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Sambhal News: मैं आग छोड़कर चंदन वन के गीत नहीं गाने वाला...
Thu, 11 Sep 2025 02:15 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Thu, 11 Sep 2025 02:15 AM IST
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चंदौसी के भूपाल रंगमंच पर आयोजित कवि सम्मेलन में कविता सुनाते कवि और मंचासीन कवि। संवाद
चंदौसी (संभल)। मौका था गणेश मेला ग्राउंड स्थित भूपाल रंगमंच पर बुधवार की रात कवि सम्मेलन का। जब देश के सुविख्यात कवि डॉ. हरिओम पंवार ने अपनी कविता से हर किसी को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट में सभी शोर दब गए। दूसरी ओर कवयित्री शिखा, दीप्ति दीक्षित, मीनाक्षी, कवि दिनेश ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को सराबोर किया तो हरदोई से आए हास्य कवि अजीत शुक्ल ने अपने हास्य कविताओं से हंसा-हंसाकर कर लोटपोट कर दिया।
बुधवार की रात भूपाल रंगमंच पर मेरठ से आए कवि डॉ. हरिओम पंवार ने मैं पायल रोली कंगन के गीत नहीं गाने वाला, आग छोड़कर चंदन वन के गीत नहीं गाने वाला, मैं उगते सूरज की लाली गाने वाला चारण हूं। कविता सुनाकर श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। गाजियाबाद की कवयित्री शिखा दीप्ति दीक्षित ने रूह को तार-तार मत करना बेवजह ऐतबार मत करना कविता की प्रस्तुति देकर वाहवाही लूटी।
मेरठ के कवि डॉ. शुभम त्यागी ने हो तपस्या सफल मांगते ही रहे दृग प्रतीक्षित रहे ताकते ही रहे कविता सुनाई।
दिल्ली की शृंगार रस की कवयित्री मीनाक्षी दिनेश कुमार ने सब कहते मुझको दूजे घर जाना है उसका घर ही मेरा नया ठिकाना है सुनाकर भाव विभोर कर दिया। मध्यप्रदेश के जबलपुर से आए हास्य कवि सुदीप भोला ने टमाटर टमाटर कहां है टमाटर जिधर देखिये है उधर एक ही स्वर, टमाटर टमाटर कहां है टमाटर व्यंग सुनाकर खूब गुदगुदाया।
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कवि डॉ. सौरभ कांत शर्मा ने समय तराजू तोल रहा है, इतिहास के पन्ने खोल रहा है सत्य सनातन की आंखों में काशी मथुरा डोल रहा है सुनाया। कवयित्री डॉ. दुर्गा टंडन ने चेतना को जगा दो समर शेष है अब अधर में खड़ा यह मेरा देश है कविता सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर मेले के मुख्य सचिव हरिगोपाल वार्ष्णेय, ललित किशोर गुप्ता, सुधीर गुप्ता, रविंद्र कुमार रूपी, मनोज गुप्ता मीनू, डॉ. राजीव गुप्ता, विनय सर्राफ, लोकेंद्र शर्मा, प्रजीत कुमार लालू, मेजर शशिकांत गुप्ता, सतेंद्र मामा, मुकेश ब्रेड, प्रफुल्ल कुमार, राहुल चौधरी, संजय गुप्ता, शुभम अग्रवाल, आशुतोष वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।
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बुधवार की रात भूपाल रंगमंच पर मेरठ से आए कवि डॉ. हरिओम पंवार ने मैं पायल रोली कंगन के गीत नहीं गाने वाला, आग छोड़कर चंदन वन के गीत नहीं गाने वाला, मैं उगते सूरज की लाली गाने वाला चारण हूं। कविता सुनाकर श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। गाजियाबाद की कवयित्री शिखा दीप्ति दीक्षित ने रूह को तार-तार मत करना बेवजह ऐतबार मत करना कविता की प्रस्तुति देकर वाहवाही लूटी।
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मेरठ के कवि डॉ. शुभम त्यागी ने हो तपस्या सफल मांगते ही रहे दृग प्रतीक्षित रहे ताकते ही रहे कविता सुनाई।
दिल्ली की शृंगार रस की कवयित्री मीनाक्षी दिनेश कुमार ने सब कहते मुझको दूजे घर जाना है उसका घर ही मेरा नया ठिकाना है सुनाकर भाव विभोर कर दिया। मध्यप्रदेश के जबलपुर से आए हास्य कवि सुदीप भोला ने टमाटर टमाटर कहां है टमाटर जिधर देखिये है उधर एक ही स्वर, टमाटर टमाटर कहां है टमाटर व्यंग सुनाकर खूब गुदगुदाया।
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कवि डॉ. सौरभ कांत शर्मा ने समय तराजू तोल रहा है, इतिहास के पन्ने खोल रहा है सत्य सनातन की आंखों में काशी मथुरा डोल रहा है सुनाया। कवयित्री डॉ. दुर्गा टंडन ने चेतना को जगा दो समर शेष है अब अधर में खड़ा यह मेरा देश है कविता सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर मेले के मुख्य सचिव हरिगोपाल वार्ष्णेय, ललित किशोर गुप्ता, सुधीर गुप्ता, रविंद्र कुमार रूपी, मनोज गुप्ता मीनू, डॉ. राजीव गुप्ता, विनय सर्राफ, लोकेंद्र शर्मा, प्रजीत कुमार लालू, मेजर शशिकांत गुप्ता, सतेंद्र मामा, मुकेश ब्रेड, प्रफुल्ल कुमार, राहुल चौधरी, संजय गुप्ता, शुभम अग्रवाल, आशुतोष वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।