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कम वोटिंग से खुली बागियों के ‘ताकत’ की पोल
संभ्ाल/अमर उजाला ब्यूराे
Updated Mon, 20 Feb 2017 02:02 AM IST
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पंजाब
- फोटो : self
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यह बागी अपने गढ़ में ही मतदाताओं को रिझाने में कामयाब नहीं हो सके। इनके मतदान केंद्रों पर अन्य बूथों के मुकाबले कम ही मतदाता पहुंचे। अधिकांश बागी प्रत्याशियों के मतदान केंद्र पर मतदान प्रतिशत 65 से अधिक नहीं पहुंच पाया। कुछ के तो मतदान केंद्रों पर 60 प्रतिशत का आंकड़ा भी पार नहीं हो सका।
कुछ प्रत्याशी बड़े राजनीतिक दलों से टिकिट मांग रहे थे। प्रमुख पार्टी से टिकट के चक्कर में उन्होंने कई बार दिल्ली और लखनऊ के चक्कर लगाकर पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से भी काफी मुलाकात की लेकिन उसके बाद भी टिकट मिलने से आहत बागियों ने पार्टी को चुनौती ही दे डाली। कुछ छोटे दलों से टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतर गए तो कुछ ने निर्दलीय ही चुनाव में एंट्री कर अपनी ही पुरानी पार्टियों के खिलाफ ताल-ठोंक दी।
चुनाव प्रचार के दौरान क्षेत्र से मेहनत से चुनाव लड़ा और सभाओं के साथ-साथ लोगों के घर-घर जाकर वोट देने की अपील की लेकिन बागी अपने गढ़ को ही सुरक्षित रखने में नाकाम साबित हुए। क्योंकि बागियों के गढ़ में मतदान प्रतिशत अन्य मतदान केंद्रों के मुकाबले बेहद ही कम रह गया।
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कुछ प्रत्याशी बड़े राजनीतिक दलों से टिकिट मांग रहे थे। प्रमुख पार्टी से टिकट के चक्कर में उन्होंने कई बार दिल्ली और लखनऊ के चक्कर लगाकर पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से भी काफी मुलाकात की लेकिन उसके बाद भी टिकट मिलने से आहत बागियों ने पार्टी को चुनौती ही दे डाली। कुछ छोटे दलों से टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतर गए तो कुछ ने निर्दलीय ही चुनाव में एंट्री कर अपनी ही पुरानी पार्टियों के खिलाफ ताल-ठोंक दी।
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चुनाव प्रचार के दौरान क्षेत्र से मेहनत से चुनाव लड़ा और सभाओं के साथ-साथ लोगों के घर-घर जाकर वोट देने की अपील की लेकिन बागी अपने गढ़ को ही सुरक्षित रखने में नाकाम साबित हुए। क्योंकि बागियों के गढ़ में मतदान प्रतिशत अन्य मतदान केंद्रों के मुकाबले बेहद ही कम रह गया।
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