फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sambhal News ›   Sambhal Lok Sabha: Enmity of decades, trouble for SP, competition between Burke and Mehmood families Sambhal

UP: दशकों की अदावत फिर बनेगी सपा के लिए मुसीबत, संभल में बर्क और महमूद परिवार में बढ़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा

Fri, 22 Mar 2024 12:42 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 22 Mar 2024 12:42 PM IST
सार

सपा का गढ़ मानी जाने वाली संभल सीट पर लगातार गुटबाजी हावी रही है। इस सीट पर डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क और इकबाल महमूद के परिवार में करीब पांच दशक से राजनीतिक अदावत चली आ रही है। इसका पार्टी को भी कई बार नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार फिर से बर्क के पौते को टिकट दिया गया है। इसके बाद महमूद महमूद के तेवर तीखे हो गए हैं। 

विज्ञापन
Sambhal Lok Sabha: Enmity of decades, trouble for SP, competition between Burke and Mehmood families Sambhal
डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क और विधायक इकबाल महमूद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संभल सपा का गढ़ माना जाता है। इस संभल लोकसभा क्षेत्र से सपा के संस्थापक व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और उनके भाई प्रोफेसर रामगोपाल यादव भी चुनाव लड़कर सांसद रह चुके हैं। इसके बाद भी यह सीट पार्टी की गुटबाजी का शिकार रही है।

विज्ञापन


डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क और इकबाल महमूद के परिवार में करीब पांच दशक से राजनीतिक अदावत चली आ रही है। इसका खामियाजा पार्टी को कई बार उठाना भी पड़ा है। वर्ष 1998 और 1999 में मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा का चुनाव जीता था। 
विज्ञापन


इसके बाद वर्ष 2004 में प्रोफेसर रामगोपाल यादव लोकसभा का चुनाव जीते थे। इसके बाद वर्ष 2009 में सपा ने इकबाल महमूद को टिकट दिया था। उस समय डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क भी सपा में थे और मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


जब टिकट कटा तो वह बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। खामियाजा सपा प्रत्याशी को उठाना पड़ा था। इकबाल महमूद हार गए थे। बसपा के प्रत्याशी डॉ. बर्क जीत गए थे। इसके बाद वर्ष 2014 में सपा ने डॉ. बर्क को प्रत्याशी बनाया था।

जिसमें भाजपा प्रत्याशी सत्यपाल सिंह सैनी से डॉ. बर्क को हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में डॉ. बर्क ने आरोप लगाया था कि पार्टी के नेताओं ने चुनाव नहीं लड़ाया और विरोध किया था। वर्ष 2019 में भी दोनों खेमों में बगावत सामने आई थी लेकिन गठबंधन के चलते डॉ. बर्क को बड़े अंतर से जीत मिली थी।

इस बार के चुनाव में भी बगावत के सुर उठ सकते हैं। क्योंकि डॉ. बर्क को जब पहली सूची में सपा ने प्रत्याशी घोषित किया था तो इकबाल महमूद के तेवर तीखे हो गए थे। उस समय भी उन्होंने अपने समर्थकों से बैठक करने के बाद ही निर्णय लेने की बात कही थी।

ठीक वैसे ही तेवर इस बार भी बने हुए हैं। इससे जाहिर हो रहा है कि संभल में सपा की गुटबाजी एक बार फिर सामने आ सकती है।

 

कब-कब एक दूसरे का किया गया विरोध

वर्ष 1995
डॉ. बर्क और इकबाल महमूद ने निकाय चुनाव में अध्यक्ष के पद के लिए अपने अपने समर्थकों के लिए टिकट सपा से मांगा था। सपा ने डॉ. बर्क की समर्थक इफत आरा को टिकट दिया था। इकबाल महमूद पर आरोप लगा कि उन्होंने बसपा प्रत्याशी तरन्नुम अकील को चुनाव लड़ाया है। इसके चलते सपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा।

 

 

 

वर्ष 2002: सपा प्रत्याशी इकबाल महमूद के विरोध में डॉ. बर्क ने सपा को छोड़कर संभल विधानसभा क्षेत्र से राष्ट्रीय परिवर्तन दल के टिकट पर चुनाव लड़े थे। जिसमें हार का सामना करना पड़ा था।

वर्ष 2007: संभल विधानसभा क्षेत्र के सपा प्रत्याशी इकबाल महमूद के विरोध में डॉ. बर्क ने मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से सपा सांसद रहते हुए अपने बेटे ममलुकुर्रहमान बर्क को राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ाया था। इसमें ममलुकुर्रहमान बर्क को हार का सामना करना पड़ा था।

वर्ष 2009: सपा ने डॉ. बर्क का टिकट 2009 में काट दिया था। इसके बाद सपा ने इकबाल महमूद को प्रत्याशी बनाया था। डॉ. बर्क ने सपा का दामन छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया था। इस चुनाव में इकबाल महमूद और डॉ. बर्क का आमना सामना हुआ। इकबाल महमूद को हार का सामना करना पड़ा था।

 

 

वर्ष 2014: सपा ने डॉ. बर्क को संभल लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया था। इसका विरोध इकबाल महमूद ने किया था। बाद में डॉ. बर्क चुनाव हारे तो उन्होंने कहा था कि विरोध के चलते उनकी हार हुई है।

वर्ष 2017: सपा ने संभल विधानसभा क्षेत्र से इकबाल महमूद को प्रत्याशी बनाया था। इस समय डॉ. बर्क सपा में थे लेकिन वह अपने पोते जियाउर्रहमान बर्क के लिए संभल से टिकट की मांग कर रहे थे। जब टिकट नहीं मिला तो पोते को एआईएमआईएम के टिकट पर चुनाव लड़ाया था। इसमें जियाउर्रहमान बर्क को हार का सामना करना पड़ा था।

वर्ष 2019: सपा ने डॉ. बर्क को लोकसभा प्रत्याशी बनाया था। इस चुनाव में सपा, बसपा और रालोद का गठबंधन था। इकबाल महमूद भी टिकट की मांग कर रहे थे। जब टिकट नहीं मिला तो उन्होंने विरोध किया था। इस चुनाव में भी इकबाल महमूद पर आरोप लगाया कि उन्होंने डॉ. बर्क को चुनाव नहीं लड़ाया था। इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि वह सपा के प्रत्याशी डॉ. बर्क की किसी भी सभा शामिल नहीं हुए थे।

 

 

 

वर्ष 2022: डॉ. बर्क ने जियाउर्रहमान बर्क के लिए संभल विधानसभा क्षेत्र से टिकट की मांग की थी। जबकि सपा से इकबाल महमूद को टिकट हो गया था। जब दोनों दिग्गज नेताओं का विरोध बढ़ा तो सपा ने कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से जियाउर्रहमान बर्क को टिकट दिया था। जहां से जियाउर्रहमान बर्क विधायक हैं।

वर्ष 2023: निकाय चुनाव में सपा ने विधायक इकबाल महमूद की पत्नी रुखसाना इकबाल को प्रत्याशी बनाया था। डॉ. बर्क ने इसका खुलकर विरोध किया था। इस विरोध में जियाउर्रहमान बर्क भी शामिल थे। डॉ. बर्क और जियाउर्रहमान बर्क ने पार्टी प्रत्याशी को चुनाव न लड़ाकर निर्दलीय प्रत्याशी फरहाना यासीन को चुनाव लड़ाया था।

 

 

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed