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Sambhal News: हनुमान जी की प्रतिमा को भ्रमण कराने संभल पहुंचे गोविंदानंद
Wed, 01 Jan 2025 01:56 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Wed, 01 Jan 2025 01:56 AM IST
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संभल में खड़ा स्वामी गोविंदानंद सरस्वती का रथ। संवाद
संभल। स्वामी गोविंदानंद सरस्वती सोमवार शाम को संभल के मोहल्ला कोटपूर्वी स्थित प्राचीन श्री कल्कि विष्णु मंदिर पहुंचे। उन्हाेंने बताया कि कर्नाटक राज्य के जिला कोप्पल विजयनगर अंतर्गत किष्किंधा, जो पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की जन्मभूमि है। वह वहां से आए हैं। वहां हनुमान जी का भव्य मंदिर निर्माणाधीन है।
इस मंदिर में प्रतिष्ठित की जाने वाली हनुमान जी की प्रतिमा को देश में तीर्थ यात्रा कराई जा रही है। प्रतिमा को भगवान श्री कल्कि के दर्शन कराने के लिए संभल लाया गया है। रथ और स्वामी जी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मंदिर पहुंचे। मंगलवार को स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने भगवान श्री कल्कि के दर्शन करने के बाद हनुमान जी की प्रतिमा को भी भगवान श्री कल्कि के दर्शन कराए। बुधवार को अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर रथ द्वारा ही भव्य यात्रा निकाली जाएगी और तीर्थों के दर्शन करेंगे।
रथयात्रा में सनातन संस्कृति का विशेष प्रदर्शन होगा और भगवान श्री कल्कि का प्रचार प्रचार होगा। स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने लोगों से सनातन धर्म की महानता और अखंड भारत के विचार को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता और धर्म के प्रति समर्पण को बढ़ाने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि इसके बाद वह कुंभ के लिए प्रस्थान करेंगे। इस दौरान उनके साथ आचार्य सूरज मिश्रा, रामू, वीरेंद्र पाल आदि रहे।
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इस मंदिर में प्रतिष्ठित की जाने वाली हनुमान जी की प्रतिमा को देश में तीर्थ यात्रा कराई जा रही है। प्रतिमा को भगवान श्री कल्कि के दर्शन कराने के लिए संभल लाया गया है। रथ और स्वामी जी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मंदिर पहुंचे। मंगलवार को स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने भगवान श्री कल्कि के दर्शन करने के बाद हनुमान जी की प्रतिमा को भी भगवान श्री कल्कि के दर्शन कराए। बुधवार को अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर रथ द्वारा ही भव्य यात्रा निकाली जाएगी और तीर्थों के दर्शन करेंगे।
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रथयात्रा में सनातन संस्कृति का विशेष प्रदर्शन होगा और भगवान श्री कल्कि का प्रचार प्रचार होगा। स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने लोगों से सनातन धर्म की महानता और अखंड भारत के विचार को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता और धर्म के प्रति समर्पण को बढ़ाने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि इसके बाद वह कुंभ के लिए प्रस्थान करेंगे। इस दौरान उनके साथ आचार्य सूरज मिश्रा, रामू, वीरेंद्र पाल आदि रहे।
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