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भगवान शिव और परशुराम ने दी कल्कि को दीक्षा : रामभद्राचार्य
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संभल में श्री कल्कि महोत्सव में कथा प्रवचन करते जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज। संवाद
संभल। ऐंचोड़ा कंबोह में चल रही श्री कल्कि कथा में तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने पांचवें दिन भगवान कल्कि के यज्ञपवीत संस्कार के बाद शिक्षा-दीक्षा की कथा सुनाई। परशुराम भगवान के द्वारा उन्हें महिंद्राचंल पर्वत तक ले जाने और भगवान शिव के द्वारा उन्हें शिक्षा दीक्षा देने के प्रसंग का बखान करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कल्कि महोत्सव के क्रम में आयोजित सात दिवसीय श्री कल्कि कथा में प्रवचन करते हुए स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि भगवान के यज्ञोपवीत संस्कार के बाद भगवान परशुराम पहुंच जाते हैं। भगवान परशुराम उन्हें शिक्षा-दीक्षा देने के लिए महिंद्राचंल पर्वत पर ले गए। बताया कि जीवन में गुरु से हठ नहीं करना चाहिए। महाभारत काल के भीष्म को गुरु से हठ करने की सजा ऐसी मिली कि उन्हें तीरों की शैय्या पर सोना पड़ा।
इसके बाद कर्ण से धोखे से उनसे विद्या सीख ली। एक दिन मैं उनके गोद में सो रहा था तो उसकी समय कर्ण को किसी कीट ने काट लिया। लेकिन उन्होंने कुछ महसूस नहीं किया। बाद में खून निकला तो पूछा। इस पर उन्होंने कहा कि मैं क्षत्रिय हूं। इतना सुनते ही भगवान परशुराम ने कर्ण को श्राप दिया कि तुमने यह विद्या छल से सीखी है, इसलिए यह विद्या युद्ध के समय क्षीण हो जाएगी। संदेश दिया कि गुरु से हठ नहीं करना चाहिए।
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महाराज ने खुद का जिक्र किया और बोले कि अंधा होने के बावजूद गुरुकृपा से ही मैं इतना कुछ कह पाता हूं। जीवन में यदि कुछ पाना है तो गुरु से बैर नहीं करनी चाहिए। भगवान कल्कि को सीख देते हुए कहा कि मैं तुम्हारा गुरु हूं। चलो कैलाश धाम चलते हैं। इसके बाद वह भगवान कल्कि को लेकर कैलाश धाम चले गए। जहां शिव जी मिले। शिव भगवान परशुराम के गुरु हैं। उन्होंने यह परिचय भगवान को कराया।
रामभद्राचार्य महाराज ने इसके बाद शिव जी और कल्कि संवाद के कथा सुनाई। बताया कि शिव जी ने भगवान कल्कि को एक घोड़ा, तोता और तलवार दी। तीनों चीजें देकर तीनों का वृतांत्त सुनाया। बताया कि वह खुद बैल की सवारी करते हैं लेकिन तुम कलियुग के राजा हो तो घोड़े की सवारी करो। तोता तुम्हारे साथ रहेगा, जो हर तरह से मदद करेगा। तलवार इसलिए कि पृथ्वी पर पापियों का भार अधिक है तो इसे कम करने के लिए तलवार की जरूरत पड़ेगी। साथ ही कई वरदान दिए। बताया कि भगवान कल्कि तुम कभी वृद्ध नहीं होगे और कभी मरोगे नहीं। तुम ईश्वर हो। तुम्हें भूख और प्यास नहीं लगेगी।
इस तरह के सत्य संकल्प की कथा सुनाकर पांचवें दिन की कथा पर विराम लगाया। अंत में आरती की गई। भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान प्रदेश सरकार में पर्यटन संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग श्याम वीर सिंह सैनी, विधान परिषद के सदस्य सत्यपाल सिंह सैनी, भाजपा जिलाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, ह्देश यादव, अंकुर पाल, कुलदीप चाहल, प्रवेश देवी, खिलेंद्र चाहल आदि रहे।
जिसे भारत में रहना है, उसे वंदेमातरम कहना होगा : रामभद्राचार्य महाराज
संभल। ऐंचोड़ा कंबोह में आयोजित श्री कल्कि कथा में प्रवचन के दौरान तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य ने कहा कि जिसे भारत में रहना है, उसे वंदे मातरम कहना होगा। गंगा यमुना को मानना पड़ेगा। उन्होंने बाबर का जिक्र करते हुए कहा बाबर आक्रांता रहा है, उसके नाम से अब देश में कुछ नहीं बनेगा। हम बनने भी नहीं देंगे। संवाद
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कल्कि महोत्सव के क्रम में आयोजित सात दिवसीय श्री कल्कि कथा में प्रवचन करते हुए स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि भगवान के यज्ञोपवीत संस्कार के बाद भगवान परशुराम पहुंच जाते हैं। भगवान परशुराम उन्हें शिक्षा-दीक्षा देने के लिए महिंद्राचंल पर्वत पर ले गए। बताया कि जीवन में गुरु से हठ नहीं करना चाहिए। महाभारत काल के भीष्म को गुरु से हठ करने की सजा ऐसी मिली कि उन्हें तीरों की शैय्या पर सोना पड़ा।
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इसके बाद कर्ण से धोखे से उनसे विद्या सीख ली। एक दिन मैं उनके गोद में सो रहा था तो उसकी समय कर्ण को किसी कीट ने काट लिया। लेकिन उन्होंने कुछ महसूस नहीं किया। बाद में खून निकला तो पूछा। इस पर उन्होंने कहा कि मैं क्षत्रिय हूं। इतना सुनते ही भगवान परशुराम ने कर्ण को श्राप दिया कि तुमने यह विद्या छल से सीखी है, इसलिए यह विद्या युद्ध के समय क्षीण हो जाएगी। संदेश दिया कि गुरु से हठ नहीं करना चाहिए।
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महाराज ने खुद का जिक्र किया और बोले कि अंधा होने के बावजूद गुरुकृपा से ही मैं इतना कुछ कह पाता हूं। जीवन में यदि कुछ पाना है तो गुरु से बैर नहीं करनी चाहिए। भगवान कल्कि को सीख देते हुए कहा कि मैं तुम्हारा गुरु हूं। चलो कैलाश धाम चलते हैं। इसके बाद वह भगवान कल्कि को लेकर कैलाश धाम चले गए। जहां शिव जी मिले। शिव भगवान परशुराम के गुरु हैं। उन्होंने यह परिचय भगवान को कराया।
रामभद्राचार्य महाराज ने इसके बाद शिव जी और कल्कि संवाद के कथा सुनाई। बताया कि शिव जी ने भगवान कल्कि को एक घोड़ा, तोता और तलवार दी। तीनों चीजें देकर तीनों का वृतांत्त सुनाया। बताया कि वह खुद बैल की सवारी करते हैं लेकिन तुम कलियुग के राजा हो तो घोड़े की सवारी करो। तोता तुम्हारे साथ रहेगा, जो हर तरह से मदद करेगा। तलवार इसलिए कि पृथ्वी पर पापियों का भार अधिक है तो इसे कम करने के लिए तलवार की जरूरत पड़ेगी। साथ ही कई वरदान दिए। बताया कि भगवान कल्कि तुम कभी वृद्ध नहीं होगे और कभी मरोगे नहीं। तुम ईश्वर हो। तुम्हें भूख और प्यास नहीं लगेगी।
इस तरह के सत्य संकल्प की कथा सुनाकर पांचवें दिन की कथा पर विराम लगाया। अंत में आरती की गई। भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान प्रदेश सरकार में पर्यटन संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग श्याम वीर सिंह सैनी, विधान परिषद के सदस्य सत्यपाल सिंह सैनी, भाजपा जिलाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, ह्देश यादव, अंकुर पाल, कुलदीप चाहल, प्रवेश देवी, खिलेंद्र चाहल आदि रहे।
जिसे भारत में रहना है, उसे वंदेमातरम कहना होगा : रामभद्राचार्य महाराज
संभल। ऐंचोड़ा कंबोह में आयोजित श्री कल्कि कथा में प्रवचन के दौरान तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य ने कहा कि जिसे भारत में रहना है, उसे वंदे मातरम कहना होगा। गंगा यमुना को मानना पड़ेगा। उन्होंने बाबर का जिक्र करते हुए कहा बाबर आक्रांता रहा है, उसके नाम से अब देश में कुछ नहीं बनेगा। हम बनने भी नहीं देंगे। संवाद

संभल में श्री कल्कि महोत्सव में कथा प्रवचन करते जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज। संवाद