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न जमीन, न भवन फिर भी दे दी स्कूल की मान्यता
अमर उजाला/ ब्यूरोसंभल
Updated Sun, 31 Jul 2016 01:13 AM IST
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गुन्नौर क्षेत्र के जिजौंडाडांडा में माध्यमिक विद्यालय के लिए अभिलेखों का सत्यापन कराए बगैर ही यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ने मान्यता जारी कर दी। न जमीन थी और न ही भवन फिर भी माध्यमिक विद्यालय की मान्यता दे दी गई।
मामले की डीएम से शिकायत की गई तो उन्होंने एसडीएम गुन्नौर से इसकी जांच कराई। जांच के बाद उन्होंने पाया कि विद्यालय संचालक ने जिस जमीन पर स्कूल का संचालन दर्शाया गया था दरअसल वह जमीन उसकी थी ही नहीं। फर्जी खतौनी तैयार कर खाद के गड्ढों की सार्वजनिक भूमि को स्कूल का बताया गया था। इस रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग स्कूल की मान्यता रद करने की कार्यवाही में जुटा है। अगर ऐसा हुआ तो स्कूल में पढ़ने वाले 650 बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
शिक्षा और राजस्व विभाग के अफसर भी कठघरे में ः इसमें शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारी कर्मचारी भी सवालों के घेरे में हैं। दो सवाल अहम हैं। आखिर फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार हुए? फिर दस्तावेजों का सत्यापन कराए बिना मान्यता जारी क्यों की गई। गुन्नौर तहसील के जिजौंडा डांडा में बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नाम से 2005 में मान्यता जारी की गई है। बताया जाता है कि जिजौंडा डांडा में शारदा भवानी सनातन सेेवा समिति एवं बाबा रामगिरी मढ़ी के के आश्रम की बगिया में खुले आसमान के नीेचे स्कूल का संचालन शुरू किया गया था। फिर धीरे-धीरे कुछ कमरे बनवाए गए। बाद में आश्रम की जमीन पर ही मान्यता लेने का प्रयास हुआ तो लोगों ने विरोध कर दिया। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए। फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए और किसने कराए? यह जांच का विषय हो सकता है। लेकिन इस प्रकरण में राजस्व और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है। क्योंकि बिना राजस्व कर्मचारियों के ऐसे कागज तैयार नहीं हो सकते हैं। वहीं शिक्षाकर्मियों की मिली भगत के बिना फर्जी कागजों पर मान्यता भी नहीं मिल सकती।
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बताया जाता है कि मान्यता हासिल करने के लिए खाद के गड्ढों की सार्वजनिक जमीन के गाटा संख्या की फर्जी खतौनी तैयार की गई थी। इस खतौनी का सत्यापन कराए बिना ही बदायूं के तत्कालीन डीआईओएस ने वर्ष 2005 में मान्यता की संस्तुति की। माध्यमिक शिक्षा विभाग के बरेली स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने मान्यता जारी कर दी। इस मामले में पहली शिकायत 2005 में हुई लेकिन तब कार्रवाई नहीं हुई। मौजूदा डीएम एनकेएस चौहान ने चार मई को डीआईओएस, बीएसए और तहसीलदार गुन्नौर को प्रकरण के संबंध में गुन्नौर के एसडीएम को जांच के आदेश दिए।
एसडीएम ने अपनी जांच आख्या प्रस्तुत की है। इसमें फर्जीवाड़े का खुलासा किया गया है। अब यह प्रकरण अग्रिम कार्रवाई के लिए संभल डीआईओएस के पास लंबित है। मान्यता खत्म हुई तो 650 बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ेगा
मामले की डीएम से शिकायत की गई तो उन्होंने एसडीएम गुन्नौर से इसकी जांच कराई। जांच के बाद उन्होंने पाया कि विद्यालय संचालक ने जिस जमीन पर स्कूल का संचालन दर्शाया गया था दरअसल वह जमीन उसकी थी ही नहीं। फर्जी खतौनी तैयार कर खाद के गड्ढों की सार्वजनिक भूमि को स्कूल का बताया गया था। इस रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग स्कूल की मान्यता रद करने की कार्यवाही में जुटा है। अगर ऐसा हुआ तो स्कूल में पढ़ने वाले 650 बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
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शिक्षा और राजस्व विभाग के अफसर भी कठघरे में ः इसमें शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारी कर्मचारी भी सवालों के घेरे में हैं। दो सवाल अहम हैं। आखिर फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार हुए? फिर दस्तावेजों का सत्यापन कराए बिना मान्यता जारी क्यों की गई। गुन्नौर तहसील के जिजौंडा डांडा में बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नाम से 2005 में मान्यता जारी की गई है। बताया जाता है कि जिजौंडा डांडा में शारदा भवानी सनातन सेेवा समिति एवं बाबा रामगिरी मढ़ी के के आश्रम की बगिया में खुले आसमान के नीेचे स्कूल का संचालन शुरू किया गया था। फिर धीरे-धीरे कुछ कमरे बनवाए गए। बाद में आश्रम की जमीन पर ही मान्यता लेने का प्रयास हुआ तो लोगों ने विरोध कर दिया। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए। फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए और किसने कराए? यह जांच का विषय हो सकता है। लेकिन इस प्रकरण में राजस्व और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है। क्योंकि बिना राजस्व कर्मचारियों के ऐसे कागज तैयार नहीं हो सकते हैं। वहीं शिक्षाकर्मियों की मिली भगत के बिना फर्जी कागजों पर मान्यता भी नहीं मिल सकती।
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बताया जाता है कि मान्यता हासिल करने के लिए खाद के गड्ढों की सार्वजनिक जमीन के गाटा संख्या की फर्जी खतौनी तैयार की गई थी। इस खतौनी का सत्यापन कराए बिना ही बदायूं के तत्कालीन डीआईओएस ने वर्ष 2005 में मान्यता की संस्तुति की। माध्यमिक शिक्षा विभाग के बरेली स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने मान्यता जारी कर दी। इस मामले में पहली शिकायत 2005 में हुई लेकिन तब कार्रवाई नहीं हुई। मौजूदा डीएम एनकेएस चौहान ने चार मई को डीआईओएस, बीएसए और तहसीलदार गुन्नौर को प्रकरण के संबंध में गुन्नौर के एसडीएम को जांच के आदेश दिए।
एसडीएम ने अपनी जांच आख्या प्रस्तुत की है। इसमें फर्जीवाड़े का खुलासा किया गया है। अब यह प्रकरण अग्रिम कार्रवाई के लिए संभल डीआईओएस के पास लंबित है। मान्यता खत्म हुई तो 650 बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ेगा