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संभल बवाल जांच रिपोर्ट: 1978 के दंगे से ज्यादा प्रभावित हुआ जिला; मुलायम सिंह पर था केस वापसी की पैरवी का आरोप

Sat, 30 Aug 2025 03:31 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Published by: आकाश दुबे Updated Sat, 30 Aug 2025 03:31 PM IST
सार

1978 के दंगे में जो नौ हत्याएं, आगजनी, लूटपाट व अन्य गंभीर मामले में 16 केस दर्ज किए गए थे। उसमें आठ केस राजनीतिक दबाव के चलते वापस लिए गए थे। बाकी आठ केस का भी कोई निष्कर्ष नहीं निकला।

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Sambhal riot investigation report district was more affected than 1978 riots
संभल बवाल जांच रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

1978 के दंगे का असर शहर के खग्गू सराय पर सबसे ज्यादा पड़ा था। इस इलाके में रहने वाले हिंदू परिवार पलायन करने के लिए मजबूर हुए थे। हालांकि ज्यादातर परिवार शहर के उन मोहल्लों में जाकर बसे जहां हिंदू आबादी रहती है। 1978 के दंगे में जो नौ हत्याएं, आगजनी, लूटपाट व अन्य गंभीर मामले में 16 केस दर्ज किए गए थे। उसमें आठ केस राजनीतिक दबाव के चलते वापस लिए गए थे। बाकी आठ केस का भी कोई निष्कर्ष नहीं निकला। पीड़ित न्याय की आस लगाए बैठे रहे लेकिन न्याय हुआ नहीं।

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इस मोहल्ले का शिव मंदिर भी तब से ही बंद हो गया था। 24 नवंबर 2024 को हुए बवाल के बाद पुलिस-प्रशासन की ओर से इस मंदिर के कपाट खोले गए थे। जहां अब नियमित पूजन किया जाता है। इस मंदिर के परिक्रमा मार्ग के कब्जे को लेकर जांच अभी भी जारी है जो लंबित चल रही है।

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पीड़ित परिवारों की वह टीस अभी भी दिखती है। एक दिसंबर 2024 को जब न्यायिक जांच आयोग के सदस्य संभल पहुंचे तो 1978 दंगे के पीड़ित परिवारों ने अपना दर्द बयान किया था। उसमें बताया था कि किस तरह हत्याएं हुईं और न्याय भी नहीं मिला। पुलिस की जांच रिपोर्ट में यह तय ही नहीं हुआ कि हत्या किसने की। अदालत में सबूत के अभाव दोषियों की ताकत बने और वह बरी हो गए। बनवारी लाल गोयल की हत्या निर्मम की गई थी। उसका उल्लेख न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में होने की भी चर्चा है।

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मुलायम सिंह यादव पर था केस वापसी की पैरवी का आरोप
रिकॉर्ड के मुताबिक 16 दिसंबर 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के विशेष सचिव न्याय विभाग आरडी शुक्ला द्वारा पत्र भेजकर मुरादाबाद के डीएम से केस वापसी की सिफारिश की गई थी। 23 दिसंबर 1993 को आदेश जारी किया गया था। इसके बाद ही दर्ज 16 केस में से आठ केस की वापसी हुई थी। बाकी आठ केस में सबूत नहीं मिले और वह भी छूट गए थे।

मंजरशफी था इस दंगे का सूत्रधार
29 मार्च 1978 को मंजरशफी ने इस दंगे को चिंगारी दी थी। वह एक कॉलेज के विरोध में जुलूस निकाल रहा था। उसने दुकानों को बंद कराना चाहा था। वह सक्रिय राजनीति में था। इसलिए लोगों पर प्रभाव दिखाता था। जब हिंदू दुकानदारों ने दुकान बंद करने से इन्कार किया तो विवाद बढ़ा। इसके बाद ही किसी तरह की अफवाह फैली और दंगा हो गया। हालात पर उस समय काबू पाया लेकिन अगले दिन फिर आगजनी की गई। इसके बाद कर्फ्यू लगा दिया गया था। आयोग के सामने यह भी कहा गया था कि उस समय के स्थानीय पुलिस-प्रशासन की ओर से एक पक्षीय कार्रवाई की गई थी।

पुलिस को दंगे से जुड़े दस्तावेज तलाशने में हो रही मुश्किल
विधान परिषद के सदस्य श्रीचंद्र शर्मा ने जनवरी 2025 में सरकार से मांग की थी कि 1978 के दंगे की फाइलें दोबारा से खोली जाएं। इसके बाद ही सरकार ने दंगे से जुड़ी एफआईआर, विवेचना व केस से जुड़े अन्य दस्तावेज तलब किए हैं। संभल पुलिस-प्रशासन इन सभी दस्तावेज को तलाश करने में लगे हैं। 46 वर्ष पुराने इस मामले में कई दस्तावेज ऐसे हैं जो नहीं मिले हैं। इसके चलते ही शासन को रिपोर्ट नहीं मिली है। एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई का कहना है कि रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जल्द ही इस रिपोर्ट को तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।

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