Sambhal: एक ही जमीन को दो लोगों को बेचा, खुलासा होने पर दर्ज हुआ मुकदमा, नीलाम होगी संपत्ति
संभल तहसील क्षेत्र के गांव बहादुरपुर सराय निवासी रामभरोसे के पास जो जमीन थी उस पर गांव के ही चंद्रसेन ने दावा किया था। यह मामला न्यायालय उप संचालक चकबंदी में चल रहा था। वर्ष 2002 ने न्यायालय ने आदेश सुनाया था कि गाटा संख्या 451 पर चंद्रसेन का नाम दर्ज किया जाए, लेकिन न्यायालय के आदेश के बाद भी अधिकारियों की लापरवाही के चलते चंद्रसेन के नाम जमीन दर्ज नहीं की गई।
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गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए संभल तहसील क्षेत्र में जमीन की खरीद में लापरवाही सामने आई है। एक बार पहले जमीन बेच चुके दो किसानों ने फिर से गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए बैनामा करा दिया और इसके बाद 50 लाख रुपये का मुआवजा हड़प लिया। मामला अफसरों के संज्ञान में पहुंचा तो फिर मुआवजे की रकम को वापस करने के लिए नोटिस दिया गया। लेकिन वसूली नहीं हो सकी। जिसके बाद लेखपाल ज्ञानेश कुमार ने दोनों लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
दरअसल, संभल तहसील क्षेत्र के गांव बहादुरपुर सराय निवासी रामभरोसे के पास जो जमीन थी उस पर गांव के ही चंद्रसेन ने दावा किया था। यह मामला न्यायालय उप संचालक चकबंदी में चल रहा था। वर्ष 2002 ने न्यायालय ने आदेश सुनाया था कि गाटा संख्या 451 पर चंद्रसेन का नाम दर्ज किया जाए, लेकिन न्यायालय के आदेश के बाद भी अधिकारियों की लापरवाही के चलते चंद्रसेन के नाम जमीन दर्ज नहीं की गई।
इसके बाद राम भरोसे ने वर्ष 2021 में गांव के ही संतराम, मलखान, पाली, सुषमा को जमीन बेच दी, लेकिन अभी तक जमीन का दाखिल खारिज भी नहीं हुआ था कि इसके तुरंत बाद रामभरोसे ने इस जमीन को गंगा एक्सप्रेस-वे के नाम बैनामा करा दिया। इसके बदले किसान को 50 लाख रुपये बतौर मुआवजे में मिले। यह मामला अक्तूबर माह में अधिकारियों की पकड़ में आया तो तहसील प्रशासन ने रामभरोसे को नोटिस जारी करते हुए रुपये जमा करने के निर्देश दिए। लेकिन जब रुपये जमा नहीं किए तो अधिकारियों ने इस घपले से खुद को बचाने के लिए आनन-फानन में शुक्रवार की रात कोतवाली संभल में रामभरोसे और इसके बेटे रनवीर के खिलाफ अभियोग पंजीकृत करा दिया।
साथ ही राम भरोसे के बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है। रुपये वसूलने के लिए उसकी बची जमीन व अन्य संपत्ति को नीलाम करने की तैयारी शुरू कर दी है। लेकिन एक बड़ा सवाल उठता है कि जो जमीन उसकी थी ही नहीं उसे पहले ग्रामीणों को बेच दिया और फिर गंगा एक्स्रपेस-वे को दे दिया। इस पूरी कार्रवाई में लेखपाल क्या कर रहे थे जो मामला इतने दिनों बाद पकड़ में आया। तहसीलदार मनोज कुमार सिंह का कहना है कि मामला पकड़ में आने के बाद अभियोग पंजीकृत करा दिया गया है।
रुपये वसूलने के लिए उसकी संपत्ति की नीलामी की जाएगी। बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है। दाखिल खारिज न होने के चलते जमीन रामभरोसे के नाम ही थी। जिसके चलते उसका बैनामा हो गया।