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Sambhal News: सेवा प्रदाता से संतुष्ट नहीं हैं तो तुरंत फोरम का रुख करें
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संभल। अगर आप अपने किसी भी सेवा प्रदाता से संतुष्ट नहीं हैं तो उपभोक्ता फोरम का रुख कर सकते हैं। फोरम में आप की बात सुनी जाएगी और न्याय भी मिलेगा। इसके लिए जरूरी है कि आप उत्पाद या सेवा के बिल, रसीद और जरूरी कागजात अपने पास जरूर रखें।
यूं ताे उपभोक्ताओं की समस्याओं के निदान के लिए उपभोक्ता फोरम के अतिरिक्त स्थायी लोक अदालत, विद्युत व्यथा निवारण फोरम जैसे तंत्र मौजूद हैं। संपूर्ण समाधान दिवस, थाना दिवस, विभागीय उपभोक्ता निदान पटल के माध्यम से उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान की बात कही जाती हो, लेकिन इसके बावजूद बढ़ती शिकायतों के बोझ ने सिद्ध कर दिया है कि उपभोक्ता व्यथित है। यही कारण है कि सरकार ने इस वर्ष विश्व उपभोक्ता दिवस की थीम ''''सुरक्षित उत्पाद, आश्वस्त उपभोक्ता'''' तय की है, जिसका उद्देश्य स्थिरता का समर्थन करने वाली निष्पक्ष और जिम्मेदार उपभोक्ता प्रथाओं को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। विश्व उपभोक्ता दिवस पर उपभोक्ता संरक्षण कानून के जानकारों ने कहा कि उपभोक्ता अधिनियम सेवा प्रदाताओं को उचित सेवा देने के आदेश करता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत वाद दायर किए जाते हैं और तीन से चार माह के अंतर्गत फैसला भी आ जाता है।
अधिवक्ता लव मोहन वार्ष्णेय के मुताबिक, अधिनियम के मुताबिक, वह कोई भी व्यक्ति जो सेवा लेता है, उपभोक्ता माना जाता है। चिकित्सक की फीस, शिक्षण संस्थानों में पंजीकरण शुल्क और उनमें दी जाने वाली सुविधाएं, कंपनियों, दुकानदारों की सेवाओं, उत्पादों से संतुष्ट न होने पर उपभोक्ता फोरम में चुनौती दी जा सकती है।
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उपभोक्तआ के अधिकारों की रक्षा के लिए है कानून
भारत में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण कानून 1986 में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनकी खरीदारी से जुड़े धोखाधड़ी, अत्यधिक कीमतें, और गलत जानकारी से बचाना है। 2019 में, इस कानून में उपभोक्ता संरक्षण (संशोधन) विधेयक को लागू किया गया, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर सुरक्षा और अधिकार प्राप्त हुए। अब उपभोक्ताओं के पास अपने अधिकारों का उल्लंघन करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार है। संवाद
उपभोक्ताओं को सुरक्षा, सूचना, चयन, प्रतिनिधित्व, शिक्षा का अधिकार प्राप्त है, लेकिन ज्ञान के अभाव में उपभोक्ता इन अधिकारों से वंचित हैं। अपने हक की रक्षा के लिए उपभोक्ताओं को सेवाओं और उत्पादों का ध्यान से चयन करें। बिल और रसीद रखने की जरूरत है। उत्पाद सुरक्षित हो, इसकी जिम्मेदारी को सरकारें सुनिश्चित कराएं।
-जयंत चाहल, कानूनविद्
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केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में नया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लाकर उपभोक्ताओं की शक्तियों को बढ़ाने का प्रयास किया लेकिन केंद्र के प्रयास जमीनी हकीकत नहीं बन पाए। नियुक्तियों में देरी, जवाबदेही का अभाव, समय पर न्याय न मिलने, उपभोक्ता मामलों में प्रशासनिक उदासीनता, मंडल स्तर पर राज्य आयोग की सर्किट बेंच की मांग ठंडे बस्ते डालने के कारण उपभोक्ताओं को वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। साक्षरता की तर्ज पर उपभोक्ता आंदोलन को मजबूत किया जाए और जिला उपभोक्ता परिषदों का तत्काल गठन हो।
देवेंद्र वार्ष्णेय, उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता
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यूं ताे उपभोक्ताओं की समस्याओं के निदान के लिए उपभोक्ता फोरम के अतिरिक्त स्थायी लोक अदालत, विद्युत व्यथा निवारण फोरम जैसे तंत्र मौजूद हैं। संपूर्ण समाधान दिवस, थाना दिवस, विभागीय उपभोक्ता निदान पटल के माध्यम से उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान की बात कही जाती हो, लेकिन इसके बावजूद बढ़ती शिकायतों के बोझ ने सिद्ध कर दिया है कि उपभोक्ता व्यथित है। यही कारण है कि सरकार ने इस वर्ष विश्व उपभोक्ता दिवस की थीम ''''सुरक्षित उत्पाद, आश्वस्त उपभोक्ता'''' तय की है, जिसका उद्देश्य स्थिरता का समर्थन करने वाली निष्पक्ष और जिम्मेदार उपभोक्ता प्रथाओं को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। विश्व उपभोक्ता दिवस पर उपभोक्ता संरक्षण कानून के जानकारों ने कहा कि उपभोक्ता अधिनियम सेवा प्रदाताओं को उचित सेवा देने के आदेश करता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत वाद दायर किए जाते हैं और तीन से चार माह के अंतर्गत फैसला भी आ जाता है।
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अधिवक्ता लव मोहन वार्ष्णेय के मुताबिक, अधिनियम के मुताबिक, वह कोई भी व्यक्ति जो सेवा लेता है, उपभोक्ता माना जाता है। चिकित्सक की फीस, शिक्षण संस्थानों में पंजीकरण शुल्क और उनमें दी जाने वाली सुविधाएं, कंपनियों, दुकानदारों की सेवाओं, उत्पादों से संतुष्ट न होने पर उपभोक्ता फोरम में चुनौती दी जा सकती है।
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उपभोक्तआ के अधिकारों की रक्षा के लिए है कानून
भारत में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण कानून 1986 में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनकी खरीदारी से जुड़े धोखाधड़ी, अत्यधिक कीमतें, और गलत जानकारी से बचाना है। 2019 में, इस कानून में उपभोक्ता संरक्षण (संशोधन) विधेयक को लागू किया गया, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर सुरक्षा और अधिकार प्राप्त हुए। अब उपभोक्ताओं के पास अपने अधिकारों का उल्लंघन करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार है। संवाद
उपभोक्ताओं को सुरक्षा, सूचना, चयन, प्रतिनिधित्व, शिक्षा का अधिकार प्राप्त है, लेकिन ज्ञान के अभाव में उपभोक्ता इन अधिकारों से वंचित हैं। अपने हक की रक्षा के लिए उपभोक्ताओं को सेवाओं और उत्पादों का ध्यान से चयन करें। बिल और रसीद रखने की जरूरत है। उत्पाद सुरक्षित हो, इसकी जिम्मेदारी को सरकारें सुनिश्चित कराएं।
-जयंत चाहल, कानूनविद्
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केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में नया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लाकर उपभोक्ताओं की शक्तियों को बढ़ाने का प्रयास किया लेकिन केंद्र के प्रयास जमीनी हकीकत नहीं बन पाए। नियुक्तियों में देरी, जवाबदेही का अभाव, समय पर न्याय न मिलने, उपभोक्ता मामलों में प्रशासनिक उदासीनता, मंडल स्तर पर राज्य आयोग की सर्किट बेंच की मांग ठंडे बस्ते डालने के कारण उपभोक्ताओं को वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। साक्षरता की तर्ज पर उपभोक्ता आंदोलन को मजबूत किया जाए और जिला उपभोक्ता परिषदों का तत्काल गठन हो।
देवेंद्र वार्ष्णेय, उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता