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Sambhal News: जिले में नहीं बर्न यूनिट, मरीज होते हैं परेशान
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चंदौसी। जिले में आग से झुलसे मरीजों के इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है। सरकारी अस्पतालों में बर्न सेंटर की सुविधा न होने के कारण मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना पड़ रहा है। ऐसे में परिजनों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां इलाज पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। इन दिनों आग की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है, जिससे स्थिति और चिंताजनक हो गई है।
जिले के सरकारी अस्पतालों में बर्न सेंटर की सुविधा नहीं है। ऐसे में आग से झुलसे मरीजों को पहले प्राथमिक उपचार दिया जाता है और हालत गंभीर होने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। अधिकतर मरीजों को मुरादाबाद, अलीगढ़ या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में भेजा जाता है। गंभीर स्थिति में मरीज को बाहर ले जाना समय और व्यवस्था दोनों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण होता है। कई बार मरीजों को निजी अस्पतालों में भी भर्ती कराना पड़ता है, जहां इलाज पर अधिक खर्च आता है।
चिकित्सकों का कहना है कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के उपचार के लिए विशेष वार्ड और विशेषज्ञ सुविधाओं की जरूरत होती है, जो फिलहाल जिले में उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण ऐसे मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किया जाता है।
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स्वास्थ्य विभाग को लंबे समय से जिले में बर्न सेंटर की जरूरत महसूस हो रही है, लेकिन अब तक इसे शुरू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यही वजह है कि जिले में यह सुविधा विकसित नहीं हो सकी है और बेहतर इलाज की मांग लगातार उठ रही है।
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जिले में किसी भी सरकारी अस्पताल में बर्न सेंटर नहीं है। फिलहाल जिला अस्पताल संभल में बर्न मरीजों के लिए पांच बेड आरक्षित किए गए हैं।
- डॉ. तरुण पाठक सीएमओ संभल
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जिले के सरकारी अस्पतालों में बर्न सेंटर की सुविधा नहीं है। ऐसे में आग से झुलसे मरीजों को पहले प्राथमिक उपचार दिया जाता है और हालत गंभीर होने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। अधिकतर मरीजों को मुरादाबाद, अलीगढ़ या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में भेजा जाता है। गंभीर स्थिति में मरीज को बाहर ले जाना समय और व्यवस्था दोनों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण होता है। कई बार मरीजों को निजी अस्पतालों में भी भर्ती कराना पड़ता है, जहां इलाज पर अधिक खर्च आता है।
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चिकित्सकों का कहना है कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के उपचार के लिए विशेष वार्ड और विशेषज्ञ सुविधाओं की जरूरत होती है, जो फिलहाल जिले में उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण ऐसे मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किया जाता है।
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स्वास्थ्य विभाग को लंबे समय से जिले में बर्न सेंटर की जरूरत महसूस हो रही है, लेकिन अब तक इसे शुरू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यही वजह है कि जिले में यह सुविधा विकसित नहीं हो सकी है और बेहतर इलाज की मांग लगातार उठ रही है।
जिले में किसी भी सरकारी अस्पताल में बर्न सेंटर नहीं है। फिलहाल जिला अस्पताल संभल में बर्न मरीजों के लिए पांच बेड आरक्षित किए गए हैं।
- डॉ. तरुण पाठक सीएमओ संभल