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Sambhal News: शिव मंदिर के परिक्रमा स्थल पर भी अवैध कब्जा

Thu, 19 Dec 2024 01:04 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Thu, 19 Dec 2024 01:04 AM IST
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Illegal occupation of parikrama site of Shiv temple also
संभल में 1978 के दंगे की जानकारी देते अनिल रस्तोगी। संवाद - फोटो : संभल
संभल। नगर के मोहल्ला खग्गू सराय में 46 साल से बंद प्राचीन शिव मंदिर की नींव रखने वाले रस्तोगी परिवार के लोगों ने प्राचीन शिव मंदिर के परिक्रमा स्थल पर भी अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। बुधवार को मंदिर में पूजा करने पहुंचे रस्तोगी परिवार के लोगों ने कहा कि पलायन के दौरान हमारे बुजुर्गाें को डराकर जमीनें छीनी गई थीं। कहा कि मंदिर के चारों तरफ परिक्रमा स्थल पर लोगों ने कब्जा कर लिया है।
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1978 में दंगे के दौरान रस्तोगी समाज के लोग खग्गू सराय से पलायन कर गए। कोई परिवार संभल में ही हिंदू बहुल इलाके में बस गया तो कोई मुरादाबाद या फिर अन्य शहर में जाकर बस गया। 29 मार्च 1978 को जन्मे सुमित कुमार रस्तोगी बताते हैं कि उनके पिता दिवंगत सुभाष चंद रस्तोगी कारोबारी थे। उनका चीनी का प्लांट हुआ करता था। मंदिर के पीछे मकान है। एक मकान का आज तक बैनामा नहीं हुआ है, इस मकान का अधिकांश मटेरियल चोरी हो गया है। लेकिन 1978 के दंगे के बाद उन्हें खग्गू सराय छोड़कर जाना पड़ा।
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उन्होंने कहा कि जिस कुएं को पाटकर अवैध निर्माण किया गया था, यहां शादी के दौरान पूजा होती थी। बच्चों के नामकरण के दौरान कुआं पूजन होते थे। अब फिर मंदिर खुला है तो पूजा भी करेंगे। लेकिन डर भी है। आज पुलिस की सुरक्षा है, अगर पुलिस हटी तो पूजा कैसे होगी। दूसरे वर्ग के लोग पहले जैसा रवैया अपनाएंगे। आज भाजपा की सरकार है तो हम खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। किसी अन्य दल की सरकार बनती है तो हालात बिगड़ने की आशंका है। जिस रस्तोगी समाज के लोगों ने 46 साल पहले दंगा देखा वह कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। लेकिन, समाज के युवा सामने आए हैं। दंगे से दहशत में आए इसलिए छोड़ा मोहल्ला और वीरान हो गया था मंदिर : नगर हिंदू महासभा के संरक्षक विष्णु शरण रस्तोगी का कहना है कि शहर दंगों की आग में कई बार जला है लेकिन जो दंगा 1978 में हुआ उसके जख्म अभी भी हरे हैं। क्योंकि जिसने वह दंगा आंखों से देखा है, वह कभी नहीं भूल सकता है। दंगे में हिंदू समाज के काफी लोग मारे गए थे। कारोबार भी हिंदू समाज के लोगों के ही खत्म हुए। दंगे के दौरान पहले लूट की गई और बाद में आग लगा दी। इसलिए खग्गू सराय में रहने वाले सभी हिंदू परिवारों में दहशत बैठ गई थी। जिसके चलते कई परिवारों ने तो संभल ही छोड़ दिया और दिल्ली व मुरादाबाद जाकर बस गए। उस दंगे ने पलायन करने के लिए मजबूर किया। इसके बाद से मंदिर वीरान हो गया था। अब भगवान शिव की कृपा हुई है।
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