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अल्पसंख्यकों के विशेषाधिकार हों समाप्त, सभी को मिलें समान अधिकार : श्री राजराजेश्वराश्रम
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जगद्गुरु शंकराचार्य श्री राजराजेश्वराश्रम जी महाराज ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए। जब तक यह संहिता नहीं बनेगी देश की मूलभूत समस्या किसी दल के सत्ता परिवर्तन से हल होने वाली नहीं है। देश की संवैधानिक स्थिति में अल्पसंख्यकों को विशेषाधिकार मिले हुए हैं।
शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में जगद्गुरु शंकराचार्य श्री राजराजेश्वराश्रम जी महाराज ने कहा कि एक देश, एक कानून, एक संविधान, एक प्रधान, एक समान अधिकार होना चाहिए। जो इस देश में पैदा हुआ है। वह इस देश का नागरिक है। भले ही उसकी उपासना का तरीका अलग-अलग हो। हमें उपासना पद्धति से कोई एतराज नहीं है। सब अपनी-अपनी पूजा करें लेकिन अल्पसंख्यकों को जो विशेषाधिकार हैं, उसे समाप्त किया जाना चाहिए और सबको समान अधिकार मिलने चाहिए।
भगवान बुद्ध को लेकर भी चर्चा चल रही है कि लोग बौद्ध हो रहे हैं। हमने श्रीराम, श्रीकृष्ण सहित 24 अवतार माने हैं, भगवान बुद्ध को भी हमने उन 24 में से ही एक अवतार माना है। इसलिए भगवान बुद्ध सनातन परंपरा से अलग नहीं हैं। सनातन हिंदू शाश्वत परंपरा के ही अंग हैं। इसलिए उनको अलग करके देखना, इस देश की एकता को तोड़ने वाली बात है। देश में जनसंख्या नियंत्रण पर भी सख्त कानून बनाए जाने की आवश्यकता है। क्योंकि जिस तरह से जनसंख्या बढ़ रही है और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है, अब प्रकृति उसे वहन नहीं कर पा रही है।
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उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए मैं उनको विशेष आशीर्वाद दूूंगा। अन्य विकास कार्यों के सापेक्ष अयोध्या में तेजी से श्रीराम मंदिर निर्माण के सवाल उन्होंने कहा कि सरकार के विकास कार्य तेजी से हों अथवा सरक-सरक कर। हम तो संन्यासी बाबा हैं। हमें तो श्रीराम मंदिर का निर्माण जल्द पूरा चाहिए। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार गुलाब देवी द्वारा पीएम मोदी को भगवान का अवतार बताने के सवाल पर शंकराचार्य जी ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत विषय हैं। इस पर मैं कुछ नहीं कहूंगा।
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शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में जगद्गुरु शंकराचार्य श्री राजराजेश्वराश्रम जी महाराज ने कहा कि एक देश, एक कानून, एक संविधान, एक प्रधान, एक समान अधिकार होना चाहिए। जो इस देश में पैदा हुआ है। वह इस देश का नागरिक है। भले ही उसकी उपासना का तरीका अलग-अलग हो। हमें उपासना पद्धति से कोई एतराज नहीं है। सब अपनी-अपनी पूजा करें लेकिन अल्पसंख्यकों को जो विशेषाधिकार हैं, उसे समाप्त किया जाना चाहिए और सबको समान अधिकार मिलने चाहिए।
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भगवान बुद्ध को लेकर भी चर्चा चल रही है कि लोग बौद्ध हो रहे हैं। हमने श्रीराम, श्रीकृष्ण सहित 24 अवतार माने हैं, भगवान बुद्ध को भी हमने उन 24 में से ही एक अवतार माना है। इसलिए भगवान बुद्ध सनातन परंपरा से अलग नहीं हैं। सनातन हिंदू शाश्वत परंपरा के ही अंग हैं। इसलिए उनको अलग करके देखना, इस देश की एकता को तोड़ने वाली बात है। देश में जनसंख्या नियंत्रण पर भी सख्त कानून बनाए जाने की आवश्यकता है। क्योंकि जिस तरह से जनसंख्या बढ़ रही है और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है, अब प्रकृति उसे वहन नहीं कर पा रही है।
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उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए मैं उनको विशेष आशीर्वाद दूूंगा। अन्य विकास कार्यों के सापेक्ष अयोध्या में तेजी से श्रीराम मंदिर निर्माण के सवाल उन्होंने कहा कि सरकार के विकास कार्य तेजी से हों अथवा सरक-सरक कर। हम तो संन्यासी बाबा हैं। हमें तो श्रीराम मंदिर का निर्माण जल्द पूरा चाहिए। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार गुलाब देवी द्वारा पीएम मोदी को भगवान का अवतार बताने के सवाल पर शंकराचार्य जी ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत विषय हैं। इस पर मैं कुछ नहीं कहूंगा।