{"_id":"687e989162a4333a6f0543fd","slug":"namaaz-keeps-a-person-safe-from-troubles-and-calamities-maulana-sambhal-news-c-275-1-smbd1033-124961-2025-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुसीबत और बलाओं से इंसान को महफूज रखती है नमाज : मौलाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुसीबत और बलाओं से इंसान को महफूज रखती है नमाज : मौलाना
विज्ञापन
सिरसी। सिरसी के अजाखाना इमाम सज्जाद में नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन के बेटे हजरत जैनुल आबेदीन का शबीए जुलजुनाह और ताबूत का जुलूस निकाला गया।
मोहल्ला चौधरियान में अंजुमने मुहाफिजे अजा की ओर से निकाला गया। इसमें स्थानीय अंजुमनों के अलावा दूसरे जिलों से आईं अंजुमनों ने नोहा पढ़ा और मातम किया। अजाखाने में आयोजित हुई मजलिस में मर्सिया चौधरी बबर अली व उनके साथियों ने पढ़ा। मजलिस को मौलाना काजी हुसैन रजा ने खिताब करते हुए कहा इमाम जैनुल आबेदीन ने सख्तियां सहते हुए भी नमाज का दामन नहीं छोड़ा। हमें भी उनके अमल पर चलकर पाबंदी के साथ नमाज अदा करनी चाहिए। नमाज से ही इंसान हर मुसीबत और बलाओं से महफूज रहता है। दुनिया में कामयाबी भी हासिल कर सकता है। इमामे सज्जाद वह इमाम हैं, जिन्होंने भरा घर लूटने के बाद शामे गरीबां के मसायब पर सजदे करते रहे और कैद में भी इबादत करते रहे।
अंत में मौलाना ने शोहदाए कर्बला के मसायब बयान किए। जिसको सुनकर अजादार फूट-फूटकर रोने लगे। मजलिस के बाद शबीए जुलजुनाह व ताबूत का जुलूस निकाला गया। जिसमें बनारस, मुजफ्फरनगर, सुल्तानपुर के अलावा स्थानीय अंजुमनों ने भी नोहाख्वानी व सीनाजनी की। जुलूस अपने निर्धारित रास्ते से होता हुआ इमाम बारगाह गर्बी पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस का संचालन कमाल अख्तर ने किया।
विज्ञापन
मोहल्ला चौधरियान में अंजुमने मुहाफिजे अजा की ओर से निकाला गया। इसमें स्थानीय अंजुमनों के अलावा दूसरे जिलों से आईं अंजुमनों ने नोहा पढ़ा और मातम किया। अजाखाने में आयोजित हुई मजलिस में मर्सिया चौधरी बबर अली व उनके साथियों ने पढ़ा। मजलिस को मौलाना काजी हुसैन रजा ने खिताब करते हुए कहा इमाम जैनुल आबेदीन ने सख्तियां सहते हुए भी नमाज का दामन नहीं छोड़ा। हमें भी उनके अमल पर चलकर पाबंदी के साथ नमाज अदा करनी चाहिए। नमाज से ही इंसान हर मुसीबत और बलाओं से महफूज रहता है। दुनिया में कामयाबी भी हासिल कर सकता है। इमामे सज्जाद वह इमाम हैं, जिन्होंने भरा घर लूटने के बाद शामे गरीबां के मसायब पर सजदे करते रहे और कैद में भी इबादत करते रहे।
अंत में मौलाना ने शोहदाए कर्बला के मसायब बयान किए। जिसको सुनकर अजादार फूट-फूटकर रोने लगे। मजलिस के बाद शबीए जुलजुनाह व ताबूत का जुलूस निकाला गया। जिसमें बनारस, मुजफ्फरनगर, सुल्तानपुर के अलावा स्थानीय अंजुमनों ने भी नोहाख्वानी व सीनाजनी की। जुलूस अपने निर्धारित रास्ते से होता हुआ इमाम बारगाह गर्बी पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस का संचालन कमाल अख्तर ने किया।
विज्ञापन