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Sambhal News: आंधी-बारिश ने घर हिलाए... अनदेखी ने जिंदगी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 02:35 AM IST
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Storms and rain shook the houses... neglect shook lives.
बनियाठेर। पिछले दिनों आई आंधी-बारिश ने बनियाठेर क्षेत्र के ग्रामीणों को गहरे जख्म दिए हैं। कई लोगों के घर हिल गए। कुछ के लिंटर गिर गए, कुछ के टिनशेड उड़ गए तो कई के घर जर्जर हो गए। मजबूरी में लोग बांस-बल्ली लगाकर अपने जर्जर घरों को रोके हुए हैं और खतरे में जी रहे हैं। इन घरों का न तो सर्वे हुआ है और न ही इन ग्रामीणों कोई मदद मिली है। सरकारी अनदेखी से ग्रामीण मायूस हैं।
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किसी ने छत बल्ली लगाकर रोक रखी है तो कहीं मुख्य द्वार को तीन बल्लियों के सहारे टिकाया गया है। बरसात के मौसम में ये परिवार हर पल हादसे के साये में जी रहे हैं। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव से कई बार गुहार लगाने के बावजूद इन लोगों को अब तक कोई सहायता नहीं मिली है। न तो किसी को मुआवजा मिला और न ही सरकारी आवास। ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर मकानों का सर्वे तक नहीं किया। अब सवाल यह है कि जब जरूरतमंद ही योजना से वंचित हैं तो आखिर किन मानकों पर आवास आवंटित किए जा रहे हैं।
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बल्लियों पर टिका है मीना का आशियाना
पहला मामला गोपालपुर गांव का है। यहां मीना अपने पति राम भजन व बच्चों के साथ रहती हैं। लगातार बारिश से कच्चे घर की छत में लगा बल्ला टूट गया है, वहीं मुख्य द्वार भी दरक गया है। परिवार ने छत और दरवाजे को दूसरी बल्ली लगाकर किसी तरह रोका हुआ है। सत्यवती की छत कभी भी गिर सकती है।
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लकड़ी लगाकर रोकी गई है छत
दूसरा मामला भी गोपालपुर का ही है। सत्यवती अपने पति अजीत सिंह व दो बच्चों के साथ जर्जर मकान में रह रही हैं। बारिश के कारण मिट्टी-बल्ले की छत का वजन बढ़ने से बल्ली टूट गई। अब लकड़ी की बल्ली के सहारे छत को रोका गया है, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकती है।
छत गिरी तो छप्पर में रहने को मजबूर अनीता
गोपालपुर की ही अनीता देवी अपने पति वीरेंद्र व चार बच्चों के साथ रहती हैं। पिछली बरसात में एक कमरे की छत गिर गई थी। बचे हुए एक कमरे के आगे छप्पर डालकर परिवार जीवन यापन कर रहा है, वह भी बरसात में टपक रहा है। अनीता का कहना है कि दिन-रात हादसे का डर लगा रहता है। कई बार ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

मूक-बधिर रूबी टिनशेड में रहने को मजबूर
सबसे दर्दनाक तस्वीर ग्राम मानकपुर नरौली की है। यहां 36 वर्षीय मूक-बधिर विधवा रूबी चार बच्चों नीलम (12), लवकुश (10), प्रियंका (8) और सरिक्षा (6) के साथ जर्जर टिनशेड में रह रही है। पिछले दिनों आई आंधी-बारिश में टिन उड़ गई थी, जिसे ग्रामीणों ने जैसे-तैसे ठीक किया। रूबी के पास न कोई पेंशन है और न ही आवास। ढाई-तीन बीघा जमीन और दुधारू पशुओं के सहारे वह बच्चों का पालन-पोषण कर रही है। प्रधान और सचिव से गुहार लगाने के बाद भी उसे योजना का लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन परिवारों को आवास नहीं दिया गया तो बरसात में कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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बारिश के दौरान यदि मकान गिरता है तो उसके लिए सरकारी मदद का प्रावधान है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत यदि पीड़ित आवेदन करते हैं तो जांच करा कर उन्हें उसका लाभ दिलाया जाएगा।
- आशुतोष तिवारी, एसडीएम चंदौसी
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