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राम कथा वर्णन के साथ कल्कि महोत्सव संपन्न
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संभल के कल्कि महोत्सव के समापन पर बोलते कवि डा. कुमार विश्वास।
- फोटो : SAMBHAL
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संभल। श्री कल्कि महोत्सव के मंच पर मंगलवार को शाम कवि कुमार विश्वास ने राम चरित की व्याख्या की। अपने अनुभव सुनाए और जय श्रीराम के नाम पर हिंसा करने वालों को आड़े हाथ लिया। बगैर किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बगैर उन्होंने चुटीले व्यंग्य किए और राम की मर्यादा को आचरण में लाने की सीख दी। उन्होंने यह भी कहा कि सबके राम अलग-अलग हैं। उनके राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं जबकि कुछ लोगों के राम ऐसे हैं जो जय श्री राम के नारे के साथ किसी दूसरे पर हमलावर हो जाते हैं।
श्री कल्कि महोत्सव के समापन अवसर पर पहुंचे कवि डा. कुमार विश्वास ने कुछ देर तक राम कथा का श्रवण किया।
इसके बाद कहा कि उनके राम तो करुणानिधि हैं। उनके राम वह हैं जिन्होंने शबरी के जूठे बेर खाए लेकिन आज कुछ लोग ऐसे हैं, जो जोमेटो से सावन के महीने में भोजन मंगाते हैं और दूसरे संप्रदाय के व्यक्ति द्वारा भोजन लाने पर उसे लौटा देते हैं। ऐसे लोग राम के भक्त नहीं हो सकते हैं। उन्होंने जय श्री राम का नारा लगाकर आवाज बुलंद करने वालों का जिक्र करते हुए कहा कि बात 1992 की है जब वह भीलवाड़ा के कवि सम्मेलन में थे। एक कवि ने जय श्री राम के नारे के साथ उनसे भुजाएं उठाकर उद् घोष का आग्रह किया पर उन्होंने ऐसा नहीं किया।
राम के चरित्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राम ने बहुत से राज्य जीते लेकिन अपना साम्राज्य नहीं बढ़ाया बल्कि जहां का राज्य जीता वहीं के लोगों को वह राज्य समर्पित कर दिया। उसी राज्य के किसी व्यक्ति का राजतिलक किया और वह भी बड़े संकोच के साथ। इसमें सुग्रीव और विभीषण का उदाहरण सबके सामने रखते हुए उन्होंने कहा कि रावण से हुए युद्ध में राजाओं का नहीं बल्कि आदिवासियों और पिछडों का सहयोग लिया।
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राम ने उन्हें ताकत दी जिनका कोई नहीं था। राजा दुष्यंत के शासनकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जंगल में रहने वाली एक महिला अयोध्या में राजा से मिलने आधी रात के बाद गई और साधारण द्वारपाल से उसने पूछा कि क्या वह इस समय राजा से मिल सकती है।
द्वारपाल ने कहा- राजा से मिलना आपका अधिकार है। किसी भी समय मिल सकते हैं। इस उल्लेख के साथ उन्होंने कहा कि क्या आज के लोकतंत्र में ऐसा है। सांसद से भी मिलना हो तो हो उसके चिंटुओं से पूछे बिना नहीं मिल सकते। उन्होंने कहा कि राम असली समाजवादी थे। जिन्होंने अंत्योदय के लिए काम किया।
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श्री कल्कि महोत्सव के समापन अवसर पर पहुंचे कवि डा. कुमार विश्वास ने कुछ देर तक राम कथा का श्रवण किया।
इसके बाद कहा कि उनके राम तो करुणानिधि हैं। उनके राम वह हैं जिन्होंने शबरी के जूठे बेर खाए लेकिन आज कुछ लोग ऐसे हैं, जो जोमेटो से सावन के महीने में भोजन मंगाते हैं और दूसरे संप्रदाय के व्यक्ति द्वारा भोजन लाने पर उसे लौटा देते हैं। ऐसे लोग राम के भक्त नहीं हो सकते हैं। उन्होंने जय श्री राम का नारा लगाकर आवाज बुलंद करने वालों का जिक्र करते हुए कहा कि बात 1992 की है जब वह भीलवाड़ा के कवि सम्मेलन में थे। एक कवि ने जय श्री राम के नारे के साथ उनसे भुजाएं उठाकर उद् घोष का आग्रह किया पर उन्होंने ऐसा नहीं किया।
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राम के चरित्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राम ने बहुत से राज्य जीते लेकिन अपना साम्राज्य नहीं बढ़ाया बल्कि जहां का राज्य जीता वहीं के लोगों को वह राज्य समर्पित कर दिया। उसी राज्य के किसी व्यक्ति का राजतिलक किया और वह भी बड़े संकोच के साथ। इसमें सुग्रीव और विभीषण का उदाहरण सबके सामने रखते हुए उन्होंने कहा कि रावण से हुए युद्ध में राजाओं का नहीं बल्कि आदिवासियों और पिछडों का सहयोग लिया।
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राम ने उन्हें ताकत दी जिनका कोई नहीं था। राजा दुष्यंत के शासनकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जंगल में रहने वाली एक महिला अयोध्या में राजा से मिलने आधी रात के बाद गई और साधारण द्वारपाल से उसने पूछा कि क्या वह इस समय राजा से मिल सकती है।
द्वारपाल ने कहा- राजा से मिलना आपका अधिकार है। किसी भी समय मिल सकते हैं। इस उल्लेख के साथ उन्होंने कहा कि क्या आज के लोकतंत्र में ऐसा है। सांसद से भी मिलना हो तो हो उसके चिंटुओं से पूछे बिना नहीं मिल सकते। उन्होंने कहा कि राम असली समाजवादी थे। जिन्होंने अंत्योदय के लिए काम किया।