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Sambhal seat: मुद्दे हुए दरकिनार, जाति-बिरादरी और काडर वोट पर फिट कर रहे आंकड़े, प्रत्याशियों की बढ़ी बेचैनी
Tue, 30 Apr 2024 04:48 PM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल
Published by: विमल शर्मा
Updated Tue, 30 Apr 2024 04:48 PM IST
सार
संभल लोकसभा सीट पर सात मई को मतदान होगा। इन दिनों इस सीट पर जमकर प्रचार किया जा रहा है। सभी सियासी दल जाति, बिरादरी और पार्टी काडर के वोट के साथ हार जीत का गुणा गणित लगा रहे हैं।
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अमरोहा में मतदान(File)
- फोटो : संवाद
विस्तार
संभल लोकसभा सीट पर जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, स्थानीय मुद्दे दरकिनार कर दिए हैं। जाति, बिरादरी और पार्टी काडर वोट के आंकड़े फिट कर हार जीत का गणित लगाया जा रहा है। प्रत्याशियों के बदले रुख को देखते हुए मतदाता भी चुप्पी साधे हैं।
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मतदान के समय ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। मतदाताओं की शांति से प्रत्याशियों में बेचैनी बढ़ी हुई है। संभल लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की पांच सीटें आती हैं, जिनमें से बिलारी और कुंदरकी मुरादाबाद जिले की हैं।
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राजनीतिक दलों के अनुसार जातीय समीकरण देखें, तो संभल विधानसभा सीट पर मुस्लिमों का वर्चस्व, असमोली में जाट, यादव और मुस्लिम मतदाता अधिक हैं। चंदौसी विधानसभा सीट पर अनुसूचित जाति के मतदाता काफी संख्या में हैं, इसके अलावा सैनी, मौर्य, वैश्य, ठाकुर व अन्य बिरादरी का काफी प्रभाव है।
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जाति बिरादरी, पार्टी का काडर वोट अब चुनाव पर हावी हो चला है। स्थानीय मुद्दों और विकास की बात दूर की कौड़ी साबित हो रही है। जनसंपर्क हो या स्टार प्रचारकों की जनसभाएं सभी जगह एक दूसरे पर कटाक्ष, अपनी पार्टी की राष्ट्रीय स्तर की अच्छाई गिनाने के अलावा स्थानीय समस्याएं सामने नहीं आ रही है।
जनसंपर्क में भी सभी दलों के प्रत्याशी और समर्थक भी केवल एक दूसरे के दल के प्रत्याशी को शिकस्त देने और अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।
संभल लोकसभा क्षेत्र के ये है प्रमुख मुद्दे:
- सबसे अहम संभल जिला मुख्यालय का निर्माण पूरा होना,
- संभल से गजरौला तक रेलवे लाइन तैयार होना,
- चंदौसी में जाम से निजात को रेलवे फाटक पर आरओबी निर्माण,
- ग्रामीण क्षेत्र की सड़क व पेयजल व्यवस्थाएं,
- जिले में ट्रामा सेंटर और विश्वविद्यालय की मांग
- संभल, असमोली क्षेत्र के कई गांवों में दूषित भूगर्भ जल की समस्या, जहां हेपेटाइटिस सी के लगातार मरीज मिलते हैं,
- छुट्टा पशुओं की समस्या