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कुरान के कानून में कयामत तक नहीं हो सकता बदलाव : मदनी
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Sun, 06 Nov 2016 01:34 AM IST
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महमूद असद मदनी
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उन्होंने कहा कि मुल्क के मुसलमान हमेशा दहशतगर्दी के खिलाफ रहे हैं। मुल्क के जो हालत बन रहे हैं मुसलमानों को उससे मायूस होने की जरूरत नहीं है। बल्कि सबसे पहले हम आपसी इख्तिलाफ खत्म करें।
नगर के मोहल्ला काजीपुरा स्थित जमा मस्जिद में जमीयत उलमा-ए-हिंद की जानिब से हुए जलसे में काफी तादाद में लोगों ने शिरकत की। मौलाना सैयद असद मदनी ने कहा की मुल्क के मुसलमानों को सरकार सेे कोई मदद नहीं बल्कि इंसाफ चाहिए। अगर कॉमन सिविल कोड लागू किया तो उसका शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया जाएगा। कुरान के कानून में कयामत तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 12 और 13 नवंबर को अजमेर शरीफ में जमीयत का 33 वां राष्ट्रीय अधिवेशन होगा। उन्होंने सभी मसलक के मानने वालों से इसमें शामिल होने की अपील की।
जुमे की नमाज के बाद फूटा गुस्सा, शरीयत में दखल बर्दाश्त नहीं
तीन तलाक और कॉमन सिविल कोड के मुद्दे पर केंद्र सरकार का विरोध मुखर हो गया है। सिरसी में शुक्रवार को मौलानाओं के साथ तमाम मुसलमान सड़क पर उतर आए। जुलूस निकालते हुए सिरसी पुलिस चौकी पहुंचे। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम के प्रतिनिधि को सौंपा गया। केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक पर दिए हलफनामे को वापस लेने की मांग की।
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मुफ्ती-ए-आजम सिरसी मोहम्मद आलम रजा खां नूरी की पहल पर जुलूस का आयोजन किया गया। जुमे की नमाज के बाद जामा मस्जिद से शुरू होकर जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए सिरसी पुलिस चौकी पर पहुंचा। जहां पर सड़क के किनारे एक जलसे का आयोजन किया गया। जलसे को संबोधित करते हुए कारी अब्दुल शकूर ने कहा कि मुस्लिम समाज के तलाक संबंधी मामलों को शरीयत के अनुसार ही निपटाया जाता है लेकिन केंद्र सरकार शरीयत के नियमों में बदलाव व हस्तक्षेप करना चाहती है।
जामा मस्जिद के इमाम मोहम्मद रफी ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक भारतीय को अपने-अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। एक विशेष विचारधारा के लोग इसका विरोध कर रहे हैं वे भारत की इस गंगा-जमुनी तहजीब को खत्म कर समाज में नफरत का जहर घोलने की नापाक कोशिश कर रहे हैं। हाफिज व कारी अली हुसैन अशरफी ने कहा कि तीन तलाक के मामले में अगर सरकार ने दखलअंदाजी की तो मुस्लिम समाज के लोग आंदोलन तेज करेंगे। डा. शाकिर हुसैन इस्लाही ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के उत्पीड़न की बात कही जा रही है। जो गलत है। मुस्लिम महिलाएं महफूज हैं।
इस्लाम में उन्हें पूरी सुरक्षा दी गई है। इसके बाद प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा। कारी शहजाद आलम, कारी मोहम्मद हुसैन, कारी इफ्तेखार, हाफिज गुलाम नबी, हाफिज हमजा अली रियासत खां, डा. शाहिद हुसैन सैफी, मोहम्मद सादिक आदि रहे।
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नगर के मोहल्ला काजीपुरा स्थित जमा मस्जिद में जमीयत उलमा-ए-हिंद की जानिब से हुए जलसे में काफी तादाद में लोगों ने शिरकत की। मौलाना सैयद असद मदनी ने कहा की मुल्क के मुसलमानों को सरकार सेे कोई मदद नहीं बल्कि इंसाफ चाहिए। अगर कॉमन सिविल कोड लागू किया तो उसका शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया जाएगा। कुरान के कानून में कयामत तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 12 और 13 नवंबर को अजमेर शरीफ में जमीयत का 33 वां राष्ट्रीय अधिवेशन होगा। उन्होंने सभी मसलक के मानने वालों से इसमें शामिल होने की अपील की।
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जुमे की नमाज के बाद फूटा गुस्सा, शरीयत में दखल बर्दाश्त नहीं
तीन तलाक और कॉमन सिविल कोड के मुद्दे पर केंद्र सरकार का विरोध मुखर हो गया है। सिरसी में शुक्रवार को मौलानाओं के साथ तमाम मुसलमान सड़क पर उतर आए। जुलूस निकालते हुए सिरसी पुलिस चौकी पहुंचे। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम के प्रतिनिधि को सौंपा गया। केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक पर दिए हलफनामे को वापस लेने की मांग की।
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मुफ्ती-ए-आजम सिरसी मोहम्मद आलम रजा खां नूरी की पहल पर जुलूस का आयोजन किया गया। जुमे की नमाज के बाद जामा मस्जिद से शुरू होकर जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए सिरसी पुलिस चौकी पर पहुंचा। जहां पर सड़क के किनारे एक जलसे का आयोजन किया गया। जलसे को संबोधित करते हुए कारी अब्दुल शकूर ने कहा कि मुस्लिम समाज के तलाक संबंधी मामलों को शरीयत के अनुसार ही निपटाया जाता है लेकिन केंद्र सरकार शरीयत के नियमों में बदलाव व हस्तक्षेप करना चाहती है।
जामा मस्जिद के इमाम मोहम्मद रफी ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक भारतीय को अपने-अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। एक विशेष विचारधारा के लोग इसका विरोध कर रहे हैं वे भारत की इस गंगा-जमुनी तहजीब को खत्म कर समाज में नफरत का जहर घोलने की नापाक कोशिश कर रहे हैं। हाफिज व कारी अली हुसैन अशरफी ने कहा कि तीन तलाक के मामले में अगर सरकार ने दखलअंदाजी की तो मुस्लिम समाज के लोग आंदोलन तेज करेंगे। डा. शाकिर हुसैन इस्लाही ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के उत्पीड़न की बात कही जा रही है। जो गलत है। मुस्लिम महिलाएं महफूज हैं।
इस्लाम में उन्हें पूरी सुरक्षा दी गई है। इसके बाद प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा। कारी शहजाद आलम, कारी मोहम्मद हुसैन, कारी इफ्तेखार, हाफिज गुलाम नबी, हाफिज हमजा अली रियासत खां, डा. शाहिद हुसैन सैफी, मोहम्मद सादिक आदि रहे।