्र संचालित हैं। जिसमें चंदौसी में दो और संभल में तीन केंद्र हैं। जबकि अन्य केंद्र गुन्नौर, सिरसी, बहजोई, गवां और ग्रामीण क्षेत्र में हैं। इन सभी केंद्र पर खांसी, बुखार, जुकाम और शुगर की दवाएं तो आसानी से मिल जाएंगी लेकिन जीवनरक्षक दवाओं की बात करें तो इनके पास टोटा है। जन औषधि केंद्रों पर 1200 से अधिक जेनेरिक दवाएं होनी चाहिए, लेकिन सभी पर 200 प्रकार की दवाएं ही उपलब्ध हैं। इसमें भी ज्यादातर वह दवाएं हैं जो सरकारी अस्पताल से भी आसानी से मिल जाती हैं। केंद्र संचालक तरह तरह के तर्क बता रहे हैं। किसी का कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सक जिले में नहीं है इसलिए उपलब्ध नहीं हो पाती हैं तो किसी का कहना है कि चिकित्सक जिस दवाई की मांग ज्यादा करते हैं वही रखी जाती है। इन तर्क वितर्क के बीच आम आदमी पर आर्थिक बोझ बरकरार है। जीवन को बचाने के लिए महंगी ब्रांडेड दवाओं का इस्तेमाल कर रहा है।
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चिकित्सकों की मांग पर ही दवाएं उपलब्ध हो रहीं
जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र का संचालन करने वाले जौहर अब्बास ने बताया कि चिकित्सकों की जो मांग रहती है उसके अनुसार ही दवाएं मंगाई जाती हैं। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं जो दवाएं बाहर से लिखें इसलिए मंगाते भी नहीं है। 200 से ज्यादा प्रकार की दवाएं फिलहाल उपलब्ध हैं। बताया कि शुगर, बीपी, कैल्शियम, विटामिन की दवाएं तो उपलब्ध रहती हैं।
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दवाएं मिल नहीं पा रही


जन औषधि केंद्र पर ह्दय रोग की दवाएं लेने के लिए पहुंचे राजेश को दवाओं के उपलब्ध नहीं होने की जानकारी हुई तो वह लौटने लगे। इस दौरान जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मुरादाबाद में जन औषधि केंद्र से दवाई 350 रुपये में मिल जाती है। यही दवाई किसी अन्य मेडिकल से लेंगे तो करीब 650 रुपये की पड़ेगी। अब दवाई उपलब्ध नहीं है तो मेडिकल से लेनी ही पड़ेगी।


कारगार है जेनरिक दवाएं

जिला अस्पताल के डॉ. चमन प्रकाश ने बताया कि जेनरिक दवाएं कारगार हैं। ब्रांडेड दवाओं की तरह ही यह जेनरिक दवाएं भी काम करती हैं। फर्क इतना है कि ब्रांडेड दवाओं की मार्केटिंग ज्यादा होती है। इसलिए लोगों को लगता है कि वह दवा ज्यादा कारगार है। जेनरिक दवाएं भी उसी तरह काम करती है, जैसे ब्रांडेड दवाएं। लोगों में भ्रम रहता है कि ब्रांडेड दवाएं ज्यादा बेहतर हैं लेकिन ऐसा है नहीं।
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