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उड़ीसा का संभलपुर नहीं, यूपी का संभल ही है कल्कि की अवतार स्थली
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Thu, 04 Jan 2018 01:53 AM IST
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श्री कल्कि महापुराण हो या फिर श्रीमद भागवत महापुराण, भविष्य पुराण अथवा स्कंद महापुराण हो, कलियुग में भगवान श्रीहरि विष्णु के दशम और अंतिम अवतार श्रीकल्कि के संभल में होने का जिक्र मिलता है। लेकिन धर्म जगत में देश के विद्वानों में संभल को लेकर भ्रम की स्थिति, अभी भी बरकरार है कि आखिर, वह कौन से संभल है, जिसमें भगवान आएंगे। यूपी के संभल में या फिर उड़ीसा के संभलपुर में।
इस धुंध को साफ करने की कवायद एक बार फिर कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने शुरू की है। जिसके तहत वह उड़ीसा के संभलपुर में पहुंचे। वहां के मां संभलेश्वरी देवी मंदिर के दर्शन के साथ साथ वहां पुजारियों से वार्ता की। लेकिन संभल की जो निशानियां पुराणों में वर्णित हैं, संभलपुर में नहीं बल्कि यूपी के संभल में ही मौजूद। जैसे 68 तीर्थ, 19 कूप, मध्य में शिवलिंग, कदंब का पेड़, दक्षिण में गंगा का बहना आदि।
इसमें कोई दो राय नहीं कि धर्म ग्रंथों में कलियुग में भगवान श्रीहरि विष्णु का दसवां अवतार कल्कि के रूप में प्रस्तावित है, जिसके संभल में ब्राह्मण परिवार में होना बताया गया है। इसका जिक्र तो सिखों के दसवें गुरु श्री गुरुगोविंद सिंह महाराज ने भी दशम ग्रंथ में किया है। लेकिन वह कौन सा संभल है, जिसमें भगवान का अवतार होगा, इसे लेकर देश के विद्वानों में सदियों से मतभिन्नता देखी जा रही है। एक संभलपुर उड़ीसा में भी है, यहां भी मां संभलेश्वरी देवी का मंदिर है, यहां भी ईश्वर के अवतार लेने की प्रार्थना की जाती है, कल्कि धाम बना हुआ है।
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एक संभल यूपी में है, जहां कल्कि पीठ स्थापित है। इसी संभल में ईश्वरीय अवधारणा को प्रमाणित करने के लिए यहां हर साल श्री कल्कि महोत्सव का आयोजन किया जाता है। जिसमें देश के प्रमुख संतों, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक हस्तियां पहुंचती हैं।
काफी पहले इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने भी इस धुंध को साफ करने के लिए काफी प्रयास किए लेकिन आखिरकार उन्होंने भी उत्तर प्रदेश के संभल को ही मान्यता दी, यही कारण है कि उन्होंने संभल में कल्कि विष्णु मंदिर बनवाया। देश के शंकराचार्यों, धर्माचार्यों, साधु संतों ने दशकों पहले संभल को कल्कि पीठ घोषित किया। कल्कि पीठ संभल के ऐंचोड़ा कंबोह में स्थित है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम को कल्कि पीठाधीश्वर घोषित किया गया। भारत के प्रमुख संत डोगरे महाराज, स्वामी करपात्री महाराज के पश्चात अवतारी संभल पर छाई धुंध को धर्मजगत में साफ करने के लिए एक बार फिर श्रीकल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कवायद शुरू की और उड़ीसा के संभलपुर जा पहुंचे। पिछले सप्ताह उन्होंने संभलपुर में मां संभलेश्वरी देवी मंदिर के दर्शन के साथ साथ वहां के श्रीमहंत डा. सुरेंद्र महापात्रा व अन्य पुजारियों के साथ बातचीत की, उन्होंने भी अपने दावे किए, जो पुस्तकें लिखी गईं, उन्हें भी दिखाया गया लेकिन महापुराणों में जिस संभल में कल्कि अवतार का जिक्र किया गया है,
उसकी कुछ पहचान/निशानियां बताई गई है, जिसमें 68 तीर्थ, 19 धर्मकूप, मध्य में शिवलिंग, कदंब का प्राचीन पेड़ व दक्षिण में गंगा का होना बताया गया है, जब इन निशानियों के बारे में पूछा गया तो संभलपुर में कल्कि अवतार का दावा फीका साबित हो गया, क्योंकि यह सभी निशानियां संभल उत्तर प्रदेश के संभल में ही मौजूद हैं। संभलपुर से लौटने के बाद आचार्य प्रमोद कृष्णम ने स्पष्ट किया कि पुराणों, धर्मग्रंथों में भगवान कल्कि के अवतार के लिए जिस संभल को नामित किया गया है, वह उत्तर प्रदेश का संभल ही है।
-68 तीर्थ मध्य में शिवलिंग-कूप कदम न्यारे, दिशा दक्षिणी बहती गंगा, हर मंदिर प्यारे, यह निशानियां धर्मग्रंथों में बताई गई हैं, यह सारी निशानियां उत्तर प्रदेश के संभल में हैं, जो अब जिला बन चुका है, इसलिए अब संभल को निर्विवाद रूप से कल्कि अवतार भूमि माना जाना चाहिए।
-आचार्य प्रमोद कृष्णम, कल्कि पीठाधीश्वर।
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इस धुंध को साफ करने की कवायद एक बार फिर कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने शुरू की है। जिसके तहत वह उड़ीसा के संभलपुर में पहुंचे। वहां के मां संभलेश्वरी देवी मंदिर के दर्शन के साथ साथ वहां पुजारियों से वार्ता की। लेकिन संभल की जो निशानियां पुराणों में वर्णित हैं, संभलपुर में नहीं बल्कि यूपी के संभल में ही मौजूद। जैसे 68 तीर्थ, 19 कूप, मध्य में शिवलिंग, कदंब का पेड़, दक्षिण में गंगा का बहना आदि।
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इसमें कोई दो राय नहीं कि धर्म ग्रंथों में कलियुग में भगवान श्रीहरि विष्णु का दसवां अवतार कल्कि के रूप में प्रस्तावित है, जिसके संभल में ब्राह्मण परिवार में होना बताया गया है। इसका जिक्र तो सिखों के दसवें गुरु श्री गुरुगोविंद सिंह महाराज ने भी दशम ग्रंथ में किया है। लेकिन वह कौन सा संभल है, जिसमें भगवान का अवतार होगा, इसे लेकर देश के विद्वानों में सदियों से मतभिन्नता देखी जा रही है। एक संभलपुर उड़ीसा में भी है, यहां भी मां संभलेश्वरी देवी का मंदिर है, यहां भी ईश्वर के अवतार लेने की प्रार्थना की जाती है, कल्कि धाम बना हुआ है।
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एक संभल यूपी में है, जहां कल्कि पीठ स्थापित है। इसी संभल में ईश्वरीय अवधारणा को प्रमाणित करने के लिए यहां हर साल श्री कल्कि महोत्सव का आयोजन किया जाता है। जिसमें देश के प्रमुख संतों, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक हस्तियां पहुंचती हैं।
काफी पहले इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने भी इस धुंध को साफ करने के लिए काफी प्रयास किए लेकिन आखिरकार उन्होंने भी उत्तर प्रदेश के संभल को ही मान्यता दी, यही कारण है कि उन्होंने संभल में कल्कि विष्णु मंदिर बनवाया। देश के शंकराचार्यों, धर्माचार्यों, साधु संतों ने दशकों पहले संभल को कल्कि पीठ घोषित किया। कल्कि पीठ संभल के ऐंचोड़ा कंबोह में स्थित है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम को कल्कि पीठाधीश्वर घोषित किया गया। भारत के प्रमुख संत डोगरे महाराज, स्वामी करपात्री महाराज के पश्चात अवतारी संभल पर छाई धुंध को धर्मजगत में साफ करने के लिए एक बार फिर श्रीकल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कवायद शुरू की और उड़ीसा के संभलपुर जा पहुंचे। पिछले सप्ताह उन्होंने संभलपुर में मां संभलेश्वरी देवी मंदिर के दर्शन के साथ साथ वहां के श्रीमहंत डा. सुरेंद्र महापात्रा व अन्य पुजारियों के साथ बातचीत की, उन्होंने भी अपने दावे किए, जो पुस्तकें लिखी गईं, उन्हें भी दिखाया गया लेकिन महापुराणों में जिस संभल में कल्कि अवतार का जिक्र किया गया है,
उसकी कुछ पहचान/निशानियां बताई गई है, जिसमें 68 तीर्थ, 19 धर्मकूप, मध्य में शिवलिंग, कदंब का प्राचीन पेड़ व दक्षिण में गंगा का होना बताया गया है, जब इन निशानियों के बारे में पूछा गया तो संभलपुर में कल्कि अवतार का दावा फीका साबित हो गया, क्योंकि यह सभी निशानियां संभल उत्तर प्रदेश के संभल में ही मौजूद हैं। संभलपुर से लौटने के बाद आचार्य प्रमोद कृष्णम ने स्पष्ट किया कि पुराणों, धर्मग्रंथों में भगवान कल्कि के अवतार के लिए जिस संभल को नामित किया गया है, वह उत्तर प्रदेश का संभल ही है।
-68 तीर्थ मध्य में शिवलिंग-कूप कदम न्यारे, दिशा दक्षिणी बहती गंगा, हर मंदिर प्यारे, यह निशानियां धर्मग्रंथों में बताई गई हैं, यह सारी निशानियां उत्तर प्रदेश के संभल में हैं, जो अब जिला बन चुका है, इसलिए अब संभल को निर्विवाद रूप से कल्कि अवतार भूमि माना जाना चाहिए।
-आचार्य प्रमोद कृष्णम, कल्कि पीठाधीश्वर।