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Sambhal News: अधिकारियों के गैरहाजिर रहने से समय पर पूरी नहीं हो सकी मजिस्ट्रियल जांच
Thu, 19 Dec 2024 01:11 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Thu, 19 Dec 2024 01:11 AM IST
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संभल। अधिकारियों के गैर हाजिर होने के कारण बवाल की मजिस्ट्रियल जांच पूरी नहीं हो पा रही है। ये जांच सात दिन में पूरी होनी थी, बावजूद इसके 25 दिन बाद भी तारीख दी जा रही है। आलम ये है कि न तो अधिकारियों को बयान दर्ज हुए हैं और न आम जनता के। अब अगली तारीख 30 दिसंबर निर्धारित की गई है।
संभल में 24 नवंबर को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान बवाल के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हुए। मामला संसद और विधानसभा तक में भी गूंजा है। इस बवाल के बाद ही डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे। डिप्टी कलक्टर दीपक चौधरी को जांच अधिकारी नामित किया गया है। लिहाजा, डिप्टी कलक्टर ने बहजोई कलक्ट्रेट परिसर स्थित कार्यालय में बयान दर्ज करने के लिए एसडीएम वंदना मिश्रा, सीओ अनुज चौधरी, नखासा और संभल के थानाध्यक्ष व अन्य कई अधिकारी व सभी आम लोगों के बयान दर्ज करने के लिए नोटिस दिए।
मजिस्ट्रियल जांच में बयान दर्ज कराने के लिए पहली तारीख 28 नवंबर निर्धारित की गई थी, लेकिन कोई अधिकारी अपने बयान दर्ज कराने उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद 30 नवंबर, 3 दिसंबर, 9 दिसंबर और 16 दिसंबर निर्धारित की गई। इन तिथियों में भी अधिकारियों की ओर से बयान दर्ज नहीं कराए। यही हाल आम लोगों का है। किसी न न बयान दिए और न घटना से संबंधित साक्ष्य दिया है। स्थिति यह है कि डीएम ने सात दिन के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए थे। लेकिन, अधिकारियों के बयान नहीं होने के कारण जांच पूरी नहीं हो सकी। अब बयान दर्ज करने के लिए 30 दिसंबर निर्धारित की गई है।
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संभल में 24 नवंबर को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान बवाल के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हुए। मामला संसद और विधानसभा तक में भी गूंजा है। इस बवाल के बाद ही डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे। डिप्टी कलक्टर दीपक चौधरी को जांच अधिकारी नामित किया गया है। लिहाजा, डिप्टी कलक्टर ने बहजोई कलक्ट्रेट परिसर स्थित कार्यालय में बयान दर्ज करने के लिए एसडीएम वंदना मिश्रा, सीओ अनुज चौधरी, नखासा और संभल के थानाध्यक्ष व अन्य कई अधिकारी व सभी आम लोगों के बयान दर्ज करने के लिए नोटिस दिए।
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मजिस्ट्रियल जांच में बयान दर्ज कराने के लिए पहली तारीख 28 नवंबर निर्धारित की गई थी, लेकिन कोई अधिकारी अपने बयान दर्ज कराने उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद 30 नवंबर, 3 दिसंबर, 9 दिसंबर और 16 दिसंबर निर्धारित की गई। इन तिथियों में भी अधिकारियों की ओर से बयान दर्ज नहीं कराए। यही हाल आम लोगों का है। किसी न न बयान दिए और न घटना से संबंधित साक्ष्य दिया है। स्थिति यह है कि डीएम ने सात दिन के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए थे। लेकिन, अधिकारियों के बयान नहीं होने के कारण जांच पूरी नहीं हो सकी। अब बयान दर्ज करने के लिए 30 दिसंबर निर्धारित की गई है।
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