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पवांसा में नहीं थमा बंदरों की रहस्यमय मौत का सिलसिला, संख्या 20 पहुंची

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 08 Apr 2020 10:48 PM IST
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matter of monkey death in sambhal
संभल/चंदौसी। बंदरों की रहस्यमय मौत का सिलसिला अभी थमा नहीं है। पिछले आठ दिनों में 19 बंदरों की मौत हुई थी। अब बुधवार को एक और बंदर ने बीमारी के बाद दम तोड़ दिया। इस तरह से नौ दिन में मरने वाले बंदरों की संख्या बीस हो गई है। पशु चिकित्सा विभाग और वन विभाग बंदरों की मौत का कारण नहीं तलाश रहे हैं। पशु चिकित्सा विभाग ने एक बंदर का शव मंगलवार को पोस्टमार्टम के लिए बरेली भेजा था।
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पोस्टमार्टम में निमोनिया होने का उल्लेख है। जिले के पवांसा गांव स्थित भटपुरा मोहल्ले में बुधवार की सुबह करीब 8:55 बजे एक और बीमार बंदर की मौत हो गई। पवांसा निवासी नीटू राघव ने मृत बंदर के बारे में पवांसा के पशु चिकित्सा अधिकारी व वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। सूचना पर पहुंचे अधिकारियों ने मृत बंदर का अंतिम संस्कार कराने से मना कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि अभी जांच पड़ताल कर लें।
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उसके बाद अंदर का अंतिम संस्कार किया जाएगा। पवांसा स्थित पशु चिकित्सालय के डॉक्टर नीरज गौतम और वनकर्मी मलखान ने बीमारी की वजह से हाल बेहाल पड़े बंदरों को भी दूर से देखा है। ग्रामीणों ने बताया कि जो भी बंदर बीमार पड़ रहे हैं वे आम तौर पर तालाब के आसपास रहना पसंद कर रहे हैं। अब तक नौ दिनों के भीतर मरने वाले बंदरों की संख्या 20 हो गई है। जबकि पांच-छह बंदर अभी बीमार चल रहे हैं। बंदरों की मौत का सिलसिला जारी रहने से हड़कंप मचा है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा : निमोनिया से हुई थी बंदर की मौत
संभल। पवांसा में मौत का शिकार हुए बंदर का शव बरेली स्थित सेंटर फॉर एनिमल डिजीज रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक को भेजा गया था। ताकि उसकी मौत की वजह स्पष्ट हो सके। फोन पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी मिलने के बाद डा. एलके गुप्ता ने बताया कि बंदर की मौत निमोनिया से हुई है।

केले में दी जाएगी निमोनिया से बचाव की दवा
संभल। निमोनिया से बंदरों को राहत दिलाने के खिलाना जरूरी है। दवा खिलाने के लिए डाक्टर अगर किसी बंदर के करीब जाते हैं तो बंदरों का झुंड लोगों को घेर लेता है। इस स्थिति से वाकिफ होने के बाद चिकित्सकों ने बंदरों को केले में दवाई देने का निर्णय लिया है।
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