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ईरान के संकट से संभल के हस्तशिल्प निर्यात को झटका
ब्यूरो अमर उजाला / संभ्ाल
Updated Mon, 14 May 2018 01:04 AM IST
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संभल के सरायतरीन में बने हस्तशिल्प उत्पाद।
- फोटो : अमर उजाला
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परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की असहमति के बाद ईरानी अर्थ व्यवस्था प्रभावित हो गई है। ईरान की मुद्रा का अवमूल्यन हो गया है। इसके चलते भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात को झटका लगा है। संभल और सरायतरीन के निर्यातक भी प्रभावित हैं। उन्हें फिलहाल ईरान से नए आर्डर नहीं मिल पा रहे हैं।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वर्ष 2015 में ईरान और अमेरिका में समझौता हुआ था। समझौते से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कदम पीछे खींच लिए। अमेरिका के इस रुख का ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। वहीं, भारतीय निर्यातक इससे प्रभावित हो रहे हैं।
ईरानी कारोबारियों का आयात घटने लगा है। इसका सीधा असर भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात पर है। नियमित तौर पर भारत में हस्तशिल्प उत्पादों की खरीदारी के लिए आने वाली ईरानी कंपनियों के प्रतिनिधियों की संख्या घट गई है। वे नए सौदे करने के लिए उत्साहित नहीं हैं। क्योंकि अमेरिकी रुख में बदलाव के बाद बड़ी तेजी के साथ ईरान की मुद्रा का अवमूल्यन हो रहा है।
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अब 624 ईरानी रियाल की कीमत एक रुपये के बराबर है। जबकि दो महीने पहले 450 रियाल बराबर एक रुपया था। भारतीय मुद्रा के मुकाबले में ईरानी रियाल का अवमूल्यन होने से वहां पर आयात घटने लगा है। आयातित वस्तुओं की कीमत बढ़ रही है। दो महीने में भारतीय हस्तशिल्प उत्पाद ईरान में 20-40 प्रतिशत तक मंहगे हो गए हैं। ईरान के रिटेल स्टोर संचालकों ने भारतीय निर्यातकों को बताया कि जब बिक्री घट रही है तो वह आयात करके क्या करेंगे। ईरानी रियाल मजबूत होगा तो माल खरीदेंगे।
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ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वर्ष 2015 में ईरान और अमेरिका में समझौता हुआ था। समझौते से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कदम पीछे खींच लिए। अमेरिका के इस रुख का ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। वहीं, भारतीय निर्यातक इससे प्रभावित हो रहे हैं।
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ईरानी कारोबारियों का आयात घटने लगा है। इसका सीधा असर भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात पर है। नियमित तौर पर भारत में हस्तशिल्प उत्पादों की खरीदारी के लिए आने वाली ईरानी कंपनियों के प्रतिनिधियों की संख्या घट गई है। वे नए सौदे करने के लिए उत्साहित नहीं हैं। क्योंकि अमेरिकी रुख में बदलाव के बाद बड़ी तेजी के साथ ईरान की मुद्रा का अवमूल्यन हो रहा है।
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अब 624 ईरानी रियाल की कीमत एक रुपये के बराबर है। जबकि दो महीने पहले 450 रियाल बराबर एक रुपया था। भारतीय मुद्रा के मुकाबले में ईरानी रियाल का अवमूल्यन होने से वहां पर आयात घटने लगा है। आयातित वस्तुओं की कीमत बढ़ रही है। दो महीने में भारतीय हस्तशिल्प उत्पाद ईरान में 20-40 प्रतिशत तक मंहगे हो गए हैं। ईरान के रिटेल स्टोर संचालकों ने भारतीय निर्यातकों को बताया कि जब बिक्री घट रही है तो वह आयात करके क्या करेंगे। ईरानी रियाल मजबूत होगा तो माल खरीदेंगे।