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अब गुन्नौर सीएचसी में प्रसव के दौरान दो नवजातों की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Sun, 04 Sep 2016 01:11 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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कोतवाली क्षेत्र के गांव नूरपुर निवासी हरिओम की पत्नी अतरकली को गुरुवार की रात प्रसव पीड़ा हुई। इस पर हरिओम ने 102 एंबुलेंस को फोन करके बुलाया, जिसकी सहायता से गुन्नौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महिला को ले जाया गया। यहां कोई महिला डाक्टर मौजूद नहीं थी।
स्टॉफ नर्स के माध्यम से ही डिलीवरी करा दी गई। प्रसव के कुछ देर बाद ही नवजात की मौत हो गई। पीड़ित दंपति ने प्रसव में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पतालकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। शुक्रवार को सुबह तक यह मामला चलता रहा। इस बीच धनारी थाना क्षेत्र के गांव कल्हा निवासी नेकसे अपनी पत्नी नेहा का प्रसव कराने के लिए अस्पताल ले गया था, जहां उसका बच्चा भी मृत पैदा हुआ। दो मौतों पर सवाल उठना लाजिमी ही है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि अस्पताल में कोई महिला डाक्टर नहीं होने के कारण मौतें हुईं। गर्भवती महिलाओं की सही तरीके से देखरेख नहीं हो पाई।
प्रसव कराने वाली स्टॉफ नर्स कुसुमलता का कहना है कि दोनों महिलाओं ने मृत बच्चों को जन्म दिया था। जब बच्चे पैदा हुए तो उनकी धड़कन नहीं चल रही थी। अस्पताल में हुईं दो मौतों पर अस्पताल प्रशासन मौन रहा। शनिवार को मामला उस समय तूल पकड़ा जब पीड़ित परिवार मामले की जांच कराने पर अड़ गए। अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और पहले तो अस्पताल के सीएमएस ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
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पहले भी हो चुकी हैं कई मौतें
संभल। चिकित्सा सेवाओं में लापरवाही की शिकायतें पहली बार नहीं आई। संभल के जिला अस्पताल में 17 जुलाई को साढ़े तीन घंटे में तीन नवजातों की मौत हुई थी। इस घटना पर मुरादाबाद मंडल के एडी हेल्थ ने जांच बैठाई थी। जांच अभी जारी है। इसके बाद 27 जुलाई को जुनावई सीएसची में बदहाल चिकित्सा सेवाओं की वजह से दो नवजातों की मौत हुई।
कर्मचारियों की लापरवाही की शिकायत आना गंभीर है। इस मामले में जवाबदेही तय होगी जो कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे उन पर कार्रवाई होगी।
एनकेएस चौहान, जिलाधिकारी।
गुन्नौर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर महिला चिकित्सक की तैनाती कराने के लिए कई बार सीएमओ को कई बार पत्र भेजा गया है। लेकिन हमारे पत्रों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नवजातों की मौत कैैसे हुई, इसके लिए जांच कराई जा रही है।
नीरज कुमार गुप्ता, प्रभारी सीएचसी गुन्नौर।
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स्टॉफ नर्स के माध्यम से ही डिलीवरी करा दी गई। प्रसव के कुछ देर बाद ही नवजात की मौत हो गई। पीड़ित दंपति ने प्रसव में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पतालकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। शुक्रवार को सुबह तक यह मामला चलता रहा। इस बीच धनारी थाना क्षेत्र के गांव कल्हा निवासी नेकसे अपनी पत्नी नेहा का प्रसव कराने के लिए अस्पताल ले गया था, जहां उसका बच्चा भी मृत पैदा हुआ। दो मौतों पर सवाल उठना लाजिमी ही है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि अस्पताल में कोई महिला डाक्टर नहीं होने के कारण मौतें हुईं। गर्भवती महिलाओं की सही तरीके से देखरेख नहीं हो पाई।
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प्रसव कराने वाली स्टॉफ नर्स कुसुमलता का कहना है कि दोनों महिलाओं ने मृत बच्चों को जन्म दिया था। जब बच्चे पैदा हुए तो उनकी धड़कन नहीं चल रही थी। अस्पताल में हुईं दो मौतों पर अस्पताल प्रशासन मौन रहा। शनिवार को मामला उस समय तूल पकड़ा जब पीड़ित परिवार मामले की जांच कराने पर अड़ गए। अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और पहले तो अस्पताल के सीएमएस ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
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पहले भी हो चुकी हैं कई मौतें
संभल। चिकित्सा सेवाओं में लापरवाही की शिकायतें पहली बार नहीं आई। संभल के जिला अस्पताल में 17 जुलाई को साढ़े तीन घंटे में तीन नवजातों की मौत हुई थी। इस घटना पर मुरादाबाद मंडल के एडी हेल्थ ने जांच बैठाई थी। जांच अभी जारी है। इसके बाद 27 जुलाई को जुनावई सीएसची में बदहाल चिकित्सा सेवाओं की वजह से दो नवजातों की मौत हुई।
कर्मचारियों की लापरवाही की शिकायत आना गंभीर है। इस मामले में जवाबदेही तय होगी जो कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे उन पर कार्रवाई होगी।
एनकेएस चौहान, जिलाधिकारी।
गुन्नौर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर महिला चिकित्सक की तैनाती कराने के लिए कई बार सीएमओ को कई बार पत्र भेजा गया है। लेकिन हमारे पत्रों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नवजातों की मौत कैैसे हुई, इसके लिए जांच कराई जा रही है।
नीरज कुमार गुप्ता, प्रभारी सीएचसी गुन्नौर।